टी20 में तो 'हाथ सेट है' लेकिन टेस्ट खेलना चाहूंगा; ODI खेलने को लेकर क्या बोले सूर्यकुमार यादव?

Mar 16, 2026 05:22 pm ISTChandra Prakash Pandey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, भाषा
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भारत के विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव का कहना है कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं। वनडे क्रिकेट उन्हें रास नहीं आता, लेकिन टी20 उनकी ताकत है क्योंकि ‘उसमें उनका हाथ सेट हो गया है।’

टी20 में तो 'हाथ सेट है' लेकिन टेस्ट खेलना चाहूंगा; ODI खेलने को लेकर क्या बोले सूर्यकुमार यादव?

भारत के विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव का कहना है कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं। वनडे क्रिकेट उन्हें रास नहीं आता, लेकिन टी20 उनकी ताकत है क्योंकि ‘उसमें उनका हाथ सेट हो गया है।’

सूर्यकुमार याद ने पीटीआई के साथ एक स्पेशल पॉडकास्ट इंटरव्यू में कभी-कभी मुंबई की आकर्षक हिंदी का उपयोग करते हुए नजर आए जैसे कि ‘हाथ सेट हो गया है’ जिसका अंग्रेजी में कोई सटीक अनुवाद नहीं है। सरल शब्दों में कहें तो उनका मतलब था कि वह अब क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप के उस्ताद बन चुके हैं और इसे खेलने में सहज महसूस करते हैं।

एक घंटे की बातचीत के दौरान सूर्यकुमार काफी सहज नजर आए और वह भारत को विश्व कप में शानदार सफलता दिलाने के बाद स्पष्ट रूप से बेहद खुश थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट न खेलने की अपनी निराशा के बारे में खुलकर बात की।

सूर्यकुमार ने इस इंटरव्यू के दौरान अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ याद दिलाया कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेला था जिसमें वह केवल एक पारी खेल पाए थे।

सूर्यकुमार ने कहा, ‘आपकी किस्मत में जो लिखा होता है, आपको वही मिलता है। मैंने भी लाल गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया था और 10-12 साल तक रणजी ट्राफी खेली। मैंने मुंबई में लाल गेंद से बहुत क्रिकेट खेली है क्योंकि अगर आप मुंबई में पले बढ़े होते हैं तो आप लाल गेंद से ही शुरुआत करते हैं, इसलिए सब कुछ लाल गेंद के इर्द-गिर्द ही घूमता है।’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन धीरे-धीरे जब हमने सफेद गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू की तो मेरा झुकाव थोड़ा उसकी तरफ हो गया। इसके बाद मैं इस प्रारूप (टी20) में दिलचस्पी लेने लगा। मैंने वनडे (50 ओवर की क्रिकेट) में भी अच्छा खेलने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ खास नहीं कर पाया।’

भारतीय कप्तान ने कहा, ‘टी20 क्रिकेट में जैसा चल रहा था, उसमें अपना हाथ सेट हो गया है, ऐसा बोल सकते हैं।’

सूर्यकुमार से जब पूछा गया कि अगर उन्हें मौका मिले तो क्या वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहेंगे? उन्होंने बिना किसी लाग लपेट के जवाब दिया, ‘मुझे बहुत खुशी होगी, क्योंकि जैसा कि मैंने बताया कि मैंने 2010-11 से 2020 तक लाल गेंद से काफी क्रिकेट खेली है। दस साल तक लाल गेंद से खेलना बहुत लंबा समय होता है। मुझे इस प्रारूप से बेहद लगाव था। स्वाभाविक है कि अगर मौका मिले तो फिर कौन टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलना चाहेगा।’

फिर भी 35 साल की उम्र में सूर्यकुमार के लिए टेस्ट टीम में जगह बनाना लगभग असंभव है। टेस्ट में उनका एकमात्र अनुभव 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया मैच था, जब उन्होंने एक पारी में आठ रन बनाए थे।

उसी साल उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे विश्व कप के फाइनल में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने 28 गेंदों में 18 रन बनाए। भारत फाइनल हार गया और सूर्यकुमार उसके बाद इस प्रारूप में कभी नहीं खेल पाए।

सूर्यकुमार से जब पूछा गया कि ऐसे ही समय में जब टी20 कम समय में प्रशंसकों को अधिक रोमांचित करता है और टेस्ट क्रिकेट उन्हें पारंपरिक संतुष्टि देता है तो क्या वनडे का कोई भविष्य है, उन्होंने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए इस प्रारूप को बहुत अधिक खारिज किए बिना उसको उचित सम्मान दिया।

वनडे में द्विपक्षीय श्रृंखलाओं की संख्या लगातार घट रही है जो इस प्रारूप के पतन का संकेत दे रही है और यही आलम रहा तो वनडे क्रिकेट का अंत हो सकता है।

सूर्यकुमार ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैंने वनडे क्रिकेट को जितना करीब से अनुभव किया है और देखा है, यह एक ऐसा प्रारूप है जहां आपको तीन अलग-अलग तरीकों से बल्लेबाजी करनी पड़ती है। कभी-कभी अगर आप जल्दी बल्लेबाजी करने जाते हैं, अगर विकेट जल्दी गिरते हैं तो आपको टेस्ट क्रिकेट की तरह बल्लेबाजी करनी पड़ती है।’

उन्होंने कहा, ‘फिर आपको वनडे की तरह अच्छे स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करनी होती है और पारी के आखिरी ओवरों में टी20 प्रारूप की तरह बल्लेबाजी करनी होती है। इसलिए यह एक ऐसा प्रारूप है जिसे मैं कभी समझ नहीं पाया। मैंने इसे खेलने की पूरी कोशिश की लेकिन यह चुनौती पूर्ण प्रारूप है।’

भारत के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना ​​है कि वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने एक बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को इसे पूरी तरह से समाप्त करने की सलाह दी थी। इंग्लैंड के केविन पीटरसन का मानना ​​है कि टी20 क्रिकेट के लगातार विस्तार के कारण 50 ओवर का क्रिकेट सबसे अधिक खतरे में है।

सूर्यकुमार ने वनडे विश्व कप 2023 के दौरान की गई तैयारी और माहौल को भी याद किया।

उन्होंने कहा, ‘जब मैं 2023 वनडे विश्व कप के लिए टीम के साथ था और मैं उसमें खेला था तब उस प्रारूप का माहौल, फाइनल से पहले की तैयारियां, वह सब 2026 और 2024 के टी20 विश्व कप में खेले गए मैचों से बिलकुल अलग था।’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए, इसका आकर्षण अलग है। वनडे क्रिकेट का भी अपना अलग आकर्षण है, टी20 का तो और भी अलग।’

Chandra Prakash Pandey

लेखक के बारे में

Chandra Prakash Pandey

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।

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