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क्या KL राहुल ने वनडे में MS धोनी की कमी पूरी कर दी है? हार्दिक और रिंकू की तुलना में क्यों हैं ज्यादा करीब

क्या KL राहुल ने वनडे में MS धोनी की कमी पूरी कर दी है? हार्दिक और रिंकू की तुलना में क्यों हैं ज्यादा करीब

संक्षेप:

धोनी की सबसे बड़ी ताकत मैच के अंत तक क्रीज पर टिके रहना थी। सफल रन-चेज (लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत) में धोनी 75 पारियों में से 47 बार नाबाद रहे थे। राहुल ने भी अब उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, सफल चेज की अपनी 25 पारियों में से राहुल 13 बार नाबाद रहे हैं।

Jan 12, 2026 09:41 pm ISTVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास के बाद से हमेशा एक ऐसे खिलाड़ी की कमी महसूस की गई जो मुश्किल समय में मैच को संभाल सके और टीम को जीत दिलाकर ही वापस लौटे। अक्सर फैंस को लगता है कि 'फिनिशर' का मतलब केवल रिंकू सिंह या हार्दिक पांड्या की तरह बड़े छक्के मारना है, लेकिन आंकड़ों की मानें तो केएल राहुल ने चुपचाप खुद को धोनी के आधुनिक विकल्प के रूप में तैयार कर लिया है।

धोनी की सबसे बड़ी ताकत मैच के अंत तक क्रीज पर टिके रहना थी। सफल रन-चेज (लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत) में धोनी 75 पारियों में से 47 बार नाबाद रहे थे। राहुल ने भी अब उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, सफल चेज की अपनी 25 पारियों में से राहुल 13 बार नाबाद रहे हैं। इसका मतलब है कि 52% बार जब भारत लक्ष्य का पीछा करते हुए जीता है, तो राहुल मैच खत्म करके ही पवेलियन लौटे हैं। यह एक सच्चे 'फिनिशर' की पहचान है।

राहुल का खेल का तरीका भी काफी हद तक धोनी से मिलता-जुलता है। वे केवल आखिरी ओवरों में आकर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी नहीं करते, बल्कि धोनी की तरह दोहरी भूमिका निभाते हैं। पहले वे विकेट गिरने से रोककर पारी को स्थिरता देते हैं और फिर सही समय पर रन बनाकर मैच को खत्म करते हैं। वे एक 'कनेक्टर' की तरह काम करते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि मैच कभी ऐसी स्थिति में न पहुंचे जहां जीत के लिए किसी चमत्कार की जरूरत पड़े।

आज के दौर में जहां क्रिकेट बहुत तेज और आक्रामक हो गया है, राहुल की यह समझ टीम इंडिया के लिए बहुत कीमती है। वे धोनी की नकल नहीं कर रहे, बल्कि धोनी की उसी अनुशासन और भरोसे वाली तकनीक को वापस ला रहे हैं जिससे फैंस को यह यकीन हो जाता है कि जब तक वे क्रीज पर हैं रिजल्ट टीम के पक्ष में आएगा। राहुल ने धोनी की कमी को अपनी सूझबूझ भरी बल्लेबाजी से भरना अब धीरे-धीरे शुरू कर दिया है।

हालांकि, हार्दिक पांड्या और रिंकू सिंह भी अच्छे फिनिशर हैं, लेकिन वनडे क्रिकेट में दोनों को अब तक विकेट बचाकर खेलने और रन बनाने वाली भूमिका में नहीं देखा गया है। एक तरफ जहां रिंकू सिंह को वनडे क्रिकेट में कम मौके मिले हैं, वहीं हार्दिक पांड्या अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं जो विकेट बचाकर रखने और पार्टनरशिप बनाकर खेलने के बजाए तेज गति से रन बनाने और मैच को जल्दी खत्म करने में ज्यादा यकीन रखते हैं। लोकेश राहुल की तुलना में हार्दिक पांड्या कई बार मुश्किल परिस्थितियों में गलत शॉर्ट सिलेक्शन करके विकेट भी गवां देते हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से राहुल के साथ वनडे क्रिकेट में ऐसा कम देखा गया है। भारतीय वनडे टीम में धोनी की जगह भरना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि केएल राहुल अब उनकी जगह लेने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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