
क्या KL राहुल ने वनडे में MS धोनी की कमी पूरी कर दी है? हार्दिक और रिंकू की तुलना में क्यों हैं ज्यादा करीब
धोनी की सबसे बड़ी ताकत मैच के अंत तक क्रीज पर टिके रहना थी। सफल रन-चेज (लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत) में धोनी 75 पारियों में से 47 बार नाबाद रहे थे। राहुल ने भी अब उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, सफल चेज की अपनी 25 पारियों में से राहुल 13 बार नाबाद रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास के बाद से हमेशा एक ऐसे खिलाड़ी की कमी महसूस की गई जो मुश्किल समय में मैच को संभाल सके और टीम को जीत दिलाकर ही वापस लौटे। अक्सर फैंस को लगता है कि 'फिनिशर' का मतलब केवल रिंकू सिंह या हार्दिक पांड्या की तरह बड़े छक्के मारना है, लेकिन आंकड़ों की मानें तो केएल राहुल ने चुपचाप खुद को धोनी के आधुनिक विकल्प के रूप में तैयार कर लिया है।
धोनी की सबसे बड़ी ताकत मैच के अंत तक क्रीज पर टिके रहना थी। सफल रन-चेज (लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत) में धोनी 75 पारियों में से 47 बार नाबाद रहे थे। राहुल ने भी अब उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, सफल चेज की अपनी 25 पारियों में से राहुल 13 बार नाबाद रहे हैं। इसका मतलब है कि 52% बार जब भारत लक्ष्य का पीछा करते हुए जीता है, तो राहुल मैच खत्म करके ही पवेलियन लौटे हैं। यह एक सच्चे 'फिनिशर' की पहचान है।
राहुल का खेल का तरीका भी काफी हद तक धोनी से मिलता-जुलता है। वे केवल आखिरी ओवरों में आकर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी नहीं करते, बल्कि धोनी की तरह दोहरी भूमिका निभाते हैं। पहले वे विकेट गिरने से रोककर पारी को स्थिरता देते हैं और फिर सही समय पर रन बनाकर मैच को खत्म करते हैं। वे एक 'कनेक्टर' की तरह काम करते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि मैच कभी ऐसी स्थिति में न पहुंचे जहां जीत के लिए किसी चमत्कार की जरूरत पड़े।
आज के दौर में जहां क्रिकेट बहुत तेज और आक्रामक हो गया है, राहुल की यह समझ टीम इंडिया के लिए बहुत कीमती है। वे धोनी की नकल नहीं कर रहे, बल्कि धोनी की उसी अनुशासन और भरोसे वाली तकनीक को वापस ला रहे हैं जिससे फैंस को यह यकीन हो जाता है कि जब तक वे क्रीज पर हैं रिजल्ट टीम के पक्ष में आएगा। राहुल ने धोनी की कमी को अपनी सूझबूझ भरी बल्लेबाजी से भरना अब धीरे-धीरे शुरू कर दिया है।
हालांकि, हार्दिक पांड्या और रिंकू सिंह भी अच्छे फिनिशर हैं, लेकिन वनडे क्रिकेट में दोनों को अब तक विकेट बचाकर खेलने और रन बनाने वाली भूमिका में नहीं देखा गया है। एक तरफ जहां रिंकू सिंह को वनडे क्रिकेट में कम मौके मिले हैं, वहीं हार्दिक पांड्या अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं जो विकेट बचाकर रखने और पार्टनरशिप बनाकर खेलने के बजाए तेज गति से रन बनाने और मैच को जल्दी खत्म करने में ज्यादा यकीन रखते हैं। लोकेश राहुल की तुलना में हार्दिक पांड्या कई बार मुश्किल परिस्थितियों में गलत शॉर्ट सिलेक्शन करके विकेट भी गवां देते हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से राहुल के साथ वनडे क्रिकेट में ऐसा कम देखा गया है। भारतीय वनडे टीम में धोनी की जगह भरना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि केएल राहुल अब उनकी जगह लेने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।






