गौतम गंभीर बहुत कड़वा बोलते हैं... हरभजन सिंह ने हेड कोच को लेकर ऐसा क्यों कहा? आप भी सुनिए
हरभजन सिंह ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर का समर्थन किया है और कहा है कि वह जुनूनी खिलाड़ी हैं और कोच भी ऐसे ही हैं। वे खुद से आगे टीम को रखते हैं। अच्छे इंसान हैं और दिल उनका साफ है।

गौतम गंभीर इस समय टीम इंडिया के हेड कोच हैं और उनकी आलोचना जमकर हो रही है। इसके पीछे का कारण यह है कि भले ही उन्होंने दो आईसीसी ट्रॉफी देश को जिताई हैं, लेकिन मौजूदा समय में उनके अंडर टीम इंडिया का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। टेस्ट क्रिकेट में तो उनकी कोचिंग में टीम इंडिया का बुरा हाल रहा है। बावजूद इसके पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने उनका समर्थन किया है और कहा है कि वह जुनूनी खिलाड़ी हैं, खुद से आगे टीम को रखते हैं। अच्छे इंसान हैं और दिल उनका साफ है। भज्जी ने यह भी कहा कि कई लोगों को सच सुनना अच्छा नहीं लगता, इसलिए कुछ लोगों को लग सकता है कि वह घमंडी हैं।
हरभजन सिंह ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, “जब कोई कोच बनता है, तो जाहिर है, अगर टीम अच्छा परफॉर्म नहीं करती है, तो कोच पर भी प्रेशर आ जाता है। गौतम गंभीर हमेशा से बहुत जुनूनी खिलाड़ी रहे हैं। वह ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने हमेशा टीम को खुद से ऊपर रखा है। बहुत कम लोग उन्हें करीब से जानते हैं। जब वह यंग थे और टीम में शामिल हुए थे, तो वह कुछ ही लोगों से मिलते-जुलते थे, लेकिन जिनसे भी उनकी दोस्ती हुई, उनके वह बहुत करीब रहे। उनके दोस्त वीरेंद्र सहवाग, अमित मिश्रा और मुनाफ पटेल जैसे थे।”
वह कड़वा बोलते हैं, मगर सच बोलते हैं
भज्जी ने आगे कहा, "मुझे नहीं पता कि वह अब कैसे हैं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि वह अब भी वैसे ही होंगे। गौतम एक अच्छे इंसान हैं और उनका दिल भी अच्छा है। बहुत से लोगों को लगता है कि वह कड़वा बोलते हैं, लेकिन असलियत यह है कि वह सच बोलते हैं। बहुत से लोगों को सच सुनना पसंद नहीं है। इसलिए कुछ लोगों को लग सकता है कि वह थोड़े घमंडी हैं, लेकिन आपको किसी किताब को उसके कवर से जज नहीं करना चाहिए। मुझे लगता है कि वह एक ब्रिलियंट इंसान हैं और अच्छी तरह समझते हैं कि गेम कैसे खेला जाना चाहिए।"
लंबे समय तक साथ में क्रिकेट खेले भज्जी ने गौती को लेकर इसी इंटरव्यू में आगे कहा, "एक बात पक्की है: जब वह किसी टीम के कोच होंगे, तो वह प्लेयर्स से उसी पैशन के साथ खेलने की उम्मीद करेंगे जैसा वह एक प्लेयर के तौर पर करते थे। वह चाहते हैं कि टीम जीते। हर कोच जीतना चाहता है, लेकिन इंटेंट मायने रखता है। पॉजिटिव खेलते हुए और जीतने की कोशिश करते हुए हारना ठीक है, लेकिन जीतने की कोशिश न करना, ड्रॉ से खुश होना और इंटेंट की कमी ठीक नहीं है। सही इंटेंट होना बहुत ज़रूरी है।"



