दिन के टेस्ट में पिंक बॉल का इस्तेमाल! गौतम गंभीर ने ICC के प्रस्ताव का किया समर्थन
इस अक्टूबर से अगर किसी टेस्ट मैच के दौरान कम रोशनी की बाधा आती है तो फ्लड लाइट जलाकर रेड बॉल की जगह पिंक बॉल का इस्तेमाल हो सकेगा। हालांकि ये दोनों कप्तानों की सहमति से ही हो पाएगा। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने आईसीसी के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टेस्ट क्रिकेट में खराब रोशनी की स्थिति में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का समर्थन किया है। टेस्ट के दौरान कई बार ऐसा देखा जाता है कि खराब रोशनी की वजह से खेल को रोकना पड़ता है। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने ऐसी स्थिति में फ्लडलाइट जलाकर गुलाबी गेंद के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। गौतम गंभीर ने आईसीसी के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे मैच का रिजल्ट हासिल करने का मौका मिलेगा।
आईसीसी बोर्ड की हालिया बैठक में यह फैसला लिया गया कि दोनों टीमों की सहमति होने पर सामान्य टेस्ट मैचों में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का परीक्षण किया जा सकेगा, ताकि खराब रोशनी की आशंका होने पर अधिक से अधिक खेल संभव हो सके। यहां ये ध्यान देना जरूरी है कि इसके लिए दोनों टीमों की सहमति जरूरी है।
यह पता चला है कि मैच की शुरुआत पारंपरिक लाल गेंद से होगी, लेकिन अगर रोशनी की समस्या पैदा होती है तो फ्लडलाइट (दुधिया रोशनी) में गुलाबी गेंद का उपयोग किया जाएगा, जिससे उन ओवरों की भरपाई की जा सके
गंभीर ने अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच से पहले कहा, ‘मुझे यह फैसला पसंद है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अगर मैच का परिणाम निकालने का अवसर मौजूद है तो उसे हर हाल में किया जाना चाहिए।’
यह नया नियम एक अक्टूबर से लागू होगा। गंभीर के समर्थन के पीछे एक व्यवहारिक कारण भी है। भारत को फरवरी-मार्च में घरेलू मैदान पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेलनी है। श्रृंखला का तीसरा टेस्ट गुवाहाटी और अंतिम टेस्ट रांची में प्रस्तावित है। देश के पूर्वी क्षेत्र के इन शहरों में सूर्यास्त अपेक्षाकृत जल्दी होने के कारण खेल के ओवर प्रभावित हो सकते हैं।
गंभीर ने कहा, 'कल्पना कीजिए कि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल से पहले आप आखिरी टेस्ट खेल रहे हों और जीत के साथ फाइनल में जगह बनाने की संभावना हो लेकिन खराब रोशनी के कारण मैच का परिणाम ही न निकल पाए। अगर दोनों टीमें सहमत हों और परिणाम निकालने का अवसर मिले, तो मैं इसके पूरी तरह पक्ष में हूं।'
उन्होंने हालांकि स्वीकार किया कि एक ही मैच के दौरान लाल गेंद से गुलाबी गेंद में बदलाव खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल में जगह दांव पर होने की स्थिति में खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप ढलना होगा।
उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि खिलाड़ियों के लिए यह बदलाव कुछ कठिन और अनिश्चित हो सकता है, लेकिन सोचिए कि आपने दो वर्षों तक कड़ी मेहनत की हो और फाइनल से पहले आखिरी टेस्ट मैच खेल रहे हों।’
गंभीर ने कहा, ‘अगर खराब किस्मत के कारण पांच दिनों तक पर्याप्त खेल ही न हो पाए तो उससे बड़ी अनिश्चितता और क्या होगी? मुझे लगता है कि यह एक सकारात्मक कदम है। उम्मीद है कि टीमें भी इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से अपनाएंगी।’
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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