वर्ल्ड कप 2011 के लिए भारतीय टीम में युवराज सिंह को जगह नहीं मिल रही थी, लेकिन…गैरी कर्स्टन का बड़ा दावा
जिस खिलाड़ी ने टीम इंडिया को साल 2011 का विश्व कप जिताया, उसी खिलाड़ी के लिए टीम में जगह नहीं थी। जी हां, ऐसा ही कुछ दावा टीम इंडिया के तत्कालीन हेड कोच गैरी कर्स्टन ने युवराज सिंह को लेकर किया है।

टीम इंडिया के लिए वर्ल्ड कप 2011 का सबसे बड़ा हीरो कौन? जवाब है- युवराज सिंह, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के इस दिग्गज ऑलराउंडर की जगह टीम में ही नहीं बन रही थी। ये खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि टीम इंडिया को वर्ल्ड कप 2011 में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले हेड कोच गैरी कर्स्टन ने किया है। गैरी कर्स्टन ने स्वीकार किया कि युवराज सिंह का सिलेक्शन आंतरिक बहस का विषय रहा था और इस बात पर वास्तविक संदेह था कि उन्हें टीम में रखा जाए या नहीं। हालांकि, कर्स्टन और कप्तान एमएस धोनी ने इस आक्रामक बाएं हाथ के खिलाड़ी का समर्थन किया और अब यह फैसला भारतीय क्रिकेट के सबसे बेहतरीन फैसलों में से एक माना जाता है।
टीम इंडिया ने 2011 का वर्ल्ड कप जीतकर 28 साल पुराना सूखा समाप्त किया था। आखिरी बार भारत 1983 में विश्व चैंपियन बना था। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत ने फाइनल में श्रीलंका को धूल चटाई थी। इस पूरे विश्व कप में बल्ले और गेंद से दमदार प्रदर्शन करके उन्होंने प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का अवॉर्ड जीता था। उन्होंने 362 रन टूर्नामेंट में बनाए थे और 15 विकेट निकाले थे। हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे कड़ी मेहनत और व्यक्तिगत परिवर्तन की कहानी भी छिपी है।
रेडिफ के साथ बातचीत में गैरी कर्स्टन ने बताया, "शुक्र है कि हमने उसे सिलेक्ट किया, क्योंकि मुकाबला बेहद करीबी था... मैं उसे टीम में लेने के लिए बहुत उत्सुक था और धोनी भी, क्योंकि वह टीम में अनुभव लेकर आए था और देखिए, उसने जो विश्व कप जीता, वह कैसा रहा। मुझे युवराज हमेशा से बहुत पसंद था। वो कभी-कभी मुझे बहुत परेशान कर देता था, लेकिन मैं उससे प्यार करता था। वो अच्छा था। मैं बस यही चाहता था कि वो हर समय रन बनाता रहे, क्योंकि उसे बल्लेबाजी करते देखना अद्भुत था।" कर्स्टन ने युवराज को टूर्नामेंट के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन को क्रेडिट दिया।
कर्स्टन ने बताया, "उन्हें एक सफर तय करना था और इसका क्रेडिट पैडी को जाता है। पैडी ने युवी को तैयार करने के लिए उनके साथ काफी काम किया। युवी ने विश्व कप की तैयारी के लिए खुद कई अहम फैसले लिए थे।" युवराज ने वर्ल्ड कप में अहम मौकों पर रन बनाए और विकेट निकाले। फिर चाहे बात ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वॉर्टर फाइनल ही हो या तीनों नॉकआउट मैचों में 2-2 विकेट निकालने की हो।
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