पता नहीं कब खेलने को मिलेगा से अपना टाइम आएगा तक, संजू सैमसन ने WC को लेकर कही दिल की बात
संजू सैमसन 2024 के टी20 वर्ल्ड कप के स्क्वाड में थे लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने को नहीं मिला था। पता नहीं कब खेलने को मिलेगा से लेकर अपना टाइम आएगा के पक्के यकीन तक उनका सफर शानदार रहा है। BCCI की तरफ से जारी एक वीडियो में सैमसन ने T20 वर्ल्ड कप को लेकर अपने इसी सफर के बारे में खुलकर बात की है।

संजू सैमसन 2024 में हुए पिछले टी20 वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं खेल पाए थे। उसकी टीस उनके मन में अब भी है। अब 2026 टी20 वर्ल्ड कप के लिए संजू सैमसन भारत के प्रमुख विकेटकीपर बल्लेबाज हैं और बहुत संभव है कि अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करेंगे। पिछले वर्ल्ड कप के बाद से उनका करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ओपनिंग में आजमाए जाने के बाद तो उन्होंने जबरदस्त छाप छोड़ी। पता नहीं कब खेलने को मिलेगा से लेकर अपना टाइम आएगा के पक्के यकीन तक उनका सफर शानदार रहा है। बीसीसीआई की तरफ से जारी किए गए एक वीडियो में संजू सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप को लेकर अपने इसी सफर के बारे में खुलकर बात की है।
बतौर क्रिकेटर अपनी यात्रा को लेकर संजू सैमसन कहते हैं, '10 वर्षों में बहुत सारी नाकामी, बीच-बीच में कुछ कामयाबी, ये हमेशा एक समझ से जुड़ी रही कि भारतीय टीम के लिए एक वर्ल्ड कप क्रिकेटर बनने के लिए क्या जरूरी है और मैं इसे बहुत शिद्दत से चाहता हूं। मैं (वर्ल्ड कप में) उतरना चाहता हूं और अपने तरीके से सफल या नाकाम होना चाहता हूं।'
वीडियो में सैमसन आगे कहते हैं, ‘2024 वर्ल्ड कप की बात करें तो मैं एक भी मैच नहीं खेल पाया। हां, ईमानदारी से कहूं तो चीजें कुछ उतार-चढ़ाव भरी थीं। मैंने जो अपेक्षाएं रखी थीं, उस हिसाब से चीजें नहीं हुईं। लेकिन तब भी मैं इस बात के लिए आभारी था कि मुझे फिफ्टीन में जगह मिली। मेरा सफर बहुत खास था कि पता नहीं कब खेलने को मिलेगा...लेकिन मैंने उम्मीदें बनाए रखी, मैंने हर छोटी चीजों पर फोकस बनाए रखी और मुझे पता था कि मेरा टाइम आएगा।’
कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ अपने बेहतर तालमेल का जिक्र करते हुए संजू सैमसन ने कहा, 'मेरी सूर्या के साथ शानदार तालमेल है। कप्तान के साथ इस तरह का कनेक्ट होना इस फॉर्मेट में बहुत महत्वपूर्ण है। हम बहुत सारे आइडिया का आदान-प्रदान करते रहते हैं और बहुत सारे सवाल पूछते रहते हैं। मुझे लगता है कि मैं हमेशा उन्हें अच्छी सलाह देने के लिए सबसे अच्छी जगह (विकेटकीपर की भूमिका) पर रहता हूं।'
टी20 विश्व कप में अपनी भूमिका को लेकर सैमसन ने कहा, 'मेरी भूमिका बहुत स्पष्ट है। मुझे सिर्फ सकारात्मक योगदान देना है। मुझे अब भी लगता है कि अभी थोड़ा और करने की जरूरत है। मेरे भीतर अब भी वहां जाने और योगदान देने की और ज्यादा भूख बनी हुई है।'

लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय, असिस्टेंट एडिटर
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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