
आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को देखना चाहते हैं वसीम अकरम, ICC से लगाई ये गुहार
महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने आईसीसी से मांग की है कि 'खेल से राजनीति को अलग करने' के लिए वो दखल दे। विजडन को दिए इंटरव्यू में अकरम ने कहा कि वह क्रिकेट में राजनीति को नापसंद करते हैं। हर लीग क्रिकेट में हर देश के खिलाड़ियों को चुना जाना चाहिए। उनका साफ इशारा इंडियन प्रीमियर लीग की तरफ था।
महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने आईसीसी से मांग की है कि 'खेल से राजनीति को अलग करने' के लिए वो दखल दे। विजडन को दिए इंटरव्यू में अकरम ने कहा कि वह क्रिकेट में राजनीति को नापसंद करते हैं। हर लीग क्रिकेट में हर देश के खिलाड़ियों को चुना जाना चाहिए। उनका साफ इशारा इंडियन प्रीमियर लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने पर लगे बैन की तरफ था।
क्रिकेट में राजनीति मुझे नापसंद: अकरम
इंटरव्यू में अकरम ने कहा, 'सॉरी, लेकिन मैं क्रिकेट में राजनीति को पसंद नहीं करता। साफ-साफ कहता हूं। खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। लीग क्रिकेट में हर देश के खिलाड़ियों को चुनो। हिम्मती बनो। बड़े दिल वाला बनो। लेकिन दुर्भाग्य से ये नहीं हो रहा है। और मुझे लगता है कि यहां आईसीसी को दखल देना चाहिए। यहां क्रिकेट बोर्ड्स को आगे आना चाहिए। यह मायने नहीं रखना चाहिए कि लीग का मालिक कौन है। यह मायने नहीं रखता कि टीमों के मालिक कौन हैं। हर देश के हर खिलाड़ी को चुना जाना चाहिए।'
आईपीएल का नाम तो नहीं लिया मगर इशारा साफ
अकरम ने वैसे तो पाकिस्तानी क्रिकेटरों या आईपीएल का जिक्र नहीं किया। सीधे-सीधे ये नहीं कहा कि आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए लेकिन उनका इशारा तो एकदम साफ था। आईपीएल में किसी भी देश का खिलाड़ी खेल सकता है, बस पाकिस्तान का नहीं।
आईपीएल खेल चुके हैं पाकिस्तानी खिलाड़ी
वैसे पाकिस्तान के खिलाड़ी हमेशा से आईपीएल में बैन नहीं रहे हैं। शोएब अख्तर, कामरान अकमल, सोहेल तनवीर जैसे कई पाकिस्तानी क्रिकेटर आईपीएल में खेल चुके हैं। 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद बीसीसीआई ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए आईपीएल के दरवाजे बंद कर दिए।
पाकिस्तान की नापाक हरकतों का असर खेल संबंधों पर भी पड़ा
इस साल सितंबर में हुए एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रिश्तों में तनाव का असर खेल के मैदान पर भी दिखा था। द्विपक्षीय सीरीज से दूर रहने वाली दोनों टीमें टूर्नामेंट के दौरान फाइनल समेत 3 मैच में आमने-सामने हुईं। तीनों में ही भारत ने जीत दर्ज की लेकिन किसी भी मैच में दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक दूसरे से हाथ नहीं मिलाया। वजह इस साल अप्रैल में पहलगाम में सैलानियों की टारगेटेड किलिंग थी। पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर सैलानियों को उनकी पत्नी और बच्चों के सामने बर्बरता से हत्या की थी।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद से और ज्यादा तनाव
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। आतंकियों पर भारत की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से हमले की नाकाम कोशिश की थी। भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान थर्रा गया। उसका एयर डिफेंस सिस्टम मजाक बनकर रह गया। भारत ने कई पाकिस्तानी एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया। रनवे उड़ा दिए। हैंगर में लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया। इससे पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और उसके डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से सीजफायर की गुहार लगाई। भारत ने सीजफायर की गुहार को इस चेतावनी के साथ स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं। अगर फिर पाकिस्तान ने पहलगाम जैसी कोई हिमाकत की तो ऑपरेशन फिर शुरू हो जाएगा।
खेल-राजनीति का ज्ञान देने वाले पाकिस्तानी खिलाड़ी आतंक पर सिल लेते हैं मुंह
खेल को राजनीति से दूर रखने का ज्ञान देने वाले वसीम अकरम या किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी ने कभी आतंकी हमलों की निंदा तक नहीं की है। शाहिद अफरीदी जैसे कुछ पाकिस्तानी पूर्व क्रिकेटर तो भारत के खिलाफ जहर ही उगलते रहते हैं। शोएब अख्तर जैसे पूर्व क्रिकेटर खुलेआम भारतीय मंच पर ही हिंदू, मुस्लिम साथ नहीं रह सकते की बात करते हुए टू-नेशन थिअरी की डींगे हाकते नजर आ चुके हैं। वहां का एक मंत्री भारतीय टीम का ट्रॉफी ही चुरा लेता है क्योंकि उस ट्रॉफी तक उसकी इसलिए पहुंच रहती है कि वह एसीसी का अध्यक्ष है।






