
'हजार बार और कोशिश करता तो भी नहीं पकड़ पाता'; विश्व कप फाइनल में रोहित के कैच को हेड ने बताया ‘अचंभा’
ट्रेविस हेड ने स्वीकार किया कि रोहित शर्मा का वह कैच लेना उनके लिए भी किसी अचंभे से कम नहीं था। हेड ने अपनी ईमानदारी से सभी को चौंकाते हुए कहा, मुझे लगता है कि अगर मैं उस कैच को पकड़ने के लिए एक हजार बार और कोशिश करता, तो भी मैं उसे नहीं पकड़ पाता।
19 नवंबर 2023 की वह तारीख भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में टीम इंडिया की हार का एक सबसे बड़ा मोड़ कप्तान रोहित शर्मा का वह विकेट था, जिसे ट्रेविस हेड के एक 'अविश्वसनीय' कैच ने हकीकत में बदला था। अब महीनों बाद खुद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ट्रेविस हेड ने उस ऐतिहासिक पल पर एक ऐसा खुलासा किया है, जो यह बताता है कि खेल के बड़े मंच पर किस्मत और कौशल का संगम कैसे इतिहास बदल देता है।
'ऑसमेरिकन एसेस' (Ausmerican Aces) के साथ बातचीत के दौरान ट्रेविस हेड ने स्वीकार किया कि रोहित शर्मा का वह कैच लेना उनके लिए भी किसी अचंभे से कम नहीं था। हेड ने अपनी ईमानदारी से सभी को चौंकाते हुए कहा, "मुझे लगता है कि अगर मैं उस कैच को पकड़ने के लिए एक हजार बार और कोशिश करता, तो भी मैं उसे नहीं पकड़ पाता। मैं उनमें से हर एक कैच को छोड़ देता।" उनके इस बयान से स्पष्ट है कि उस पल मैदान पर जो हुआ, वह हेड की अपनी उम्मीदों से भी परे था।
उस फाइनल मुकाबले में रोहित शर्मा जबरदस्त लय में दिख रहे थे और केवल 31 गेंदों में 47 रन बनाकर भारतीय टीम को एक तूफानी शुरुआत दिला चुके थे। जैसे ही उन्होंने ग्लेन मैक्सवेल की गेंद पर हवा में शॉट खेला, स्टेडियम में मौजूद लाखों दर्शकों को लगा कि गेंद सुरक्षित जगह गिरेगी। लेकिन पीछे की तरफ लंबी दौड़ लगाते हुए ट्रेविस हेड ने जिस तरह हवा में गोता लगाकर कैच लपका, उसने पूरे मैच का पासा पलट दिया। इस क्षण को याद करते हुए हेड ने कहा, "मुझे सच में नहीं पता कि मैंने उसे कैसे पकड़ लिया। वह कैच अविश्वसनीय था।"
हेड ने आगे बताया कि वर्ल्ड कप फाइनल जैसे सबसे बड़े मंच पर वह पल बस उनके पक्ष में चला गया। उन्होंने दोहराया कि अगर उन्हें दोबारा वैसे ही हजार मौके दिए जाएं, तो वे दोबारा उस कैच के करीब भी नहीं पहुंच पाएंगे। ट्रेविस हेड का यह बयान यह साबित करता है कि कभी-कभी 'मिरेकल मोमेंट्स' (चमत्कारी पल) ही चैंपियन का फैसला करते हैं। जहां भारतीय टीम के लिए वह एक दुर्भाग्यपूर्ण अंत की शुरुआत थी, वहीं हेड के लिए वह एक ऐसा करिश्मा था जिसे वे खुद भी दोबारा दोहराने की गारंटी नहीं दे सकते।






