वैभव सूर्यवंशी को भावनाओं में आकर दे दिया मौका, संजू सैमसन को कर दिया बाहर; पूर्व क्रिकेटर का बयान
पूर्व क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने कहा है कि भावनात्मक रूप से वैभव सूर्यवंशी को एक चांस दिया जाना अच्छा निर्णय था, लेकिन अगर आप लॉजिक के साथ देखें तो प्लेइंग इलेवन से संजू सैमसन को क्यों बाहर कर दिया गया?

T20 World Cup 2026 के बाद भारत की टीम में कुछ बदलाव देखे गए। कप्तान सूर्यकुमार यादव को बाहर किया गया, जो विश्व कप जीतकर आए थे। उनकी जगह श्रेयस अय्यर को लाया गया और कप्तान भी बनाया गया। वैभव सूर्यवंशी की भी एंट्री टीम में हुई, जो बैकअप ओपनर के रूप में लगाए गए। यहां तक कि टी20 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू सैमसन को भी 3 मैचों के बाद प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया और भावनाओं में आकर वैभव को मौका दिया गया। हालांकि, वे तीनों मैचों में डेब्यू के बाद फेल रहे। टीम इंडिया भी लगातार हार रही है। इस पर पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने कहा है कि वैभव को मौका देना जायज था, लेकिन संजू सैमसन को क्यों बाहर किया।
जियोस्टार के एक शो पर सैमसन को लेकर पार्थिव पटेल ने कहा, “हमेशा संजू सैमसन ही क्यों बाहर रहते हैं? अगर आप पिछले 11-12 सालों में संजू सैमसन के करियर को देखें, तो एक सवाल जो हमेशा उनका पीछा करता रहा है, वह है कंसिस्टेंसी। 12 सालों में, सिर्फ़ एक IPL सीज़न ऐसा रहा है जिसमें उन्होंने 500 से ज़्यादा रन बनाए। इंटरनेशनल क्रिकेट में भी, वह या तो अच्छा खेलते हैं या बुरा और जब सिलेक्शन की बात आती है, तो वह फैक्टर हमेशा काम आता है। या तो वह खिलाड़ी जो तेजी से रन नहीं बना रहा है, उसे बाहर रखा जाता है, या वह जो इनकंसिस्टेंट रहा है। आप इमोशन और लॉजिक दोनों के आधार पर फैसले नहीं ले सकते। इसलिए इमोशनली, हां, वैभव सूर्यवंशी को मौका देना सही फ़ैसला था, लेकिन अगर आप सिर्फ लॉजिक से देखें, तो संजू सैमसन को बाहर क्यों रखा गया? इसलिए, मुझे लगता है कि यह फैसला इमोशनली लिया गया था।”
वैभव के पास खोने के लिए कुछ नहीं है- अभिषेक नायर
वहीं, वैभव के फेल होने पर अभिषेक नायर ने इसी शो में कहा कि वैभव के पास दुनिया के टॉप गेंदबाजों के खिलाफ खोने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, "आपको हमेशा लगता है कि जसप्रीत बुमराह हैं, जोफ्रा आर्चर हैं, अनुभवी बॉलर हैं, लेकिन असल में प्रेशर उन पर होता है, क्योंकि एक युवा खिलाड़ी के पास खोने के लिए कुछ नहीं होता। अगर वह बुमराह की पहली बॉल पर आउट भी हो जाए, तो कोई उस पर सवाल नहीं उठाएगा, लेकिन एक बॉलर के तौर पर, जब आपको पता हो कि कोई ऐसा खिलाड़ी है जो पहली ही बॉल पर छक्का मारने से नहीं हिचकिचाएगा, तो उस खिलाड़ी के लिए हमेशा ज्यादा डर होता है जिसके पास खोने के लिए ज्यादा होता है। बड़े नाम वाले लोग सोचते हैं, 'ओह, उसने मुझे छक्का मारा। उसका स्टॉक बढ़ेगा और मेरा गिरेगा और अगर मैं उसे आउट कर दूं, तो लोग बस कहेंगे कि वह बच्चा है।' इसीलिए एक युवा खिलाड़ी पूरी आज़ादी के साथ आता है, लेकिन वह जितना ज़्यादा खेलता है, उतना ही अपना नाम बनाता है, उम्मीदें उतनी ही ज्यादा होती जाती हैं और उस लेवल का परफॉर्मेंस बनाए रखना उतना ही मुश्किल होता जाता है।"
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Vikash Gaurविकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स
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