'द हंड्रेड' में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर ECB ने तोड़ी चुप्पी, संभावित बॉयकॉट पर क्या कहा?
इंग्लैंड ऐंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने द हंड्रेड में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के संभावित बहिष्कार को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। ऐसी अटकलें लग रही थीं कि द हंड्रेड की वे 4 फ्रेंचाइजी जिनका स्वामित्व भारतीयों के पास है, पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेने से परहेज कर सकती हैं।

इंग्लैंड ऐंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने द हंड्रेड में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के कथित संभावित बहिष्कार को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। ऐसी अटकलें लग रही थीं कि द हंड्रेड की वे 4 फ्रेंचाइजी जिनका स्वामित्व भारतीयों के पास है, पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेने से परहेज कर सकती हैं। अब ईसीबी और द हंड्रेड की 8 फ्रेंचाइजियों की तरफ से संयुक्त बयान जारी किया गया है कि द हंड्रेड में भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है और अगर इस तरह का कोई व्यवहार होता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पिछले हफ्ते बीबीसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आईपीएल टीमों के मालिकों से जुड़ीं 4 फ्रेंचाइजी मैनचेस्टर सुपर जॉइंट्स (आरपीएसजी ग्रुप), एमआई लंदन (रिलायंस), सदर्न ब्रेव (जीएमआर) और सनराइजर्स लीड्स (सन ग्रुप) द हंड्रेड की नीलामी के लिए पंजीकृत पाकिस्तानी खिलाड़ियों से परहेज कर सकती हैं।
वैसे तो 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद से विदेशी लीग में आईपीएल से जुड़ी फ्रेंचाइजियों में पाकिस्तानी क्रिकेटर बहुत ही कम दिखे हैं। हालांकि भारतीयों के द हंड्रेड की फ्रेंचाइजियों को खरीदने से पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी इस लीग में बहुत कम रुचि दिखा रहे थे। पिछले साल के टूर्नामेंट में सिर्फ 2 पाकिस्तानी खिलाड़ी दिखे थे। इतना ही नहीं, द हंड्रेड के अब तक हुए सभी 5 सीजन में कुल मिलाकर 9 पाकिस्तानी खिलड़ी ही दिखे हैं।
फ्रेंचाइजी के नए मालिक इस सीजन से कामकाज संभालेंगे।
ईसीबी और द हंड्रेड की फ्रेंचाइजियों की तरफ से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, 'द हंड्रेड को नए दर्शकों तक पहुंचने, क्रिकेट के खेल के विकास और हर कोई भले ही उसका नस्ल, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता या अन्य चीजें कुछ भी हो, उन्हें हमारे खेल से जोड़ने के लिए स्थापित किया गया था। खिलाड़ियों को राष्ट्रीयता के आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।'
बयान में आगे कहा गया है, ‘टूर्नामेंट को चलाने के लिए जिम्मेदार आयोजक के तौर पर ईसीबी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिब्ध है कि इसमें कहीं कोई भेदभाव न हो और ऐसे किसी व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के नियम मौजूद हैं।’
संयुक्त बयान में कहा गया है, 'सभी 8 टीमें प्रतिबद्ध हैं कि चयन सिर्फ क्रिकेट से जुड़े प्रदर्शन, उपलब्धता और हर टीम की जरूरत पर आधारित होगा।'
द हंड्रेड के लिए इस बार पाकिस्तान के कुल 67 खिलाड़ियों ने नीलामी के खातिर रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें 63 पुरुष और 4 महिला खिलाड़ी हैं। टी20 विश्व कप के लिए पाकिस्तान की पूरी स्क्वाड ने द हंड्रेड के लिए रजिस्ट्रेशन करा रखा है।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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