दलीप ट्रॉफी जीतने का क्रेडिट ईशान किशन ने किसे दिया? फाइनल के बाद खुद बताया
ईशान किशन की कप्तानी वाली टीम दलीप ट्रॉफी 2026 का खिताब जीतने में सफल हो गई है। हालांकि, फाइनल मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी के आधार पर उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। उन्होंने जीत का क्रेडिट किसे दिया है?

ईशान किशन ने कप्तान के तौर पर ईस्ट जोन को दलीप ट्रॉफी 2026 का खिताब दिलाया है। तिलक वर्मा की कप्तानी वाली साउथ जोन टीम के खिलाफ ईस्ट जोन ने कमाल का प्रदर्शन किया। हालांकि, मैच को नतीजा तो ड्रॉ के रूप में रहा, लेकिन पहली पारी में 700 से ज्यादा रन बनाकर और साउथ जोन को 350 से कम रनों पर रोकने के साथ ही यह तय हो गया था कि उनकी टीम खिताब की दावेदार बन चुकी है। बाद में दूसरी पारी में भी 350 से ज्यादा रन ईस्ट जोन ने बनाए और तिलक वर्मा की टीम को काफी तंग किया। बाद में मैच ड्रॉ हुआ और खिताब जीने पर ईशान किशन ने कहा कि उन्होंने यह खिताब एक ग्रुप के तौर पर जीता है।
विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कहा, "हमने यह टाइटल एक ग्रुप के तौर पर जीता है। मुझे लगता है कि हर कोई एक-दूसरे का ख्याल रख रहा था, जो मेरे लिए सबसे जरूरी बात थी। मुझे लगता है कि मैं एक अच्छा लीडर रहा हूं (एक शरारती मुस्कान देता है), लेकिन हां, मुझे लगता है कि सफर यहीं खत्म नहीं होता। आपको सभी डिपार्टमेंट में बेहतर होते रहना होगा। चाहे आप फील्डिंग साइड में हों। हमेशा कुछ गलतियां होती रहती हैं। इसलिए हमें बस इसे ठीक करने और दिन-ब-दिन बेहतर होने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यह ज्यादातर ब्रेक के बाद ज्यादा शांत रहने (वह समय जब उसे इंडियन टीम के लिए नहीं चुना गया था), गेम में ज्यादा डूबे रहने, यह जानने के बारे में था कि क्या जरूरी है, आप गेम के प्रति कितने अवेयर हैं और आप सिचुएशन को कैसे पढ़ रहे हैं।"
टीम को लेकर कप्तान ईशान ने कहा, "आपको एक-दूसरे का ख्याल रखने की जरूरत होती है, हर बॉल में मदद करने की कोशिश करें, ताकि, वे उस जोन में न जाएं जहां मैं था। इसलिए मैं बस सबकी मदद करने की कोशिश कर रहा था और यह मेरे लिए भी एक अच्छा बदलाव रहा है। मैं ज्यादा शांत हो गया हूं, हालात को लेकर ज़्यादा अवेयर हूं और मुझमें खेलने की ज्यादा भूख है। आप अपनी टीम के लिए परफॉर्म करना चाहते हैं। आपको अपनी टीम को जिताना होता है और यही कुछ ऐसा है जिसने मुझमें बदलाव किया है। सौ परसेंट, यह (खुद के चीकी आदमी होने पर) तब तक रहेगा जब तक मैं नब्बे साल का नहीं हो जाता।"



