ऐसा रहा तो फिर रविंद्र जडेजा से डिग जाएगा कप्तान का भरोसा, DRS में मामला है 'निल बटे सन्नाटा'
ऐसा चलता रहा तो फिर रविंद्र जडेजा से कप्तान का भरोसा डिस जाएगा, क्योंकि DRS में मामला उनका 'निल बटे सन्नाटा' नजर आ रहा है। पिछले 22 डीआरएस कॉल को देखें तो एक बार भी अंपायर का फैसला नहीं पलटा है।

रविंद्र जडेजा ने मंगलवार 25 अगस्त को श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन 20 ओवर गेंदबाजी की। एक विकेट निकाला और कसी हुई गेंदबाजी करके दूसरे छोर से भी साथी गेंदबाजों का काम आसान किया। हालांकि, एक समस्या उनके साथ है, जो अब से नहीं, बल्कि पिछले काफी समय से है। समस्या ऐसी है कि कप्तान का भरोसा भी उनसे डिग सकता है और आगे से कप्तान शायद उनके कहने पर एक फैसला नहीं लेगा। यह फैसला है डीआरएस यानी डिसिजन रिव्यू सिस्टम का, क्योंकि रविंद्र जडेजा इस मामले में निल बटे सन्नाटा यानी बुरी तरह फेल हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि जडेजा अब पिछले कई टेस्ट मैचों में अपनी बॉलिंग पर लगातार 22 रिव्यू ले चुके हैं, लेकिन एक भी फैसला फील्ड अंपायर का बदला नहीं जा सका है। ताजा मामला रिव्यू से जुड़ा इंडिया वर्सेस श्रीलंका दूसरे टेस्ट से है, जिसमें श्रीलंका की पहली पारी के दौरान केशरा नुवांता के खिलाफ रविंद्र जडेजा ने lbw की जोरदार अपील की। मैदानी अंपायर ने बल्लेबाज को आउट नहीं दिया तो जडेजा और विकेटकीपर ने कप्तान शुभमन गिल को डीआरएस के लिए मनाया।
थर्ड अंपायर ने नहीं बदला एक भी फैसला
इसके बाद थर्ड अंपायर ने रीप्ले देखा तो जल्दी ही पता चला कि गेंद पैड से टकराने से पहले बल्ले के भीतर हिस्से को लगकर गई थी। ऐसे में मैदानी अंपायर का नॉट आउट का फैसला बरकरार रहा। उधर, भारत ने भी रिव्यू खो दिया। जडेजा जितने एक्यूरेट अपनी गेंदबाजी में हैं, शायद उतने सटीक अब डीआरएस में पिछले कई साल से नहीं रहे। हालांकि, उन्हें एक विकेट जरूर मिला, लेकिन हैरानी की बात ये है कि उनके पिछले 22 रिव्यू में से एक भी रिव्यू थर्ड अंपायर ने नहीं पलटा है।
ऐसा भी नहीं है कि रविंद्र जडेजा एक बार भी पिछले 22 बॉलिंग रिव्यू में सफल नहीं हुए। चार बार वे सफल रहे हैं, लेकिन उन चारों बार अंपायर ने आउट नहीं दिया था और फैसला अंपायर्स कॉल की वजह से नॉटआउट ही रहा था। DRS नियमों में साफ है कि अगर अंपायर्स कॉल है तो फिर मैदानी अंपायर को जो फैसला है, वही अंतिम फैसला है, उसे थर्ड अंपायर नहीं बदल सकता। वहीं, बाकी के 18 रिव्यू पूरी तरह नाकाम रहे और भारत ने उन रिव्यू को खो भी दिया। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि पिछले 3 साल से चल रहा है। जुलाई 2023 में उनका आखिरी सफल डीआरएस कॉल था, जो वेस्टइंडीज के खिलाफ केमार रोच के सामने डोमिनिका टेस्ट में आया था।
फिर भी विकेट निकाल रहे हैं जडेजा
रोहित शर्मा तो उन पर सवाल भी उठा चुके हैं और कई बार कह चुके हैं कि उसे तो हर बार लगता है कि बल्लेबाज आउट है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि भले ही डीआरएस के फैसले रविंद्र जडेजा के पक्ष में नहीं गए, लेकिन उन्होंने गेंदबाजी में फिर भी कमाल किया है और अलग-अलग परिस्थितियों में टीम इंडिया के लिए टेस्ट क्रिकेट में विकेट चटकाए हैं।



