संजू सैमसन को जीवनदान, अक्षर-दुबे का कैच, बुमराह का 18वां ओवर...सेमीफाइनल के 5 टर्निंग पॉइंट
गुरुवार को भारत और इंग्लैंड के बीच हुए टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में कुछ क्षण ऐसे थे जिन्हें निर्णायक कहा जा सकता है। ये वो क्षण थे जिन्होंने रोमांच से भरे मैच के नतीजे में अहम भूमिका निभाई। चाहे संजू सैमसन को 15 के निजी स्कोर पर जीवनदान मिलना हो या बुमराह का 18वां ओवर…ये टर्निंग पॉइंट्स साबित हुए।

टी20 वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में गुरुवार को भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड को रोमांचक मुकाबले में 7 रन से शिकस्त दे दी। अब 8 मार्च को फाइनल में भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से होगा जिसने पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को एकतरफा हराया था। इससे पहले टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में जब-जब भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल हुआ है तब उस मैच को जीतने वाली टीम ने खिताब भी जीती है। भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को इस संयोग के बरकरार रहने की उम्मीद है। गुरुवार को भारत और इंग्लैंड के बीच हुए सेमीफाइनल में कुछ क्षण ऐसे थे जिन्हें निर्णायक कहा जा सकता है। आइए ऐसे ही 5 टर्निंग पॉइंट्स पर नजर डालें।
- संजू सैमसन को जीवनदान
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। दूसरे ओवर की आखिरी गेंद पर ओपनर अभिषेक शर्मा को विल जैक्स ने सिर्फ 9 रन के निजी स्कोर पर चलता कर दिया। उसके अगले ही ओवर में संजू सैमसन को जीवनदान मिला। जोफ्रा आर्चर के ओवर की पहली गेंद पर सैमसन ने चौका जड़ा। अगली गेंद पर संजू ने फिर बाउंड्री लगानी चाही लेकिन गेंद सीधे इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक की तरफ चली गई। गेंद सीधे इंग्लैंड के कप्तान के हाथ में आई थी लेकिन वह आसान सा कैच लपक नहीं पाए। उस समय सैमसन 15 रन के निजी स्कोर पर थे। वह जीवनदान इंग्लैंड को काफी महंगा पड़ा। संजू सैमसन ने सिर्फ 42 गेंदों में 89 रनों की निर्णायक पारी खेलकर भारत के विशाल स्कोर की नींव रखी।
2. अक्षर पटेल-दुबे की युगलबंदी वाला कैच
भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 253 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड जब लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो उस पर इतने बड़े स्कोर का बिल्कुल भी दबाव नहीं दिखा। फिल सॉल्ट और हैरी ब्रूक के सस्ते में निपटने के बाद भी 22 वर्ष के युवा जैबक बेथल ने अकेले मोर्चा संभाल लिया था। ये युवा बल्लेबाज इंग्लैंड की पारी को भारतीय पारी के समानांतर ही बढ़ा रहा था। इंग्लैंड हर खत्म होते ओवर के साथ उसी स्कोर के आस-पास रह रहा था, जो भारत ने अपनी पारी के दौरान बनाए थे।
लेकिन भारत की शानदार फील्डिंग ने बड़ा अंतर पैदा किया। अक्षर पटेल ने पीछे दौड़ते हुए हैरी ब्रूक का शानदार कैच पकड़ा। वही ब्रूक जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सुपर 8 में 51 गेंदों में नाबाद 100 रन की कप्तानी पारी खेलकर इंग्लैंड को सेमीफाइनल में पहुंचाया था। इससे पहले अक्षर ने फिल सॉल्ट का भी आसान सा कैच लपका था।
पटेल का सबसे जबरदस्त कैच तो वो रहा जो ऑफिशियली उनके नाम पर नहीं, बल्कि शिवम दुबे के नाम पर दर्ज है। जब जैकब बेथल और विल जैक्स की जोड़ी खतरनाक हो चुकी थी, तब पांचवें विकेट के लिए 83 रन की उस साझेदारी को अक्षर पटेल की जबरदस्त फील्डिंग ने ही तोड़ी। अर्शदीप सिंह की गेंद पर जैक्स ने हवाई फायर किया और तकरीबन छक्का मार ही दिया था। लेकिन अक्षर पटेल ने लंबी दौड़ लगाकर एकदम बाउंड्री लाइन के पास कैच लपक लिया। वह इतनी तेजी से दौड़े थे कि बाउंड्री लाइन से पहले उनका रुक पाना नामुमकिन था। पटेल ने जबरदस्त सूझ-बूझ का परिचय देते हुए बिना कोई क्षण गंवाए बाउंड्री लाइन क्रॉस करने से पहले ही गेंद को पास में दौड़कर आ रहे शिवम दुबे को पास कर दिया। दुबे ने कैच पकड़ लिया और विल जैक्स की 35 रन की पारी का अंत हो गया।
3. जसप्रीत बुमराह का 18वां ओवर
जसप्रीत बुमराह यूं ही सुपर स्टार और बड़े मैच विनर नहीं कहलाते हैं। यूं ही भारत का हर कप्तान गेंदबाजी के अहम मौकों पर बुमराह की तरफ नहीं जाता है। वह अहम मौकों पर अपनी गेंदबाजी से मैच का पासा पलट देते हैं। इंग्लैंड की पारी के दौरान उनका 18वां ओवर ऐसा ही रहा। उन्होंने उस ओवर में कोई विकेट तो नहीं लिया लेकिन मैच पर भारत का शिकंजा कस दिया।
आखिरी 3 ओवर में इंग्लैंड को जीत के लिए 45 रनों की जरूरत थी और खूंखार अंदाज में खेल रहे जैकब बेथेल तब 94 रन और सैम करन 14 रन पर नाबाद थे। तब जसप्रीत बुमराह ने भारत की तरफ से 18वां और अपने कोटे का आखिरी ओवर फेंका। उस एक ओवर ने अचानक मैच का रुख भारत की तरफ पलट दिया। जब बेथेल सिर्फ चौकों-छक्कों में डील कर रहे थे उस वक्त बुमराह ने उस ओवर में एक भी बाउंड्री नहीं दी। उन्होंने सिर्फ 6 रन दिया। पहली गेंद डॉट रही। दूसरी पर सिंगल। तीसरी पर भी सिंगल। चौथी पर दो रन और फिर पांचवीं और छठी गेंद पर 1-1 रन। बुमराह के इस ओवर के बाद इंग्लैंड दबाव में आ गया।
4. हार्दिक पांड्या का 19वां ओवर
जसप्रीत बुमराह के जबरदस्त 18वें ओवर के बाद इंग्लैंड को जीत के लिए आखिरी 12 गेंदों में 39 रन चाहिए थे। तब कप्तान सूर्यकुमार यादव ने हार्दिक पांड्या को गेंद थमाई। पहली ही गेंद पर बेथल ने छक्का जड़ दिया। दूसरी गेंद लो फुल टॉस रही और बेथल ने दौड़कर सिंगल पूरा किया। तीसरी गेंद पर हार्दिक पांड्या ने जबरदस्त वापसी करते हुए सैम करन को ब्राउंड्री लाइन के पास तिलक वर्मा के हाथों आउट कराकर भारत को बड़ी सफलता दिलाई। चौथी गेंद पर ओवर्टन ने सिंगल लिया। अब पांचवीं गेंद पर बेथल फिर स्ट्राइक पर थे लेकिन पांड्या ने उन्हें बाउंड्री नहीं जड़ने दी। पांचवीं और छठी गेंद पर पांड्या ने सिर्फ सिंगल दिए। इस तरह उन्होंने ओवर में सिर्फ 9 रन दिए और 1 बहुमूल्य विकेट भी चटकाया। अब इंग्लैंड को जीत के लिए आखिरी ओवर में 30 रनों की जरूरत थी।
5. शिवम दुबे से आखिरी ओवर कराने का जुआ
अब कप्तान सूर्यकुमार यादव के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आखिरी ओवर किससे फेंकवाई जाए। अक्षर पटेल 2 ओवर फेंक चुके थे और अब तक जिन गेंदबाजों को भारत ने मैच में आजमाया था, वह इकलौते ऐसे गेंदबाज थे जिनका कोटा पूरा नहीं हुआ था। वह खुद को गेंदबाजी के लिए तैयार भी कर रहे थे लेकिन कप्तान सूर्या ने शिवम दुबे को गेंद थमाकर एक बड़ा जुआ खेला। जुआ इसलिए कि दुबे ने उससे पहले तक मैच में एक भी गेंद नहीं फेंकी थी। दुबे की पहली गेंद पर ही बेथल दो रन दौड़ने के चक्कर में रन आउट हो गए। उसके बाद अगली गेंद पर आर्चर ने सिंगल लिया। अब इंग्लैंड को जीत के लिए 4 गेंदों में 28 रन चाहिए थे। तीसरी गेंद में ओवर्टन ने सिर्फ सिंगल लिया। अब भारत की जीत सिर्फ औपचारिकता थी। आखिरी तीन गेंदों में इंग्लैंड को 27 रन चाहिए थे। इसका मतलब था कि अगर नो बॉल या वाइड पर वाइड नहीं फेंकी गई तो भारत मैच जीत जाएगा। आखिरी तीनों गेंदों पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने छक्के लगाए। इस दौरान दुबे ने एक वाइड भी फेंका। उन्होंने अपने ओवर में 22 रन लुटाए लेकिन आखिरकार भारत 7 विकेट से जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
और पढ़ें


