युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए अनिल कुंबले, जहीर खान और हरभजन सिंह की शरण में BCCI
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूर्व भारतीय दिग्गज अनिल कुंबले, जहीर खान और हरभजन सिंह से बेंगलुरु स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (सीओई) में विशेष शिविरों में अपनी सेवाएं देने के लिए संपर्क किया है। बोर्ड की योजना इन दिग्गजों की सेवा लेकर युवा प्रतिभाओं को निखारना है।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूर्व भारतीय दिग्गज जहीर खान और हरभजन सिंह से बेंगलुरु स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (सीओई) में विशेष शिविरों में अपनी सेवाएं देने के लिए संपर्क किया है।
बीसीसीआई ने इन शिविरों के कुछ खिलाड़ियों की सूची तैयार की है। इस सूची में ऐसे खिलाड़ी शामिल किए गए हैं जो भविष्य में भारत की तरफ से खेल सकते हैं। इन खिलाड़ियों में आयु वर्ग और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के अलावा भारत ए और भारत की सीनियर टीम की तरफ से कुछ मैच खेलने वाले खिलाड़ी शामिल हैं।
बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जहीर खान युवा तेज गेंदबाजों के साथ पांच दिवसीय शिविर के लिए पहले ही बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। ये युवा गेंदबाज सीनियर टीम में जगह बनाने के करीब हैं या उसके लिए कुछ मैच खेल चुके हैं। पता चला है कि सीओई के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी को तैयार करने में मदद करने के लिए अपने पूर्व साथियों से चार से पांच दिन के विशेष शिविरों के लिए संपर्क किया था।
इस घटनाक्रम से अवगत बीसीसीआई के एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘लक्ष्मण ने विशेष शिविरों के लिए जहीर, हरभजन और अनिल कुंबले से संपर्क किया है। हरभजन ऑफ स्पिनरों के लिए चार या पांच दिवसीय शिविर के लिए अपना कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं। वह उन उभरते हुए खिलाड़ियों की मदद करने के लिए उत्सुक हैं जिन्होंने आयु वर्ग और भारत ए स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।’
उन्होंने कहा, ‘यह एक स्वागत योग्य पहल है जहां भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके खिलाड़ी अगली पीढ़ी के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।’
माना जा रहा है कि टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज अनिल कुंबले से कलाई के स्पिनरों के लिए एक शिविर आयोजित करने का अनुरोध किया गया है।
ऐसा माना जा रहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने से पहले विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे क्योंकि इनमें से कई खिलाड़ियों को अपनी-अपनी आईपीएल टीमों से जुड़ना होगा।
इस बीच भारत के पूर्व तेज गेंदबाज वीआरवी सिंह और श्रीनाथ अरविंद उन प्रमुख नामों में शामिल हैं जिन्होंने 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' में तेज गेंदबाजी कोच के स्थायी पद के लिए आवेदन किया है।
वीआरवी और अरविंद दोनों ने सीओई में विभिन्न आयु वर्ग के शिविरों में काम किया है। बीसीसीआई इंग्लैंड के ट्रॉय कूली की जगह पर तेज गेंदबाजी विभाग के प्रमुख की तलाश में है। स्पिन गेंदबाजी विभाग की कमान फिलहाल पूर्व भारतीय गेंदबाज सुनील जोशी के हाथ में है।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय, असिस्टेंट एडिटर
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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