टी20 वर्ल्ड कप खेलना चाहते थे बांग्लादेशी खिलाड़ी, कप्तान लिटन दास ने बताई 'डर्टी पॉलिटिक्स' की इनसाइड स्टोरी
बांग्लादेश के टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेने के करीब 4 महीने बाद अब वहां के कप्तान लिटन दास ने बॉयकॉट वाली डर्टी पॉलिटिक्स की इनसाइड स्टोरी बताई है। 'प्रथम आलो' से बातचीत में दास ने खुलासा किया कि खिलाड़ियों पर फैसला थोपा गया। वे तो फैसला लेने की प्रक्रिया में कहीं शामिल ही नहीं थे।

इस साल भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में हुए पुरुषों के टी20 विश्व कप में बांग्लादेश ने हिस्सा नहीं लिया था। वहां का बोर्ड मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली कट्टरपंथियों की कठपुतली अंतरिम सरकार के इशारे पर नखरे दिखाए थे। आईसीसी से अपने विश्व कप मैचों को 'सुरक्षा कारणों' से भारत से बाहर कराए जाने की मांग की। जिद पर अड़े रहे। आईसीसी ने मांग ठुकरा दी और बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को विश्व कप खेलने का मौका मिल गया। अब 4 महीने बाद बांग्लादेश के कप्तान लिटन दास ने खुलासा किया है कि खिलाड़ी तो भारत में विश्व कप खेलना चाहते थे लेकिन उन पर 'दबाव' डाला गया। उन्होंने ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ की पूरी इनसाइड स्टोरी ही बता दी। दास का बयान तत्कालीन मोहम्मद यूनुस सरकार के स्पोर्ट्स अडवाइजर रहे आसिफ नजरूल के उस दावे के उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि खिलाड़ियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने संयुक्त रूप से फैसला लिया था कि भारत में विश्व कप नहीं खेलेंगे।
मुस्तफिजुर रहमान के KKR से विदाई पर शुरू हुआ था विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को अपने स्क्वाड से बाहर कर दिया। केकेआर ने दिसंबर 2025 में हुई आईपीएल नीलामी में रहमान को खरीदा था। तब सोशल मीडिया पर केकेआर की काफी लानत-मलानत हुई थी। बांग्लादेश में उन दिनों अल्पसंख्यकों और खासकर हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें चर्चा में रहती थीं। कट्टरपंथियों की भीड़ कभी किसी के घर को आग के हवाले कर दिया करती थी तो कभी रेप और मर्डर जैसे अपराध किए जाते थे। उसे लेकर भारत में काफी आक्रोश था। तमाम सोशल मीडिया यूजर्स और हिंदुवादी संगठनों ने बांग्लादेशी क्रिकेटर को खरीदने के लिए केकेआर, आईपीएल और बीसीसीआई के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। आखिरकार बीसीसीआई के निर्देश के बाद केकेआर ने मुस्तफिजुर रहमान को अपने स्क्वाड से रिलीज कर दिया। इसी से चिढ़े बांग्लादेश ने अपने खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, पत्रकारों और खेलप्रेमियों के लिए भारत में कथित सुरक्षा खतरे का बहाना बनाकर अपने विश्व कप के मैच बाहर शिफ्ट कराने की मांग पर अड़ गया था।
'खिलाड़ी तो फैसला लेने की प्रक्रिया में कहीं थे ही नहीं'
बांग्लादेश के तत्कालीन खेल सलाहकार आसिफ नजरूल ने तब दावा किया था कि खिलाड़ी भी भारत में विश्व कप नहीं खेलना चाहते थे। 4 महीने बाद उनके इस झूठ की कलई अब बांग्लादेश के कप्तान लिटन दास ने खोली है। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट ‘प्रथम आलो’ के साथ बातचीत में लिटन ने खुलासा किया कि खिलाड़ी तो फैसला लेने की प्रक्रिया में कहीं शामिल ही नहीं थे।
लिटन दास ने अब बताया है कि दिखाया ये गया कि खिलाड़ियों से भी उनकी राय ली गई है लेकिन असल में ऐसा नहीं था। सब कुछ मीडिया स्टंट था। सरकारी अफसरों से खिलाड़ियों की मीटिंग तो महज एक खानापूर्ति थी।
'खिलाड़ियों से राय लेने का दिखावा किया गया, मीडिया स्टंट था वो'
जनवरी में सरकारी अफसरों के साथ मीटिंग का जिक्र करते हुए लिटन ने कहा, ‘वहां तो कोई सवाल ही नहीं था। हम तो सिर्फ उसमें शामिल होने और चाय पीने के लिए गए थे। वो सिर्फ एक मीडिया स्टंट था।’
लिटन दास के मुताबिक खिलाड़ी तो विश्व कप में खेलना चाहते थे। उनसे उनकी भी ली गई लेकिन भारत में सुरक्षा चिंताओं के मसले को उठाते हुए बाकियों द्वारा पहले ही लिए जा चुके फैसले का बचाव किया गया।
भारत में 'सुरक्षा को खतरे' वाले बहाने की उड़ाई धज्जी
भारत में 'सुरक्षा को खतरे' जैसी बहानेबाजी को तो आईसीसी ने भी सिरे से खारिज कर दिया था। ये बहाना बांग्लादेशी क्रिकेटरों के भी गले नहीं उतरा था। लिटन दास ने बताया कि जब वे पिछली बार पाकिस्तान दौरे पर गए थे तब उनके कमरों के बाहर हथियारबंद लोग खड़े रहते थे। उससे ज्यादा खतरनाक क्या क्या होगा।
लिटन ने कहा, 'उन्होंने हमसे पूछा कि हम क्या चाहते हैं। अब एक खिलाड़ी के तौर पर आप क्या चाहते हैं? हम लड़ना तो नहीं ही चाहते थे, हम क्रिकेट खेलना चाहते थे। लेकिन उन्होंने भारत में सुरक्षा पर सवाल उठाया। मैंने कहा कि हम तो पाकिस्तान में क्रिकेट खेले जहां वे कमरों के बाहर बंदूक लेकर खड़े होते थे। उससे ज्यादा खतरनाक क्या हो सकता है? लेकिन ये उनका फैसला था, उसमें खिलाड़ियों की कोई भूमिका नहीं थी।'
जब लिटन दास को आसिफ नजरूल के उस बयान की याद दिलाई गई जिसमें उन्होंने बॉयकॉट के लिए खिलाड़ियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया था, तब वह तंज कसने से नहीं चूके। लिटन ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘क्या अब वह किसी पोस्ट पर हैं? इसीलिए उन्होंने वो सारी बातें कही थी।’
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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