संजू और बुमराह नहीं, बल्कि ये खिलाड़ी था प्लेयर ऑफ द मैच का असली हकदार, अश्विन ने किसे बताया जीत का हीरो?

Mar 06, 2026 02:45 pm ISTVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए सेमीफाइनल में रोमांचक जीत के बाद पूर्व भारतीय स्पिनर आर. अश्विन ने एक बड़ा बयान दिया है। अपने यूट्यूब चैनल पर चर्चा के दौरान अश्विन ने कहा कि आधिकारिक तौर पर संजू सैमसन को 'प्लेयर ऑफ द मैच' मिला, लेकिन उनके लिए अक्षर पटेल का योगदान सबसे अहम था।

संजू और बुमराह नहीं, बल्कि ये खिलाड़ी था प्लेयर ऑफ द मैच का असली हकदार, अश्विन ने किसे बताया जीत का हीरो?

भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए सेमीफाइनल में रोमांचक जीत के बाद पूर्व भारतीय स्पिनर आर. अश्विन ने एक बड़ा बयान दिया है। अपने यूट्यूब चैनल पर चर्चा के दौरान अश्विन ने कहा कि आधिकारिक तौर पर संजू सैमसन को 'प्लेयर ऑफ द मैच' मिला, लेकिन उनके लिए अक्षर पटेल का योगदान सबसे अहम था। अश्विन ने साफ तौर पर कहा, "अगर मैं गौतम (गंभीर) या सूर्या (सूर्यकुमार यादव) होता, तो मैं मैन ऑफ द मैच जिससे भी मिला है, उससे लेकर अक्षर पटेल को दे देता।" अश्विन का मानना है कि टी20 क्रिकेट में फील्डिंग का महत्व अक्सर बल्लेबाजी और गेंदबाजी की चमक में दब जाता है, लेकिन इस मैच में अक्षर के कैचों ने ही भारत की जीत पक्की की।

अश्विन विशेष रूप से अक्षर पटेल द्वारा पकड़े गए विल जैक्स के कैच से बेहद प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा, "मैं विल जैक्स के उस कैच के लिए अक्षर पटेल को एमओएम (मैन ऑफ द मैच) देने के लिए इतना ज्यादा टेंपटेड (ललचाया हुआ) था।" अश्विन के अनुसार, विल जैक्स उस समय जिस फॉर्म में थे और जिस तरह से बड़े शॉट लगा रहे थे, अगर वह कैच नहीं पकड़ा जाता तो मैच का नतीजा कुछ भी हो सकता था। अश्विन ने तर्क दिया कि, "आज संजू सैमसन की उस पारी को असली फायदा अक्षर पटेल के कैचों की वजह से मिला।" उनके मुताबिक, अगर अक्षर वे विकेट नहीं दिलाते, तो इंग्लैंड मैच को भारत की पकड़ से दूर ले जा सकता था।

इस प्रदर्शन के ऐतिहासिक महत्व को बताते हुए अश्विन ने इसकी तुलना क्रिकेट इतिहास के महानतम पलों से की। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 1975 के वर्ल्ड कप फाइनल में विवियन रिचर्ड्स को उनकी शानदार फील्डिंग (तीन रन-आउट) के लिए मैन ऑफ द मैच दिया गया था। चर्चा के दौरान अक्षर द्वारा लिए गए विल जैक्स के कैच की तुलना अश्विन ने 1983 के फाइनल में कपिल देव द्वारा लिए गए उस ऐतिहासिक कैच से की, जिसने वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच का पासा पलट दिया था। अश्विन ने जोर देकर कहा कि अक्षर पटेल की फील्डिंग ने आज वही मैजिकल इफेक्ट पैदा किया और भारतीय टीम को हार के खतरे से बाहर निकाला।

अश्विन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय टीम ने इस मैच में बहुत कुछ सही किया, लेकिन वे अक्षर के प्रति विशेष रूप से आभारी हैं। दिलचस्प बात यह है कि स्वयं संजू सैमसन ने भी प्रेजेंटेशन के दौरान माना कि जसप्रीत बुमराह का स्पेल मैच में निर्णायक था, लेकिन अश्विन का मानना है कि फील्डिंग की उस चपलता के बिना बुमराह की गेंदबाजी भी शायद कम पड़ जाती। अश्विन ने आत्मविश्वास के साथ भविष्यवाणी की है कि भारत अपना तीसरा टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीतने की ओर अग्रसर है।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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