क्यों शतक से भी बड़ी थी संजू सैमसन की 97 रनों की पारी? समझिए पूरा गणित
संजू सैमसन की 97 रनों की पारी को शतक का दर्जा जा रहा है, क्योंकि ये बात सच है। कभी-कभार जो काम शतक से नहीं होता, वह 97 रनों की पारी से हो जाता है। हार के शतक को लोग भूल जाते हैं, लेकिन जीत के 97 रनों को याद रखते हैं।

वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर 8 के आखिरी मैच में संजू सैमसन ने 97 रनों की नाबाद पारी खेली और टीम इंडिया को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। एक तरह से ये वर्चुअल क्वार्टर फाइनल मुकाबला था, जिसमें अगर वेस्टइंडीज को जीत मिलती तो वेस्टइंडीज की टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर जाती, लेकिन जीत आई भारतीय टीम के खाते में और भारत छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंच गया। भारत ने 196 रनों का टारगेट चेज किया, जो टी20 वर्ल्ड कप में भारत की ओर से सबसे बड़ा टारगेट चेज था। इस मैच में सैमसन के बल्ले से 97 रनों की पारी आई। क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में संजू सैमसन की 97 रनों की पारी को एक अर्धशतक के रूप में काउंट किया जाएगा, लेकिन ये पारी शतक से भी बड़ी थी। इसके पीछे की वजह एक नहीं, बल्कि कई हैं।
संजू सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डेंस में 50 गेंदों में 12 चौके और 4 छक्कों की मदद से 97 रन बनाकर मैच फिनिशर करके लौटे। भले ही यह शतक नहीं कहा जाएगा, लेकिन किसी भी क्रिकेट फैन से पूछ लो, किसी भी क्रिकेट एक्सपर्ट से पूछ लो, कप्तान से पूछ लो कोच से पूछ लो, सैमसन से पूछ लो और पूरे भारत से पूछ लो इसे शतक से बड़ा ही बताया जाएगा। हार में आए शतक को भी हम भूल जाते हैं, लेकिन जीत में आए 97 रनों को सिर आंखों पर बिठाकर रखते हैं। वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में गौतम गंभीर भी 97 रनों की पारी खेल चुके हैं, जो सभी को याद है।
शतक से भी बढ़कर क्यों हैं 97 रन? इसका पहला कारण तो ये है कि भारत को 196 रनों का टारगेट चेज करना था। भारत ने टी20 विश्व कप में एक बार भी 180 से ज्यादा रन चेज करके मैच नहीं जीता था। ऐसे में टॉप ऑर्डर के बल्ले से इसी तरह की पारी की दरकार थी। दूसरा कारण इसका ये था कि 196 रनों की चेज में भी भारत के लिए अकेले 97 रन संजू सैमसन के थे, जबकि दूसरा सबसे बड़ा निजी स्कोर भारत के लिए इस पारी में 27 था, जो कि तिलक वर्मा ने बनाया था।
जब आप 200 रनों के आसपास का पीछा कर रहे हों तो आपको रन रेट पर भी ध्यान रखना होता है। दूसरे छोर से जब सैमसन को ज्यादा नहीं मिल रहा था तो तब भी वे स्कोरबोर्ड को एक छोर से चलाए हुए थे। 12 चौके और 4 छक्के इसका उदाहरण हैं। तीसरा कारण ये था कि संजू सैमसन को आप लगातार हिटिंग करते हुए देखते आए हैं, लेकिन इस पारी की खासियत ये थी कि संजू ने हर चौके और छक्के के बाद सिंगल और डबल लेना जरूरी समझा था। एक बार भी स्कोरबोर्ड या रन रेट का प्रेशर उन्होंने अपने और टीम के ऊपर हावी नहीं होने दिया। यही वजह थी कि भारत को जीत मिली।
संजू सैमसन खुद भी अपने आप से ऐसी पारी के लिए अंदर ही अंदर लड़ रहे होंगे, क्योंकि जब टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम चुनी गई थी तो वे मैन विकेटकीपर और ओपनर थे, लेकिन टूर्नामेंट शुरू हुआ तो उनको प्लेइंग इलेवन से ही बाहर बैठना पड़ा, क्योंकि न्यूजीलैंड के खिलाफ उनकी सीरीज खराब रही थी। बीच में एक मौका मिला था, जिसमें 8 गेंदों में 22 रन बनाए थे। जिम्बाब्वे के खिलाफ भी वे बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन अहम मैच में एक बड़ी पारी उन्होंने खेली और टीम को जीत दिलाई।
सैमसन के लिए चुनौती ये भी थी कि वे कभी भी आईपीएल और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सफल रन चेज में अर्धशतक तक नहीं जड़ पाए थे, लेकिन इस बार उन्होंने वो सारे पाप धुल दिए। एक ऐसा मैच भारत को जिताया है, जिसे वो क्या हर एक फैन याद रखने वाला है।
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Vikash Gaurविकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स
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