21 वर्षीय बल्लेबाज ने वैभव सूर्यवंशी से छीनी लाइमलाइट, दलीप ट्रॉफी के फाइनल में चमके

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दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी की जगह एक 21 वर्षीय झारखंड के रिजर्व ओपनर ने लाइमलाइट लूट ली है। उन्होंने दमदार प्रदर्शन करते हुए 85 रनों की पारी खेली है और ईस्ट जोन को अच्छी स्थिति में पहुंचा दिया है।

Shikhar Mohan
दलीप ट्रॉफी फाइनल मुकाबले में बल्लेबाजी करते हुए शिखर मोहन

चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में दलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला खेला जा रहा है। जब से दलीप ट्रॉफी की शुरुआत हुई है एक ही खिलाड़ी चर्चा के केंद्र में है, जिसका नाम वैभव सूर्यवंशी है। हालांकि, फाइनल में उनकी लाइमलाइट एक 21 वर्षीय झारखंड के सलामी बल्लेबाज ने छीन ली है।

वैभव सूर्यवंशी ने अब तक दलीप ट्रॉफी 2026 के अपने सभी मुकाबले खेले, इसके उलट जिस खिलाड़ी ने फाइनल में वैभव से लाइमलाइट छीनी उसने फाइनल से पहले एक भी मैच नहीं खेला था। जब टीम की घोषणा हुई थी, तब झारखंड के 21 वर्षीय शिखर मोहन को रिजर्व ओपनर बताया गया था। उन्हें किसी भी मैच में मौका नहीं मिला, लेकिन जब फाइनल में उन्हें अवसर दिया गया तो उन्होंने इसको पूरी तरह भुनाया और ऐसा प्रदर्शन किया कि 15 वर्षीय वंडर बॉय को भी साइडलाइन कर दिया। टूर्नामेंट के सबसे बड़े मैच में मिले पहले मौके पर ही शिखर मोहन ने 85 रनों की पारी खेलकर ईस्ट जोन को पहले दिन अच्छी स्थिति में पहुंचाया। शिखर मोहन ने वैभव सूर्यवंशी के नेचर के एकदम उलट अपनी पारी को संयमित अंदाज में खेलना शुरू किया और 120 गेंदों का सामना करते हुए 85 रन बनाए। उनके पास शतक लगाने का मौका था लेकिन वे चूक गए। मोहन ने अपनी पारी में कुल 9 चौके और 3 छक्के लगाए। उन्होंने 70.83 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की।

इससे पहले सलामी बल्लेबाजी करने आए वैभव सूर्यवंशी ने सुबह के समय धुआंधार बल्लेबाजी की। भारतीय टीम से सीधा दलीप ट्रॉफी का फाइनल खेलने आए मोहम्मद सिराज की मानों मैदान पर कोई इज्जत ही ना हो, 15 वर्षीय खिलाड़ी ने इस तरीके से बल्ले से प्रहार किया। फाइनल मुकाबले में सुबह के समय साउथ जोन के खिलाफ सलामी बल्लेबाजी करते हुए सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन ने महज 88 गेंदों में 100 रन की शुरुआती साझेदारी कर ली, जिसके बाद चामा मिलिंद ने उन्हें आउट किया। कुछ देर के लिए ऐसा लगा कि ईश्वरन पारी को अपने हाथ में ले लेंगे। लेकिन आखिरकार दोपहर का खेल उस खिलाड़ी के नाम रहा जो अपना पहला दलीप ट्रॉफी मैच खेल रहा था।

शिखर मोहन का फाइनल में प्रदर्शन इत्तेफाक नहीं

फाइनल मुकाबले में शिखर मोहन की एंट्री तब हुई जब कप्तान ईशान किशन और कोच ने मिडिल ऑर्डर में बदलाव किए। हालांकि, उनका चयन महज इत्तेफाक नहीं हुआ था। रांची में जन्मे इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने अंडर-23 स्तर पर दो शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर क्रिकेट में अपनी जगह पक्की कर ली थी। उन्होंने 2023-24 सीके नायडू ट्रॉफी में नौ पारियों में 77.88 के औसत से 623 रन बनाए। अगले सीजन में 13 पारियों में 73.92 के औसत से 887 रन बनाए। उनके इन प्रदर्शनों के चलते मार्च 2025 में सीके नायडू ट्रॉफी के चैंपियन पंजाब के खिलाफ रेस्ट ऑफ इंडिया टीम में उनका चयन हुआ। रणजी ट्रॉफी क्रिकेट में उनका प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली रहा। झारखंड के लिए अपने पहले ही सीज़न (2025-26) में मोहन ने 12 पारियों में 55.73 की औसत से 613 रन बनाए। इसमें दो शतक, तीन अर्धशतक और 207 का उच्चतम स्कोर शामिल था। इसके बाद उन्होंने यह साबित कर दिया कि उनकी बल्लेबाजी सिर्फ रणजी तक ही सीमित नहीं है। विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने पारियों में 55.86 की औसत से 391 रन बनाए।

शानदार करियर की एक झलक चेपॉक में दिखी

चेपॉक में ये आंकड़े खुद को दोहराते हुए दिखे। मोहन ने शुरुआत में ईश्वरन का साथ दिया और दूसरे विकेट के लिए 33 रन जोड़े। इसके बाद साउथ जोन ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली जब त्रिपुरना विजय ने सुदीप घरामी को आउट कर दिया। ईस्ट जोन का स्कोर 133/1 से 147/3 हो गया। यहीं से मोहन के खेलने का अंदाज बदल गया। सूर्यवंशी और ईश्वरन के कारण खोई हुई लय को वापस पाने की कोशिश करने के बजाय, उन्होंने दबाव को सहा। कई बार साउथ के गेंदबाजों ने उन्हें कंट्रोल किया। विजय और श्रेयस गोपाल ने एक साथ गेंदबाजी की तब वे काफी दबाव में दिखे। उन्होंने डिफेंसिव अप्रोच अपनाई। उनकी पारी की दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने 120 का सामना किया जिनमें से 81 गेंदें डॉट खेलीं। फिर भी उन्होंने 70 से अधिक के स्ट्राइक रेट के साथ अपनी पारी समाप्त की। उनके 85 रनों में से 54 रन चौकों से आए। उन्होंने नौ चौके और तीन छक्के लगाए। उनमें वह प्रतिभा दिखी कि जरूरत पड़ने पर संयमित भी खेल सकते हैं और समय आने पर बड़े शॉट्स लगाकर गियर भी चेंज कर सकते हैं। घरामी के आउट होने के बाद 147/3 के स्कोर पर कप्तान ईशान किशन बल्लेबाजी करने आए। मोहन और ईशान ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 94 रन जोड़े। इन 94 रनों में मोहन के 61 रन थे। उनके पास शतक बनाने का मौका था। दोपहर के सबसे कठिन दौर से निकलने के बाद मोहन 80 के स्कोर तक पहुंच गए। लग रहा था कि शतक बना लेंगे लेकिन अंत में ऐसा नहीं हो सका। मिलिंद ने वैभव सूर्यवंशी की तरह शिखर मोहन को भी अपना शिकार बनाया। मोहन ने शॉर्ट लेंथ की गेंद को पुल करने की कोशिश की, लेकिन गेंद पिच पर थोड़ी रुकी रही। उन्होंने बल्ले का मुंह जल्दी बंद कर लिया, बल्ले का निचला किनारा लगा और गेंद स्टंप्स पर जा गिरी। हालांकि, शिखर मोहन के लिए उनकी पहली दलीप ट्रॉफी की पारी यादगार बन गई।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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