14 साल पहले इंदौर में वीरेंद्र सहवाग ने लगाया था दोहरा शतक; इतने चौके-छक्के जड़ रचा था इतिहास
8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए चौथे वनडे मैच में वीरेंद्र सहवाग ने बल्लेबाजी का ऐसा तूफान लाया था जिसने क्रिकेट जगत को हिला कर रख दिया था। आज जब भारत और न्यूजीलैंड की टीमें इसी मैदान पर आमने-सामने हैं, तो सहवाग की वह ऐतिहासिक पारी फिर से चर्चा का विषय बन गई है।

इंदौर का होलकर स्टेडियम भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पलों में से एक का गवाह रहा है। 8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए चौथे वनडे मैच में वीरेंद्र सहवाग ने बल्लेबाजी का ऐसा तूफान लाया था जिसने क्रिकेट जगत को हिला कर रख दिया था। आज जब भारत और न्यूजीलैंड की टीमें इसी मैदान पर आमने-सामने हैं, तो सहवाग की वह ऐतिहासिक पारी फिर से चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि यह मैदान हमेशा से रनों की बारिश के लिए जाना जाता रहा है।
8 दिसंबर 2011 को खेले गए उस ऐतिहासिक मैच में वीरेंद्र सहवाग भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने उस मुकाबले में मात्र 149 गेंदों में 219 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली थी। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने मैदान के हर कोने में बाउंड्री की बौछार कर दी थी। सहवाग ने कुल 25 चौके और 7 छक्के जड़े थे, जिसका अर्थ है कि उन्होंने अपनी पारी के 142 रन केवल चौकों-छक्कों की मदद से बनाए थे। उनका स्ट्राइक रेट 146.97 का रहा, जिसने वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था।
सहवाग की इस पारी की रफ्तार का अंदाजा उनके माइलस्टोन्स से लगाया जा सकता है। उन्होंने अपना अर्धशतक 41 गेंदों में और शतक मात्र 69 गेंदों में पूरा किया था। इसके बाद उन्होंने और आक्रामक रुख अपनाया और 112 गेंदों में 150 रन पूरे करने के बाद, केवल 140 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा कर इतिहास रच दिया था। वह उस समय वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बने थे और उनकी यह पारी लंबे समय तक वनडे का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रही।
सहवाग के इस महा-शतक की बदौलत भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 418/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इस पारी में गौतम गंभीर (67) और सुरेश रैना (55) ने भी महत्वपूर्ण अर्धशतक जमाए थे। लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज की टीम 49.2 ओवरों में 265 रनों पर सिमट गई और भारत ने यह मैच 153 रनों के विशाल अंतर से जीत लिया। भारत की ओर से रवींद्र जडेजा और अपना डेब्यू मैच खेल रहे राहुल शर्मा ने 3-3 विकेट लिए थे। सहवाग की वह पारी आज भी इंदौर के मैदान की पहचान बनी हुई है।




