लड़के शादी करते ही क्यों हैं अगर…; दहेज हत्या पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब यह संदेश जाना चाहिए कि दुल्हन और उसके परिवार का ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल कोर्ट छत्तीसगढ़ के एक मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें महिला ने शादी के तीन साल बाद ही अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

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ट्विशा शर्मा, दीपिका नागर, निकिता भाटी...किसी की जान फांसी लगाने से की गई तो किसी ने छत से कूदकर छलांग लगा दी। किसी को जिंदा जला दिया गया। मौत के तरीके अलग-अलग थे लेकिन वजह या आरोप एक- दहेज। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी दहेज प्रताड़ना को लेकर बहुत बड़ी बात कह दी है। कोर्ट ने कहा, लड़के लड़कियों से शादी ही क्यों करते हैं, अगर उन्हें बाद में दुल्हन और उसके परिवार का अपमान करना होता है? उन्होंने साफ कहा कि अब यह संदेश जाना चाहिए कि दुल्हन और उसके परिवार का ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल कोर्ट छत्तीसगढ़ के एक मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें महिला ने शादी के तीन साल बाद ही अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने ससुराल वालों के व्यवहार की कड़ी आलोचना करते हुए मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया। मामला साल 2010 का है जहां महिला ने शादी के 3 साल के भीतकर ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला के परिवारवालों का आरोप था कि उसका पति और ससुराल वाले लगातार पैसे और कार की मांग कर रहे थे और उसे प्रताड़ित कर रहे थे।

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले पर पहले फैसला सुनाते हुए इसे दहेज हत्या माना था। कोर्ट ने कहा था कि महिला के परिवार की ओर से पेश किए गए सबूतों से पता चलता है कि मौत से कुछ समय पहले बार-बार पैसों की मांग और क्रूरता की जा रही थी। भले ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी के चलते दम घुटना बताया गया हो लेकिन कोर्ट ने माना कि आसपास की स्थिति जैसे दहेज की मांग, घटना से कुछ समय पहले हुआ भुगतान, उत्पीड़न और क्रूरता मौत से सीधे तौर पर जुड़ते नजर आ रहे हैं। पति के परिवार के कई सदस्यों को धारा 304बी (दहेज हत्या), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498ए (क्रूरता और उत्पीड़न) सहित कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। अब महिला के पति के छोटे साले ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें दोषसिद्धि से राहत की माग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा, आपको खुश होना चाहिए कि यह केवल धारा 498ए के तहत तीन साल की सजा है। उन्होंने दहेज उत्पीड़न के पैटर्न को लेकर कहा कि दुल्हन और उसके परिवार को निचोड़ने की कोशिश की जा रही है। रिकॉर्ड में दर्ज आरोपों का हवाला देते हुए जज ने आगे कहा, लड़के के परिवार ने क्या कहा? आप लोग भिखारी हैं,पैसे नहीं कर सकते। लड़की का परिवार अपनी बेटी को बचाने की गुहार लगा रहा था और उन्हें भिखारी कहा जा रहा था। दुल्हन के पिता ने कहा कि वे 60,000 रुपये दे सकते हैं और आप उन्हें भिखारी कह रहे हैं?

याचिकाकर्ता के वकील ने एफआईआर दर्ज करने में देरी का भी मुद्दा उठाया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क में कोई दम नहीं पाया। कोर्ट ने कहा, संदेश जाने दीजिए। दुल्हनों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है।

Aditi Sharma

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अदिति शर्मा

अदिति शर्मा डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें लाइव हिंदुस्तान, TV9 भारतवर्ष और न्यूज नेशन जैसे संस्थानों में 9 वर्षों का अनुभव है। BCA और MMC की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ, वे तकनीक और पत्रकारिता के मूल्यों का सटीक संतुलन बनाती हैं। उनकी विशेषज्ञता राजनीति, अपराध और शोध-आधारित लेखन में है, जहां वे सकारात्मक प्रभाव डालने वाली विश्वसनीय पत्रकारिता को प्राथमिकता देती हैं।


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डिजिटल मीडिया के इस दौर में, अदिति शर्मा पिछले 9 सालों से सूचनाओं को खबरों में और खबरों को अटूट विश्वसनीयता में बदलने का काम कर रही हैं। वर्तमान में 'लाइव हिंदुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत रहते हुए, उनकी पत्रकारिता का मुख्य आधार रफ्तार के साथ गहरी सटीकता बनाए रखना रहा है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी और मीडिया शिक्षा का एक संतुलित मेल है। उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से BCA किया है। इसके बाद उन्होंने इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट (ITMI) से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की, जिसने उनके पत्रकारिता कौशल को निखारा।


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