वेदांता पावर प्लांट में ब्लास्ट; 'बॉयलर' आखिर क्या है, जो 'भाप बम' बनकर निगल लेता है कई जानें

Ratan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, सक्ती
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वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट में अब तक 12 मजदूरों की मौत की खबर आ चुकी है। इस भयानक हादसे में 22 अन्य लोग घायल बताए गए हैं। फिलहाल हादसे की जांच जारी है, लेकिन इससे पहले आप समझिए आखिर बॉयलर होता क्या है? आखिर कैसे प्लांट की एक मशीन भाप बम बनकर चंद सेकेंडों में कई जाने ले लेती है।

वेदांता पावर प्लांट में ब्लास्ट; 'बॉयलर' आखिर क्या है, जो 'भाप बम' बनकर निगल लेता है कई जानें

Vedanta power plant boiler blast: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट में अब तक 12 मजदूरों की मौत की खबर आ चुकी है। इस भयानक हादसे में 22 अन्य लोग घायल बताए गए हैं। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के मुताबिक, वेदांता कंपनी के पावर प्लांट में बॉयलर की ट्यूब में विस्फोट होने से ये हादसा हुआ है। फिलहाल हादसे की जांच जारी है, लेकिन इससे पहले आप समझिए आखिर बॉयलर होता क्या है? आखिर कैसे प्लांट की एक मशीन भाप बम बनकर चंद सेकेंडों में कई जाने ले लेती है।

आखिर बॉयलर होता क्या है

सबसे पहले बात बॉयलर की। बॉयलर दरअसल एक ऐसी मशीन होती है, जिसमें पानी को गर्म करके भाप बनाई जाती है। यही भाप टरबाइन को घुमाती है और बिजली पैदा होती है। आसान शब्दों में कहें, तो बॉयलर बिजली उत्पादन की रीढ़ है। लेकिन, जब यही सिस्टम गड़बड़ा जाता है, तो यही बॉयलर “भाप का बम” बन जाता है।

बॉयलर "भाप का बम" कैसे बन जाता है

अब समझिए आखिर बॉयलर के अंदर का सिस्टम कैसे गड़बड़ा जाता है और ये देखते ही देखते चंद लम्हों में "भाप बम" में तब्दील हो जाता है। दरअसल बॉयलर के अंदर लगातार पानी गर्म होकर भाप में बदलता है। जैसे-जैसे भाप बनती है, दबाव बढ़ता जाता है। सामान्य स्थिति में सेफ्टी सिस्टम इस प्रेशर को कंट्रोल करते हैं।

लेकिन अगर किसी वजह से यह दबाव बाहर नहीं निकल पाता, तो अंदर का प्रेशर इतना बढ़ जाता है कि लोहे का मजबूत ढांचा भी उसे झेल नहीं पाता और फिर होता है जोरदार विस्फोट हो जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर वो कौन सी वजहें होती हैं, जिसके चलते बॉयलर या फिर उसकी नली में धमाका हो जाता है। इसके पीछे कुछ ये कारण हो सकते हैं।

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इन वजहों से हो सकता है बॉयलर में धमाका

वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे की जांच जारी है। लेकिन, जानकारों की मानें तो एक बॉयलर में होने वाले धमाकों के पीछे ये वजहें हो सकती हैं।

  • बॉयलर के अंदर जरूरत से ज्यादा दबाव (ओवरप्रेशर) बन जाना।
  • सेफ्टी वाल्व का फेल हो जाना, जिससे भाप बाहर न निकल पाए।
  • पानी की कमी के कारण ओवरहीटिंग होना।
  • मशीन की खराब मेंटेनेंस या पुरानी इक्विपमेंट के कारण।
  • ऑपरेशन के दौरान मानवीय गलती या अलार्म को नजरअंदाज करना।

इतना खतरनाक क्यों होता है बॉयलर ब्लास्ट?

जैसा कि अब तक आप समझ चुके होंगे कि बॉयलर के अंदर का तापमान और दबाव बहुत ज्यादा होता है। जब यह फटता है, तो न केवल जोरदार धमाका होता है, बल्कि जलती हुई भाप और आग चारों तरफ फैलती है। इस कारण वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं, जिन्हें बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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लेखक के बारे में

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रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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