नक्सलवाद से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ का सुकमा, 16 लाख की इनामी 2 महिला नक्सलियों का सरेंडर
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले को नक्सलवाद से मुक्त घोषित कर दिया गया है। सुकमा के एसपी ने बताया कि दो महिला नक्सलियों के सरेंडर के बाद सुकमा जिले को नक्सली प्रभाव से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है। दोनों महिलाएं नक्सली संगठन की 'कंपनी नंबर 8' की सदस्य थीं। दोनों पर 16 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले को नक्सलवाद से मुक्त घोषित कर दिया गया है। सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण जी चव्हाण ने मंगलवार को बताया कि दो महिला नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद सुकमा जिले को नक्सली प्रभाव से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है। एसपी चव्हाण ने बताया कि ये दोनों महिलाएं नक्सली संगठन की 'कंपनी नंबर 8' की सदस्य थीं और इन पर कुल मिलाकर 16 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
हथियार और नकदी बरामद
एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 को सुकमा जिले में दो महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और उनका पुनर्वास किया गया है। वे नक्सली संगठन की 'कंपनी नंबर 8' की सदस्य थीं। उनके सिर पर 16 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान हथियार और नकदी बरामद की गई।
उनके पास से 6 ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए गए, जिनमें एक इंसास मशीनगन, दो एके-47 और तीन अन्य हथियार शामिल हैं। साथ ही लगभग 10 लाख रुपए की नकदी भी मिली है। उन्होंने बताया कि इस आत्मसमर्पण के बाद सुकमा जिले को माओवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है।
लगातार प्रयासों का नतीजा
इस घटना के बारे में बताते हुए एसपी ने कहा कि पिछले दो सालों से सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए गए अभियानों और अंदरूनी इलाकों में कैंप स्थापित किए जाने की वजह से यह नतीजा सामने आया है। कहा कि यह उपलब्धि पिछले दो वर्षों के लगातार प्रयासों का नतीजा है। इस दौरान सुरक्षा बलों ने अंदरूनी इलाकों में कैंप स्थापित किए और लगातार ऑपरेशन चलाए। इसके परिणामस्वरूप 90 से ज्यादा नक्सलियों की मौत हुई।
एसपी ने आगे कहा कि 600 से ज्यादा नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और लगभग 800 अन्य ने आत्मसमर्पण कर दिया है। एसपी ने इस क्षेत्र में सुरक्षा और विकास में हुए सुधारों पर भी प्रकाश डाला। कहा कि अंदरूनी इलाके अब ज्यादा सुलभ हैं और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती
उन्होंने बताया कि सुकमा के अंदरूनी इलाकों में अब सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है। कई अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच खोल दी गई है। लगभग 60 सड़कों पर विकास कार्य अभी चल रहा है। कई अन्य विकास परियोजनाएं भी लागू की जा रही हैं। विशेष रूप से खेलों के माध्यम से युवा मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में, पुलिस और सुरक्षा बल लोगों के विकास के लिए सहयोग जारी रखेंगे।
बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है और यह क्षेत्र अब प्रगति के पथ पर अग्रसर है। लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों पर हुई बहस का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है।
बस्तर के हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए एक अभियान चलाया गया। इस क्षेत्र के हर गांव में राशन की दुकान खोलने के लिए भी एक मुहिम शुरू की गई। हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। अब उन्हें पांच किलो अनाज मिल रहा है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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