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मतगणना से पहले ही कांग्रेस-बीजेपी ने दिए बड़े संकेत, विधायक बनते ही दिल्ली और कर्नाटक शिफ्ट करने की तैयरी

सत्ता की कुर्सी का खेल जब शुरू होता है तो वह कयासों पर नहीं बल्कि परिणाम पर निर्भर करता है। नेता कब सत्ता के मोह के लालच में सत्ताधारी दलों से जा मिले इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। यही वजह है कि छत्

मतगणना से पहले ही कांग्रेस-बीजेपी ने दिए बड़े संकेत, विधायक बनते ही दिल्ली और कर्नाटक शिफ्ट करने की तैयरी
Rohit Burmanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरThu, 30 Nov 2023 12:02 PM
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EVM में कैद छत्तीसगढ़ के विधायकों की किस्मत का फैसला अब महज कुछ ही दिनों में हो जाएगा। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी या फिर भाजपा की यह तय हो जाएगा। लेकिन इस बीच कांग्रेस और भाजपा द्वारा राज्य मे सरकार बनाने के दावे अभी भी सत्ता में लगातार बरकरार हैं। सरकार बनने के दावों के साथ ही दोनों ही दलों को डर भी सताने लगा है। सूत्रों की माने तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही अपने प्रत्याशियों को यह संकेत दे दिए हैं कि जीतिए और प्रमाण पत्र लेते ही सीधा रायपुर पहुंचिए। चुनावी शोरगुल के बीच चर्चाएं यह भी हो रही हैं कि दोनों ही दल अपने जीतने वाले विधायकों को राज्य के बाहर लेकर जाने वाली है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को कर्नाटक के बेंगलुरु लेकर जा सकती है तो भारतीय जनता पार्टी अपने विधायकों को दिल्ली। खबर तो यह भी मिल रही है कि 3 दिसंबर के लिए पहले से ही स्पेशल प्लेन की बुकिंग भी की जा चुकी है। 


तोड-जोड और हॉर्स ट्रेडिंग सता रहा डर

प्रदेश में सरकार बनने को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में राजनीति के जानकारों का यह मानना है कि यहां पर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला होगा। अन्य दलों के प्रत्याशियों को लेकर यह माना जा रहा है कि कुछ छोटे दल के प्रत्याशी जीत सकते हैं लेकिन भाजपा या फिर कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत रहेगा। यानी कि छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा है और जिस दल के पास 46 सीट होगी वह सरकार बना लेगा। लेकिन इतने नजदीक पहुंचने के बाद भी दोनों ही राजनीतिक दलों को तोड-जोड और हॉर्स ट्रेडिंग का डर सताने लगा है। दोनों ही दल छत्तीसगढ़ की सत्ता की कुर्सी में बैठने के लिए साम,दाम,दंड और भेद सब लगाने में लगे हुए हैं।


कांग्रेस विधायकों को कर्नाटक तो भाजपा दिल्ली लेकर जाने की तैयारी में


छत्तीसगढ़ में सत्ता में बैठी कांग्रेस पार्टी एक तरफ स्पष्ट बहुमत होने का दावा कर रही है। लेकिन जीत के आंकड़ों के जितना नजदीक जाते जाएंगे उतना ही उन्हें भाजपा के ऑपरेशन कमल का भी सामना करने की चिंता सताने लगेगी। क्योंकि कांग्रेस पूर्व में कुछ राज्यों में हुए चुनाव में इस तरह की स्थिति को पहले भी देख चुकी है। मध्य प्रदेश की बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर वापस सत्ता पर बैठ गई थी। छत्तीसगढ़ में भी कुछ इसी तरह की चर्चाएं खूब चल रही थी लेकिन यहां पर कांग्रेस बहुमत के काफी ऊपर थी। साल 2023 के चुनाव में भी माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस पार्टी बहुमत के 10 से 15 सीट ऊपर रहती है तो जोड़-तोड़ की राजनीति छत्तीसगढ़ में चलना कठिन हो जाएगी। लेकिन अगर यह आंकड़ा बहुमत के पास जाकर रुक गया तो कांग्रेस को सत्ता जाने का डर जरूर सताएगा। इसीलिए विधायकों को टूटने से बचने के लिए कांग्रेस पहले ही खुले निर्देश जारी कर चुकी है कि जीतते ही विधायकों को प्रमाण पत्र लेकर सीधे रायपुर आना है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी भी कुछ इसी तरह की तैयारी में जुटी हुई है। कहीं ऐसा न हो कि उनके विधायक कूद कर दूसरे पाले में ना चले जाएं।

 

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