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जमीन में दबाया‌ जाएगा विद्यासागर जी का अस्ति कलश, बनेगी समाधि

17 फरवरी के करीब 2 बजकर 35 मिनट पर आचार्य विद्या सागर जी महाराज ने समाधि में लीन हो गए । जैन धर्म के रीती रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कराया गया है। उनकी अस्थि संचय के लिए आज लोग दूर-दूर....

जमीन में दबाया‌ जाएगा विद्यासागर जी का अस्ति कलश, बनेगी समाधि
Rohit Burmanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरTue, 20 Feb 2024 03:28 PM
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छत्तीसगढ़ के ढ़ोगरगढ़ में आचार्य विद्या सागर जी महाराज ने महासमाधि में लीन हो गए थे। जिसके बाद रविवार को 18 फरवरी के दिन उनके पार्थिव शरीर का विधिविधान से अंतिम संस्कार कराया गया था। जैन धर्म में अंतिम संस्कार के जो नियम है उसके अनुसार 20 फरवरी यानी आज उनका अस्थि संचय किया गाएगा। अस्थि संचल के लिए देश के अगल-अलग राज्यों से उनके अनुयायी पहुंच रहे हैं। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात सहित कई राज्यों से लोग चिता की राख लेने पहुंच रहे हैं। जिसके बाद जैन धर्म के नियम के अनुसार अस्थियों को जल में विसर्जित नहीं किया जाता है। नियम के अनुसार आचार्य विद्या सागर जी की अस्थियों को कलश में रखकर उसे जमीन में दबा दिया जाएगा। जहां आचार्य विद्या सागर जी के अस्थि कलश को दबाया जाएगा वहां उनकी समाधि बनेगी। 

देश भर से पहुंच रहे अनुयायी

आचार्य विद्या सागर जी के अंतिम संस्कार के बाद अब उनके अनुयायी देश भर से पहुंच रहे हैं। जिस स्थान पर उन्हें अग्नि दी गई है वहां पहुंचकर सभी उनकी राख को को घर लेकर जा रहे हैं। इसके साथ ही सभी यहां पर नारियल चढ़ा रहे हैं। वहीं जैन धर्म के संत दूर-दूर से पद यात्रा करके यहां पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीते सोमवार को  विनयांजलि सभा में हस्तिनापुर के मठाधीश दिगंबर समाज के कीर्ति रविंद्र जैन ढ़ोगरगढ़ पहुंचे हैं। साथ ही बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित कई जगहो से भी लोग पहुंच रहे हैं। 

जैन धर्म के लोगों की आंखे हुई नम

छत्तीसगढ़ में सभी राज्य के संत अब एक-एक कर पहुंचने लगे हैं। जो भी उनके अनुयायी है वह उनकी अस्थि दर्शन कर रहे हैं, उनकी आखें नम है। उनके एक अनुयायी ने बताया कि वह हमेशा यहां उनके दर्शन के लिए आया करते थे, आज वह उनके जाने से दुखी है, उन्होने कहा कि ऐसा लग रहा है कि मानों कोई परिवार का सदस्य छोड़कर चला गया हो। साथ ही कहा कि वह सभी संप्रदाय को मानने वालों में से थे। 

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