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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार पर आपसी वार, दिल्ली में मंथन हुआ तो छत्तीसगढ़ में नेताओं ने उगला जहर

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के बाद अब नताओं का आपसी गुस्सा देखने को मिला है। जहां एक तरफ दिल्ली में कांग्रेस पार्टी हार पर समीक्षा कर रही है,यहां कांग्रेसी एक दूसरे के सर दोष गढ़‌ रहे।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार पर आपसी वार, दिल्ली में मंथन हुआ तो छत्तीसगढ़ में नेताओं ने उगला जहर
Rohit Burmanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरSat, 09 Dec 2023 11:18 AM
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छत्तीसगढ़ में 5 साल सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी को साल 2023 के विधानसभा के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के साथ ही अब कांग्रेस में आपसी तनातनी जैसी स्थिति बनने लगी है। दिल्ली में बैठकर जहां एक तरफ कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी छत्तीसगढ़ की प्रभारी कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टीएस समेत कई बड़े नेता प्रदेश में हार पर मंथन और चिंतन कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी आपस में एक दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे जयसिंह अग्रवाल और बृहस्पति सिंह ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है। वहीं से पहले पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बयान कांग्रेस की आपसी गुटबाजी की तरफ इशारा कर रहे थे। तो वहीं दूसरी तरफ पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भूपेश बघेल पर हार का ठीकरा फोड़ा है, तो वहीं टिकट न मिलने से नाराज रहे बृहस्पति सिंह ने टीएस सिंहदेव को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार का जिम्मा लेने की बात कह दी है।

प्रभारी शैलजा और सिंहदेव लें हार की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ में रामानुजगंज से विधायक रहे बृहस्पत सिंह जिनका विधानसभा के चुनाव में टिकट काट दिया गया था। बृहस्पत सिंह ने कांग्रेस की हार के बाद अब मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार के लिए प्रभारी शैलजा और सिंहदेव को जिम्मेदार बताया है। हालांकि यह बात किसी से छुपी नहीं है कि कांग्रेस की राजनीति में बृहस्पत सिंह टीएस के खास विरोधी माने जाते हैं लेकिन शैलजा के खिलाफ दिए गए बयान के बाद अब कांग्रेस में नया माहौल बन गया है। 

मुख्यमंत्री पर हार का‌ सीधा आरोप

वहीं दूसरी तरफ पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने कांग्रेस की हर पर सीधा भूपेश बघेल पर निशाना साधा है। जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि साल 2018 में सब की मेहनत से जनादेश मिला था लेकिन सरकार चलाने का जो तरीका था वह एक स्थान पर केंद्रित हो गया था।‌ मंत्रियों को जो अधिकार मिलने चाहिए थे वह नहीं मिल पाए। सिर्फ एक स्थान से सेंट्रलाइज होकर कुछ चुनिंदा लोगों के साथ 5 वर्षों तक काम किया गया। इन सभी बातों का नुकसान समय-समय पर कांग्रेस पार्टी हुआ है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी को इतना बड़ा जनादेश मिला है। 

हार के बाद भी संगठन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं

वही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की हार को लेकर प्रदेश के नेताओं के साथ कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चिंतन और मनन किया है। जिसमें बड़ी संख्या में विधायक और हार के कारणों की वजह पर चर्चा की गई है। इसके साथ ही सिंहदेव की हार पर भी चर्चा हुई है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा इस पर भी चर्चा की गई है हालांकि इस चर्चा में अंतिम सहमति नेता प्रतिपक्ष को लेकर नहीं बन पाई है। इसके साथ ही संगठन में बदलाव होंगे या नहीं यह भी साफ हो गया है ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के पहले संगठन में बदलाव नहीं किए जाएंगे। 

हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है कि कांग्रेस पार्टी में इस तरह की आपसी तनातनी देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ में साल 2018 में सत्ता में आई कांग्रेस उन दिनों भी मुख्यमंत्री को लेकर एक दूसरे के समर्थन में दिल्ली जाते दिखाई दे रहे थे। इतना ही नहीं इस पूरे मामले में जमकर हंगामा भी हुआ था लेकिन जैसे-तैसे भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। वहीं दूसरी तरफ साल 2023 के चुनाव के परिणाम भी सामने नहीं आए थे लेकिन एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी की रेस सबसे पहले कांग्रेस पार्टी में शुरू हो गई थी। लेकिन नतीजे कांग्रेस के पक्ष में बिल्कुल नहीं आए और प्रदेश में कांग्रेस अब विपक्ष में जाकर बैठ गई है। 

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