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Hindi News छत्तीसगढ़सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी से हो रही नवजात शिशुओं की मौत, हाईकोर्ट ने कहा...

सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी से हो रही नवजात शिशुओं की मौत, हाईकोर्ट ने कहा...

छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी से नवजात शिशुओं की मौत के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देशित किया है।

सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी से हो रही नवजात शिशुओं की मौत, हाईकोर्ट ने कहा...
bilaspur high court
Rohit Burmanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरThu, 13 Jun 2024 04:34 PM
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छत्तीसगढ़ में नवजात बच्चों के मामले में हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका पर सुनवाई हुई है। सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी से नवजात शिशुओं की मौत को लेकर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देशित किया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि सभी अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए, जिससे कि इस तरह की घटनाएं न हों। इसके साथ ही इस सुनवाई के बाद इस जनहित की याचिका को निराकृत भी कर दिया गया है। 

सरकारी अस्पतालों में संसाधन ना होने से बच्चों की मौत के प्रकरण में जस्टिस रमेश सिन्हा की डीबी में सुनवाई हुई है। जहां समाचार पत्र में इनक्यूबेटर में एक साथ पांच बच्चों को रखे जाने की फोटो आने पर कोर्ट ने सरकार को यह बताने के लिए कहा है कि यह तस्वीर आखिरकार कहां से ली गई है। मामले में दुर्ग कलेक्टर की ओर से जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी कि संबंधित फोटो जो मीडिया में आई है वह सरकारी अस्पताल की नहीं है। इसके साथ ही जिस निजी अस्पताल की यह फोटो है उसकी पूरी जानकारी ली जा रही है। बतादें कि पिछली बार कोर्ट ने दुर्ग जिला कलेक्टर को इस पूरे मामले में जांच करने के साथ-साथ शपथ पत्र प्रस्तुत करने को निर्देशित भी किया गया था। इस पूरे मामले के बाद माननीय हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए अस्पतालों में जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है। 

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर के सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन व वेंटीलेटर के अभाव में 5 साल के भीतर 40 हजार बच्चों की मौत की खबर पर संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। हाईकोर्ट की डीबी में सुनवाई के दौरान यह कहा गया था कि शासन की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि सरकारी अस्पताल में बेड और वेंटीलेटर की कमी है। जिस पर बुधवार को सुनवाई में शासन की ओर से महाधिवक्ता ने यह बताया कि अस्पताल में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की पहल शुरू हो गई है। इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देशित करते हुए कहा गया है कि प्रदेश के जितने भी शासकीय अस्पताल हैं, वहां समय पर आवश्यक सुविधाओं और संसाधन को मुहैया कराया जाए। इसके बाद हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है।