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हिंदी न्यूज़ छत्तीसगढ़झीरम घाटी कांड की 9वीं बरसी, बस्तर में शहीद मेमोरियल जनता को समर्पित, बड़ा सवाल शहीद परिवारों को कब मिलेगा इंसाफ!

झीरम घाटी कांड की 9वीं बरसी, बस्तर में शहीद मेमोरियल जनता को समर्पित, बड़ा सवाल शहीद परिवारों को कब मिलेगा इंसाफ!

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में झीरम हिंसा की 9वीं बरसी पर झीरम घाटी शहीद मेमोरियल का लोकार्पण किया। सीएम ने झीरम घाटी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

झीरम घाटी कांड की 9वीं बरसी, बस्तर में शहीद मेमोरियल जनता को समर्पित, बड़ा सवाल शहीद परिवारों को कब मिलेगा इंसाफ!
Sandeep Diwanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरWed, 25 May 2022 01:35 PM

छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बुधवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में झीरम हिंसा की 9वीं बरसी पर शहीद मेमोरियल का लोकार्पण किया और झीरम घाटी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। शहीदों की याद में 100 फीट ऊंचा तिरंगा फहराया गया। सीएम भूपेश ने कहा कि झीरम घाटी हृदयविदारक घटना थी। हमने अपनी पहली पंक्ति के नेताओं को खोया है। मैं शहीदों को नमन करता हूं। हमारे नेता परिवर्तन यात्रा पर निकले थे। प्रदेश के किसानों, युवाओं, बच्चों और महिलाओं के जीवन में परिवर्तन लाना उनका लक्ष्य था। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका मार्गदर्शन सदैव बना हुआ है। 

सीएम भूपेश ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में हर किसी के साथ न्याय हो रहा है। आज हमारे नेता होते तो बहुत खुश होते। वो जहां भी होंगे आज हम सभी को आशीष दे रहे होंगे। शहीद परिवारों के सुख-दुख में सरकार उनके साथ हैं। हम सभी शहीदों के परिवारों के साथ परिवार की तरह जुड़े हैं। सीएम बघेल सुबह चित्रकोट से हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे जगदलपुर के लालबाग मैदान पहुंचे और झीरम घाटी शहीद मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जगदलपुर के लालबाग मैदान में झीरम घाटी में 32 शहीदों की याद में मेमोरियल बनाया गया है, जिसे आम जनता को समर्पित किया गया। आज झीरम कांड की 9वीं बरसी है। इस कार्यक्रम के बाद 9 साल पहले हुए हिंसा की यादें फिर ताजा हो गईं। वहीं सबसे बड़ा सवाल कि शहीदों के परिवारों को कब इंसाफ मिलेगा।

परिवर्तन यात्रा में मारे गए थे 32 लोग 
बता दें कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बस्तर के दरभा स्थित झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस नक्सल हिंसा में पीसीसी चीफ नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा, उदय मुदलियार, योगेन्द्र शर्मा सहित 32 लोग शहीद हुए थे। इनमें बहुत से कांग्रेस के कार्यकर्ता, आम लोग और पुलिस के जवान शहीद हुए थे। राज्य में शहीदों के बलिदान की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने 25 मई को झीरम घाटी श्रद्धांजलि दिवस मनाया जा रहा है। झीरम घाटी की घटना को देश में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पार्टी पर हमला माना जाता है।

आज तक उजागर नहीं हो पाया झीरम का सच 
बस्तर में इस माओवादी हिंसा के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने एनआईए जांच के निर्देश दिए थे। 5 जून 2013 को एनआईए की टीम बस्तर पहुंची थी और जांच शुरू हुई थी। एनआईए ने 23 सितंबर 2014 को पहला और 16 सितंबर 2015 को अंतिम जांच रिपोर्ट बिलासपुर हाईकोर्ट में पेश की थी। इस मामले पर रिटायर्ड जज प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का भी गठन किया गया। अभी एक और जांच आयोग का गठन किया गया है, जिसे भाजपा नेता धरमलाल कौशिक ने कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद फरवरी 2020 में कांग्रेस ने इस मामले पर एसआईटी का गठन किया था। साथ ही एनआईए से दस्तावेज भी मांगे, लेकिन दस्तावेज नहीं मिलने के कारण जांच शुरू नहीं हो पाई है। कुल मिलाकर यह पूरा मामला राजनीति का शिकार हो गया। झीरम घाटी का सच आज तक उजागर नहीं हो पाया है।

नवंबर-2021 को नए आयोग का हुआ गठन  
भाजपा की डॉ. रमन सिंह सरकार ने 28 मई 2013 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में झीरम घाटी हत्याकांड पर जांच आयोग का गठन किया था। 30 सितंबर 2021 को आयोग का कार्यकाल खत्म होने के बाद 11 नवंबर 2021 को आयोग के सचिव एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) संतोष कुमार तिवारी ने राज्यपाल अनुसुईया उइके को रिपोर्ट सौंप दी थी। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की बजाए 11 नवंबर 2021 को ही एक नया दो सदस्यीय जांच आयोग का गठन कर दिया।

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