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छत्तीसगढ़ के दूधाधारी मठ में हुआ आज स्वर्ण श्रृंगार, बदले मठ नियम, पूजा करने पहुंचे सीएम साय, निमंत्रण मिला पर आज के लिए नहीं

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री आज रायपुर के दूधाधारी मठ में श्रीराम की‌ पूजा की है। आज राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर साल में तीन बार होने वाला स्वर्ण श्रृंगार को चौथी‌ बार भागवान को किया गया है।

छत्तीसगढ़ के दूधाधारी मठ में हुआ आज स्वर्ण श्रृंगार, बदले मठ नियम, पूजा करने पहुंचे सीएम साय, निमंत्रण मिला पर आज के लिए नहीं
Rohit Burmanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरMon, 22 Jan 2024 06:09 PM
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आज पूरे देश में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उत्सव मनाया जा रहा है।‌ आज भगवान राम मंदिर में विधि विधान के साथ मंदिर में विराजमान हो गए हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के दूधाधारी मठ में प्रदेश के मुख्यमंत्री साय‌ ने भी पहुंचकर पूजा पाठ किया है। इसके साथ ही आज दूधाधारी मठ में स्वर्ण श्रृंगार किया गया है। वैसे तो दूधाधारी मठ का नियम है कि वह साल में केवल तीन बार ही स्वर्ण श्रृंगार करते हैं। लेकिन आज का दिन बेहद ही खास होने के कारण मठ ने भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होने के कारण एक बार फिर से स्वर्ण श्रृंगार किया है। 

श्रीराम की पूजा के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय‌ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि आज का दिन बेहद ही खास है भगवान आज मंदिर में विराजमान हो गए हैं। इसके साथ ही सीएम ने कहा कि हमें भी अयोध्या के लिए आमंत्रण मिला है लेकिन यह आमंत्रण आज के लिए नहीं है। आज अयोध्या में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के राज्यपाल और सीएम योगी मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ हमारे भगवान श्री राम का ननिहाल है।‌ प्रभु राम हमारे भांजे हैं। हम प्रदेश में माता कौशल्या की धरती पर अपने भगवान की पूजा करते हुए उत्सव मना रहे हैं। माता कौशल्या की नगरी होने के कारण यहां इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रदेश में मकर संक्रांति के दिन से ही पूरा वातावरण राममय नजर आ रहा है।

क्या है दूधाधारी मठ का इतिहास

ऐसा कहा जाता है की मठ के संस्थापक महंत बलभद्र दास जो की बहुत बड़े हनुमान भक्त थे। उन्होंने एक पत्थर को हनुमान मानकर श्रद्धा भाव से उसकी पूजा अर्चना की। वह अपनी गाय जिसका नाम उन्होंने सुरही रखा था। उसके दूध से हनुमान जी की प्रतिमा को वह रोजाना नहलाया करते थे, और इस दूध का सेवन करते थे। महंत ने अन्य त्याग कर सिर्फ दूध के सहारे अपने अंतिम समय तक रहे।‌ दूधाधारी मठ में तीन प्रमुख मंदिर है। जिनमें राम जानकी मंदिर, श्री बालाजी मंदिर और हनुमान मंदिर।‌ हनुमान इस पूरे मठ के इष्ट देव माने जाते हैं। और यहां राम जानकी मंदिर का निर्माण पुरानी बस्ती में रहने वाले एक परिवार ने कराया था। यहां की मान्यता है कि वनवास के दौरान श्री राम ने यहां विश्राम किया था।‌ इस मठ में राम सेतु पाषाण भी स्थित‌ है। जो पानी में हमेशा तैरता रहता है।

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