बीजापुर के जंगल में फोर्स का ड्रोन से हमला!: माओवादियों ने कहा- गिराए बम, ग्रामीणों ने दिखाए निशान, पुलिस कर रही इनकार

लाइव हिन्दुस्तान, बीजापुर
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छत्तीसगढ़ का बस्तर लाल आतंक से थर्राया हुआ है। माओवादियों पर अंकुश लगाने अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात हैं, बावजूद नक्सल हिंसा की खबरें सुर्खियों में रहती है। यहां दहशत के बीच जिंदगी गुजर रही है।

बीजापुर के जंगल में फोर्स का ड्रोन से हमला!: माओवादियों ने कहा- गिराए बम, ग्रामीणों ने दिखाए निशान, पुलिस कर रही इनकार

छत्तीसगढ़ का बस्तर लाल आतंक से थर्राया हुआ है। माओवाद पर अंकुश लगाने अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियां तैनात है, बावजूद नक्सल हिंसा की खबरें आए दिन सुर्खियों में रहती है। नक्सलवाद की वजह से आम जनता की जिंदगी भी दहशत के बीच गुजर रही है। माओवादियों ने जिन गांवों में हवाई हमले का आरोप लगाया है, उसमें से एक गांव है बोट्टेतोंग, जहां लाइव हिन्दुस्तान की टीम पहुंची। ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताई, विरोध किया और कहा कि ऐसे हवाई हमले से तो आदिवासी मारे जाएंगे।   

बीजापुर जिले के पामेड़ ब्लॉक के बोट्टेतोंग गांव से लगे जंगलों में ग्रामीणों ने हमें उन जगहों को दिखाया, जहां हमले के निशान मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस को यदि नक्सलियों से लड़ना है तो आमने-सामने मुठभेड़ करना चाहिए। ऐसे हवाई हमले से तो आदिवासी मारे जाएंगे। अपने ही देशवासियों पर हवाई हमला करना गलत है। माओवादियों के प्रवक्ता विकल्प ने 16 अप्रैल को प्रेस नोट जारी कर सुकमा व बीजापुर जिले की सरहद पर बसे गांवों बोट्टेतोंग, रासम, एर्राम, मेट्टागुडेम, साकिलेर, मड़पा दुलेड, कन्नेमरका, पोट्टेमंगूम, बोत्तम में हवाई हमले का आरोप लगाया है। बोट्टेतोंग गांव के ग्रामीणों ने फोर्स द्वारा 30 से अधिक बम गिराए जाने का दावा करते हुए जमीन में बने गड्ढों व पेड़ों को दिखाएं, जहां निशान बने हुए हैं।  

ग्रामीणों का कहना-माओवादियों से सीधी लड़ाई होनी चाहिए
बोट्टेतोंग के निवासी अमर मरकाम व रासपल्ली के रहने वाले देवा पोड्यामी ने बताया कि घटनास्थल से उनका घर कुछ ही दूरी पर है। घटना वाली रात उन्होंने भी लगातार कई धमाकों की आवाज सुनी और जंगलों में तेज रौशनी भी नजर आई। सुबह गांव के लोगों के साथ वह भी जंगल में पहुंचे तो देखा कि मौके पर बम के टुकड़े पड़े हुए हैं। हमले से पेड़ों को नुकसान हुआ है। देवा का कहना है कि ऐसी घटना नहीं होने चाहिए। माओवादियों से सीधी लड़ाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी महुआ बीनने का समय है। गांव के सभी ग्रामीण पूरा समय जंगलों में ही बिताते हैं। यदि इस तरह ऊपर से बम गिराया जाएगा तो ग्रामीण भी बेवजह मारे जाएंगे। आसपास के ग्रामीण बुरी तरह डरे हुए हैं।  

भीमराव आंबेडकर के संविधान को भूल गई सरकार: बलराम
बोट्टेतोंग के युवा बलराम पोडियम कहते हैं कि क्या सरकार अपने ही संविधान को भूल गई है, जो अपने ही लोगों पर बम बरसा रही है। भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान बनाया क्या उसे फेंक दिया गया है। पाकिस्तान पर हवाई हमला किया गया था, जिसका समर्थन है, लेकिन निर्दोष आदिवासियों की जान की परवाह किए बिना यदि बम गिराया जायेगा तो इसका विरोध किया जायेगा। बलराम कहते हैं कि क्षेत्र में माओवादियों की मौजूदगी है। उनकी आवाजाही निरंतर हो रही है। सुरक्षाबलों द्वारा एक सप्ताह से टोही विमान द्वारा निगरानी की जा रही थी। माओवादियों की मौजूदगी देखकर बम गिराया गया है, लेकिन उस समय मौके से माओवादी बहुत दूर निकल गए थे। हवाई हमला की जानकारी कैसे मिली के सवाल पर उनका कहना है कि देर रात बड़ी संख्या में आसमान से कुछ गुजरने की आवाज आई। कुछ देर बाद गांव से लगे जंगलों से लगातार विस्फोट होने की आवाजें आने लगीं। जिन इलाकों में बम गिरने के निशान ग्रामीणों ने दिखाए वहां महुआ एकत्रित कर रखने के लिए झोपडी भी बनाई गई है। ग्रामीणों ने कहा कि हवाई हमले को बंद किया जाना चाहिए। 

क्या केंद्र सरकार भी गुरिल्ला युद्ध लड़ रही: बेला भाटिया
बस्तर में लंबे समय से आदिवासियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाली अधिवक्ता बेला भाटिया का कहना है कि एक तरफ भारत सरकार बस्तर में हो रहे युद्ध को "युद्ध" बोलने से इनकार करती है। ड्रोन द्वारा बमबारी की हाल की घटना से साफ समझ में आता है कि ऐसा क्यों हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के भी नियम होते हैं। भारत में भी ऐसे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन जैसे कि जिनेवा कन्वेंशन (1949) की पुष्टि हुई है। इस कन्वेंशन के एक भाग में युद्ध क्षेत्र के अंदर और आस-पास सैनिक द्वारा जनता की सुरक्षा के संबंध में भी लिखा हुआ है। अगर सरकार बस्तर में हो रहे युद्ध को "युद्ध" कहे तो यह सभी अंतराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य हो जाती है। हम सरकार से पूछना चाहेंगे कि सरकार किन नियमों के तहत यह सब कर रही है? या क्या भारत सरकार भी माओवादियों की तरह गुरिल्ला युद्ध कर रही है?

आरोप झूठे, ग्रामीणों को बरगला रहे नक्सली: सुंदरराज पी.
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा है कि माओवादी संगठन के प्रवक्ता विकल्प ने प्रेसनोट जारी कर जिस हवाई हमले का आरोप लगाया है, वह पूरी तरह गलत और निराधार है। बस्तर में माओवादी लगातार अपना जनाधार खोते जा रहे हैं और यही वजह है कि उनके द्वारा ग्रामीणों को भ्रमित करने के उद्देश्य से इस तरह की झूठी अफवाह फैलाई जा रही है। आईजी ने दावा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार विकास, विश्वास और सुरक्षा के साथ कार्य किया जा रहा है, जिससे जल्द ही बस्तर से माओवाद को मुक्ति मिलेगी। बता दें कि एक साल पहले भी 19 अप्रैल 2021 को माओवादी संगठन द्वारा बस्तर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों द्वारा हवाई हमले करने का आरोप लगाया था। उस समय भी सुरक्षाबलों के अधिकारियों ने उन आरोपों को निराधार बताया था। (रिपोर्ट-विकास तिवारी)

Sandeep Diwan

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