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इस साल धान खरीदी की रफ्तार धीमी, किसान कर रहे चुनावी नतीजों का इंतजार, क्या मिलेगा 3100 या 3200

छत्तीसगढ़ की किसान इस साल धान खरीदी को लेकर जल्दबाजी बिल्कुल नहीं कर रहा है। माना जा रहा है कि साल 2023 के चुनाव परिणाम आने के बाद प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी तब किसाने अपनी उपज खरीदी केंद्रों में ले

इस साल धान खरीदी की रफ्तार धीमी, किसान कर रहे चुनावी नतीजों का इंतजार, क्या मिलेगा 3100 या 3200
Rohit Burmanभाषा,रायपुरWed, 29 Nov 2023 04:37 PM
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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर किसान अब चुनावी नतीजे का इंतजार कर रहा है। छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से भले ही एमएसपी पर धान खरीदी शुरू हो गई हो लेकिन किसान अपनी उपज बेचने में कोई जल्दबाजी नहीं कर रहा है। यही वजह है कि साल 2023 में पिछले साल की अपेक्षा नवंबर माह में अब तक धान खरीदी औसतन कम हुई है। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि 3 दिसंबर के बाद किसान बड़ी संख्या में मंडी पहुंचकर धान बेचने के सिलसिले को तेजी से शुरू करेगा। 

छत्तीसगढ़ में किसानों की माने तो दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र के सावनी गांव के किसान लीलाराम चंद्राकर का यह मानना है कि उन्होंने अपने 18 एकड़ खेत में धान की खेती की है लेकिन उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई भी जल्दबाजी नहीं है। चंद्राकर छत्तीसगढ़ के उन किसानों में से एक हैं जिन्होंने अपने धान के रकवे को रोक रखा है। चंद्राकर का मानना है कि उनके क्षेत्र में भी अधिकांश किसानों ने अपनी धान की उपज नहीं बेची है क्योंकि वह नई सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह से छत्तीसगढ़ में किसानों ने धान की कटाई रोक रखी है उससे धान में नमी आ सकती है लेकिन उपार्जन केदो में 17% तक नमी वाला धान स्वीकार कर लिया जाता है। वहीं दूसरी तरफ दुर्ग जिले के रौता गांव के किसान भीखम पटेल के अनुसार नवंबर माह में दीपावली के त्यौहार के कारण धान की कटाई नहीं की जा सकी क्योंकि किसान उत्सव में व्यस्त थे। इसी के साथ ही प्रदेश में चुनाव भी थे। यही कारण है कि उन्होंने भी अभी तक कटाई नहीं की है। पटेल ने कहा कि वह 26 एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। लेकिन अब तक उन्होंने केवल 7.5 एकड़ भूमि पर ही उगाई जो फसल है उसे बची है। 


धान खरीदी में हो रही देरी पर विशेषज्ञों की राय

छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पर्यवेक्षकों और विशेषज्ञों की माने तो प्रदेश में चुनाव प्रचार और त्योहारों के दौरान जो वादे किसानों से किए गए हैं वह भी एक वजह है छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की गति को धीमा करने की।‌ क्योंकि छत्तीसगढ़ का किसान दोनों ही दलों के द्वारा किसानों के लिए किए गए वादों को सोचकर असमंजस में है‌। उनका यह मानना है कि अगर बीजेपी जीतेगी तो खरीदी केंद्र 21 क्विंटल प्रति एकड़ स्वीकार करेगा। और अगर कांग्रेस जीती है तो उन्हें प्रति कुंटल धान पर 2500 रुपए एमएसपी और ऋण माफी का फायदा मिलेगा।  यही वजह है कि किसान चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहा है। किसानों का यह सोचना है कि उन्हें मिलने वाला फायदा राजनीतिक दल चुनावी नतीजे के साथ उन्हें दे देंगे। हालांकि राजनीतिक दलों ने इस बात का उल्लेख बिल्कुल भी नहीं किया है कि वह धान खरीदी के बदले अधिक कीमत किसानों को कब देंगे। 


2022-23 और 2023-24 में खरीदी के आंकड़े


अगर हम साल 2022-23 के माह में धान खरीदी के आंकड़ों पर नजर डाले तो उस साल किसानों ने 1 नवंबर से 29 नवंबर के बीच 5 लाख किसानों ने 19.3 लाख मैट्रिक टन धान बेचा था। वही इस साल किसानों ने 1 नवंबर से 28 नवंबर के बीच 3 लाख 17 हजार 223 किसानों ने करीब 13.21 लाख मैट्रिक टन धान बेचा है। जो पिछले साल के अनुपात में बेहद कम है। वहीं इस साल 2023-24 में राज्य सरकार ने 130 लाख मैट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है इसके लिए 2739 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं।

 

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