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कोयला घोटाले में पूर्व सांसद दर्डा और उनके बेटे को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने निलंबित की सजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक से जुड़े एक मामले में पूर्व सांसद विजय दर्डा और उनके बेटे देवेन्द्र दर्डा और व्यवसायी मनोज कुमार जयसवाल को बड़ी राहत प्रदान की।

कोयला घोटाले में पूर्व सांसद दर्डा और उनके बेटे को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने निलंबित की सजा
Krishna Singhहिंदुस्तान,नई दिल्लीTue, 26 Sep 2023 09:19 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता से संबंधित एक मामले में पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेन्द्र दर्डा और व्यवसायी मनोज कुमार जयसवाल की चार साल की सजा को निलंबित कर दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने दोषियों की सजा के खिलाफ दायर अपील सुनवाई के लिए स्वीकार कर लीं हैं। इस मामले में उनकी दोषसिद्धि और जेल की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों के लंबित होने तक सजा को निलंबित कर दिया गया है। 

उच्च न्यायालय ने उन्हें संबंधित अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने और मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा है कि यह निर्देशित किया जाता है कि अपीलकर्ता पर लगाई गई सजा वर्तमान अपील के लंबित रहने के दौरान निलंबित रहेगी। इसके एवज में दोषियों को एक लाख रुपये के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपये मूल्य के बांड के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। 

दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी कर तीन व्यक्तियों द्वारा उनकी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील पर जवाब मांगा था और मामले में उन्हें 26 सितंबर तक अंतरिम जमानत दे दी थी। विशेष अदालत द्वारा सजा का आदेश पारित करने के तुरंत बाद 26 जुलाई को दर्डा पिता-पुत्र व जयासवाल को हिरासत में ले लिया गया और दो दिन बाद अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

दोषियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने कभी भी जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने उच्च न्यायालय को बताया कि तीनों दोषियों ने निचली अदालत द्वारा लगाया गया जुर्माना पहले ही जमा कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से अपील की कि अपील लंबित रहने के दौरान उन पर लगाई गई सजा को निलंबित कर दिया जाए। वहीं सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील तरन्नुम चीमा ने सजा को निलंबित करने की याचिका का विरोध किया।

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