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छत्तीसगढ़ में क्यों डूबी भूपेश सरकार? तुष्टीकरण या अंदरूनी खींचतान, कांग्रेस की मायूसी के 5 कारण

Reasons of Congress Defeat in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ से मिल रहे मतगणना के रूझानों में भाजपा बहुमत की ओर है। सूबे में कांग्रेस को जो निराशा हाथ लगती नजर आ रही है। क्या रही इसकी वजहें... 

छत्तीसगढ़ में क्यों डूबी भूपेश सरकार? तुष्टीकरण या अंदरूनी खींचतान, कांग्रेस की मायूसी के 5 कारण
Krishna Singhलाइव हिंदुस्तान,रायपुरSun, 03 Dec 2023 03:13 PM
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छत्तीसगढ़ में मतगणना के रूझानों में भाजपा लगातार बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग से मिले आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 55 सीट पर आगे है जबकि सत्ताधारी कांग्रेस 32 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। छत्तीसगढ़ के रूझानों में भाजपा ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। वहीं कांग्रेसी खेमे का आलम यह है कि सूबे के नौ मंत्री अपनी सीट पर पीछे हैं। मालूम हो कि बघेल कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 13 सदस्य हैं। सूबे में कांग्रेस को जो निराशा हाथ लगी है उसकी क्या वजहें हैं। इस रिपोर्ट में उन वजहों की पड़ताल... 

1- पूरे पांच साल छाई रही अंदरूनी खींचतान
छत्तीसगढ़ में पूरे पांच साल कांग्रेस के भीतर की अंदरूनी खींचतान छाई रही। सीएम भूपेश बघेल और डिप्टी सीएम टीएस सिंदेव के बीच कथित टकराव की खबरें और अटकलें अक्सर सुर्खियों में रहीं। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंदेव के बीच ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चाओं पर भाजपा के नेता अक्सर तंज कसते नजर आए। यही नहीं प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के बीच भी टकराव की खबरें आती रहीं। चुनाव विश्लेषकों की मानें तो जनता के बीच इन खबरों का गलत प्रभाव पड़ा। कई जगहों पर परोक्ष रूप से बागियों ने भी खेल बिगाड़ने का काम किया। 

2- धरातल पर घोषणाओं का असर
छत्तीसगढ़ में शराबबंदी एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। पिछली बार कांग्रेस ने इस वादे के साथ सरकार बनाई थी। रमन सिंह बार-बार कांग्रेस सरकार पर इसको लेकर सवाल उठाते रहे हैं। रमन सिंह के साथ अन्य भाजपा नेताओं ने धरातल पर शराबबंदी नहीं लागू होने का आरोप लगाया है। भाजपा के नेता लगातार भूपेश बघेल सरकार पर गोठान घोटाले का भी आरोप लगाते रहे। विश्लेषकों की मानें तो भूपेश सरकार ने घोषणाएं तो की लेकिन धरातल पर उनका चमत्कारिक असर नजर नहीं आया। 

3- वादों पर नहीं जगा जनता का यकीन
रूझानों से उत्साहित राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने रविवार को कहा कि सूबे के लोगों को प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों और वादों पर भरोसा है, न कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के वादों पर... रमन सिंह पूरे चुनावी अभियान में उक्त बातें कहते रहे और कांग्रेस पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। वहीं पीएम मोदी यह बताने में सफल रहे कि उनकी गारंटी पक्की है। चूंकि लोगों ने पांच साल भूपेश सरकार का कामकाज देखा था, शायद यही वजह रही कि उन्होंने भाजपा को फिर से मौका देने का मन बनाया। 

4- भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी बिगाड़ा खेल
पूरे चुनावी कैंपेन में भाजपा के नेता सूबे की कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते नजर आए। भाजपा नेताओं ने भूपेश बघेल सरकार पर कोयला घोटाला, गोठान घोटाला, महादेव ऐप घोटाला जैसे मामलों में शामिल होने का आरोप लगाया। इससे जनता के मन में कांग्रेस नेताओं के प्रति अरुचि पैदा हुई। 

5- छाए रहे मतांतरण, लव-जिहाद के मुद्दे
सूबे में अक्सर मतांतरण और लव-जिहाद के मामले सामने आए। सूबे में बेमेतरा जिले के बिरनपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा का मामला भी खूब छाया रहा। भाजपा नेताओं ने इसे हर मौके पर उछालने की कोशिश की। यहां तक कि भाजपा ने ईश्वर साहू को चुनाव मैदान में उतार दिया जिनके बेटे भुनेश्वर साहू की सांप्रदायिक हिंसा में हत्या कर दी गई थी। भाजपा नेता सूबे की भूपेश बघेल सरकार पर लगातार तुष्टीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे।

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