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दूसरे फेज में 70 सीटों पर जबरदस्त घमासान, मतदान से पहले क्यों चुपचाप बैठा है छत्तीसगढ़ का वोटर ?

छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान के पहले माहौल चुप-चाप है या फिर प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए चालाक हो गया है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा दोनो ही लगभग एक जैसी घोषणा कर रहे हैं।

दूसरे फेज में 70 सीटों पर जबरदस्त घमासान, मतदान से पहले क्यों चुपचाप बैठा है छत्तीसगढ़ का वोटर ?
Abhishek Mishraलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरWed, 15 Nov 2023 02:26 PM
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छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान के पहले मतदान यूं कहें तो चुप-चाप है या फिर प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए चालाक हो गया है। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा दोनो ही लगभग एक जैसी घोषणा कर रहे है एक की घोषणा में कुछ कम तो दूसरे की घोषणा में कुछ ज्यादा मिल रहा है। अब प्रदेश का मतदाता अंतिम वक्त तक इंतजार कर रहा है। वोटर की‌ ये खामोशी अब सीधे तौर प्रदेश के मुद्दों से हटकर क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों तक पहुंच गया है। साल 2023 का चुनाव कांग्रेस और भाजपा की लगभग एक जैसी घोषणा के बाद प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि उनके स्थानीय मुद्दे पर अटक गया है लेकिन अब तक वोटर अपनी खामोशियों में अपना एक-एक वोट दबाए बैठा है। 

साल 2018 से बहुत अलग 2023 की चुनाव की स्थिति

छत्तीसगढ़ में साल 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं में एक करेंट दिख रहा था। लगातार प्रदेश भाजपा के खिलाफ माहौल था  जिसका कांग्रेस का फायदा होता हुआ साफ दिख रहा था। उस बीच‌ चुनाव में कांग्रेस की घोषणा मतदाताओं को बेहद प्रभावित की थी परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया था। वही 2023 का‌ चुनाव में कांग्रेस के कर्ज माफी के वादे को अलग कर दिया जाए तो भाजपा-कांग्रेस का चुनावी वादे में मतदाता विचार कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों को लेकर जो प्रदेश की राजनीति के जानकार है वह बतातें है कि  मतदाता जब चुपचाप हो खुलकर न बोल रहा हो इसका तात्पर्य यह है कि मतदाता किसे वोट करे वो तय‌ नहीं कर पा रहा है। ऐसी स्थितियों में प्रदेश में जीत और हार का अंतर बेहद ही करीब रहने की आशंका बनी रहती है। 

अब प्रदेश का वोटर शांत क्यों है ?

छत्तीसगढ़ में पहले भाजपा ने घोषणा की जिसमें 3100 में धान खरीदी प्रदेश की महिलाओं को 1000 रुपए प्रति महीना यानी साल का 12000 रुपए देने जैसी बड़ी घोषणा की। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने 3200 रुपए में धान खरीदी और महिलाओं को 15000 रुपए साल का देने की घोषणा की। अगर किसान धान खरीदी पर कांग्रेस के सांथ जाएगा‌ तो लगभग भाजपा का वादा भी एक समान है वहीं प्रदेश में सबसे ज्यादा संख्या की‌‌ मतदाता महिला को साधने कांग्रेस 15000 तो भाजपा 12000 दे रही है। अब यह दोनो ही बड़ा मुद्दा है जो ज्यादा प्रभाव सील है। अब यह बात मतदान बहुत‌ अच्छी तरह से समझ गया है कि दोनों में से जिसकी भी‌ सरकार मिली तो अब पहले की अपेक्षा ज्या ही मिलेगा।  यह वह वजह है जो वोटर को चुपचाप रखी है। वहीं दूसरी तरफ यह भी माना जा रहा कि भ्रष्टाचार को लेकर जो शोर हो रहा है वह शहरी इलाकों पर देखने को मिल रहा है लेकिन ग्रामीण वोटर को इस तरह के मुद्दे से ज्यादा लेना देना है। इस लिए मतदाता की खामोशी की एक वजह यह भी हो सकती है।

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