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कृत्रिम अंग और उपकरण पाकर दिव्यांगों और वृद्धजनों के चेहरे पर आई मुस्कान, कहा- अब जिन्दगी होगी आसान

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में जिला प्रशासन की नई पहल जयपुर फूट कैंप में दिव्यांग और वृद्धजनों कृत्रिम अंग और उपकरण दिए गए हैं। प्रशासन के इस सहयोग चेहरे पर मुस्कान के साथ दिव्यांगों ने कहा ....

कृत्रिम अंग और उपकरण पाकर दिव्यांगों और वृद्धजनों के चेहरे पर आई मुस्कान, कहा- अब जिन्दगी होगी आसान
Rohit Burmanलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरFri, 14 Jun 2024 10:09 PM
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मुझे कृत्रिम पैर मिला है अब मुझे नर्सरी की देखरेख में कोई दिक्कत नहीं होगी’’ इसके लिए मैं जिला प्रशासन का आभारी हूं यह कथन है कई साल पहले बम विस्फोट में अपना पांव खो चुके ग्राम नेरली के दिव्यांग हुंगाराम का इस तरह की अपनी भावनाओं का व्यक्त करते हुए गीदम के श्रवण बाधित कार्तिक का कहना है कि अब श्रवण यंत्र मिलने से अब वे अच्छे तरीके से लोगों की बात को सुन पायेगें। ग्राम गुडडरा की दिव्यांग कुमारी कोसी का कहना है कि ट्राइसिकल मिलने से सबसे पहले वह बिना किसी मदद के अपने रिश्तेदारों के घर जाना चाहेगी। इसी तरह अनेक दिव्यांग और वृद्धजन आज मुख्यालय के इनडोर स्टेडियम में उपस्थित थे जिन्हें क्षेत्र के विधायक चैतराम अटामी के उपस्थिति में निःशुल्क कृत्रिम हाथ पैर, कैलिपर्स, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, सामान्य ट्रायसिकल, वॉकर, बैसाखी, छड़ी जैसे उपकरण प्रदाय किया गया। 

कार्यक्रम में विधायक चैतराम अटामी ने कहा कि कैंप के आयोजन को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति,जयपुर एवं जिला प्रशासन के सहयोग से जिला दंतेवाड़ा में दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों के लिए 3 दिवसीय जयपुर फूट कैंप का आयोजन किया जा रहा है। आज इस ’’फूट कैंप’’ के माध्यम से दूरदराज गांव से आए दिव्यांग एवं वृद्धजनों लाभान्वित हुए है और उनका जीवन पहले से आसान हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि दंतेवाड़ा जिला छत्तीसगढ़ के आखिरी छोर पर है जो आंध्र प्रदेश एवं उड़ीसा राज्य से घिरा हुआ है।

ऐसी भौगोलिक परिस्थिति में रहने वाले निवासियों के लिए ऐसे शिविर का आयोजन और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, के विशेषज्ञ सुदूर राजस्थान के जयपुर से शिविर का आयोजन करने यहां आए हैं,इस मानवतापूर्ण प्रयास के लिए विशेषज्ञों और पूरी टीम का मैं अभिनंदन करता हूं। इस कैंप के माध्यम से जो दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों चल नहीं सकते, सुन नहीं सकते और कुछ काम नहीं कर सकते, ऐसे दिव्यांगजन एवं वृद्धजनों के लिए यह शिविर लाभकारी होगा। यह एक बहुत ही सराहनीय पहल है। ऐसा कैंप का आयोजन जिले में निरंतर होना चाहिए।
      
विधायक चैतराम अटामी ने महावीर दिव्यांग सहायता समिति के फाउंडर व चीफ पैटर्न बीएमवीएसएस डी.आर.मेहता रिटायर्ड (आईएएस 1961 बैच) के बारे बताते हुए कहा कि उन्होंने पहले देश की सेवा की और रिटायर्ड होने के बाद जन-जन की सेवा कर रहे है। औरे जीवन के इस पड़ाव में भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ है और वे सभी के लिए प्रेरणादायक है।  और तहे दिल से वे उनके आभारी है। 

महावीर दिव्यांग सहायता समिति के ’’फाउंडर व चीफ पैटर्न बीएमवीएसएस डी.आर.मेहता ने इस मौके पर कहा कि आज हमारी समिति को मुख्यालय दन्तेवाड़ा में शिविर आयोजन का अवसर मिला चूंकि क्योंकि यह एक सुदूर क्षेत्र है दूसरे यहां के दिव्यांग एवं वृद्धजनों को उपकरण एवं कृत्रिम अंग सहज उपलब्ध नहीं हो पाते और उन्हे पूरा विश्वास है कि इस शिविर के माध्यम से अधिक से अधिक लोग लाभान्वित होगें। इसमें जिला प्रशासन का भी महत्वपूर्ण योगदान है जिनके माध्यम से दिव्यांगजनों का सर्वे कराया गया। हमारा प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक साधनहीन लोगों को सहायता मुहैया कराये। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदाय किये जा रहे कृत्रिम अंग और उपकरण पूर्णतः निःशुल्क है उन्होने आशा व्यक्त किया कि प्रशासन इन उपकरणों के प्रदाय की स्थाई व्यवस्था करेगा, ताकि दिव्यांगों को इस प्रकार की सामग्री देने में आसानी हो। 

एसडीएम जयंत नाहटा ने इस मौके पर कहा कि शिविर के माध्यम से दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों को प्रमाण पत्र, हेल्थ किट, उपकरण, व्हीलचेयर एक मंच के नीचे मिल रहा है। साथ ही  दिव्यांग प्रमाण पत्र प्राप्त होने से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उन्हें  मिल सकेगा। इसके अलावा पंजीयन काउंटर की व्यवस्था के माध्यम से नेत्र रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों के द्वारा भी दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों की जांच की जावेगी। साथ ही उन्होने कहा कि शिविर में दिव्यांग व्यक्ति को किसी भी प्रकार के कृत्रिम अंग की आवश्यकता होगी तो उसे तत्काल बनाकर उन्हे उपलब्ध कराया जा सकेगा। 

बतादें कि शिविर का आयोजन 14 से 16 जून तक आयोजित होगा जिसमें जिले के विकासखण्डवार दिव्यांगों एवं वृद्धजनों को कृत्रिम अंग, उपकरण प्रदाय किये जायेंगे, इस क्रम आज गीदम एवं कटेकल्याण विकासखंड के दिव्यांगजन उपस्थित थे। अब दिव्यांगता पहले के समान प्रकोप नही रहा है अब ऐसे-ऐसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध है जो प्राकृतिक शारीरिक अंगों के समकक्ष कार्य निपटाने में सक्षम है इन उपकरणों के सहायता से दिव्यांगजन बिना किसी मदद के अपने कार्य बड़े आराम से कर सकते है।