एंडोस्कोपी करने वाले कैमरे से पेपर लीक; रायपुर की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने किया गजब का खेल
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से 11 हजार रुपए नकद, मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग उपकरण, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल बरामद किए हैं, जबकि मामले में शामिल दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में हुई पेपर लीक की घटना को लेकर पुलिस ने दुर्ग जिले के एक निजी कृषि महाविद्यालय के प्रोफेसर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रोफेसर ने इस पेपर पाने के बाद 5 छात्रों को बेच दिया था और वही इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड भी है। पुलिस ने बताया कि इस पूरे कांड को करने के लिए आरोपी प्रोफेसर ने बेहद हैरान करने वाला तरीका अपनाया। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रोफेसर ने एंडोस्कोपी करने वाले छोटे से कैमरे का इस्तेमाल कर पेपर को स्केन किया और फिर 15 सवालों को छात्रों को बेच दिया।
इस केस की जानकारी देते हुए रायपुर DCP (पुलिस उपायुक्त, क्राइम) स्मृतिक राजनाला ने शनिवार को बताया कि बीएससी (कृषि) सेकेंड ईयर के 20 अगस्त को होने वाली एंटोमोलॉजी (कीटशास्त्र) विषय के पेपर को प्रश्न पत्र लीक होने की घटना सामने आने के बाद रद्द कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा सेल के प्रभारी डॉ. एन.आर. रंगारे ने इस बारे में तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस ने 36 घंटों में आरोपियों को दबोचा
अधिकारी ने कहा कि 'शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर दुर्ग में स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38) के अलावा पांच छात्रों अजय नायक (20), त्रिदेव पटेल (22), नितिन पांडेय (22), अनुज मिंज (22) और आदित्य साहू (20) को गिरफ्तार कर लिया गया।'
प्रोफेसर है पूरी साजिश का मास्टरमाइंड
राजनाला ने बताया कि योगेश सोनकेसरिया ही इस मामले का मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी है जो वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि योगेश पिछले करीब एक वर्ष से अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त कर कॉलेज तक पहुंचाने का काम कर रहा था।
अगली परीक्षाओं के पेपर साथ ले जाकर की वारदात
अधिकारी के अनुसार 17 अगस्त को सोनकेसरिया उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए रायपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय आया था और इसी दौरान उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त किए थे। पुलिस के मुताबिक, प्रश्न पत्र कॉलेज ले जाने के बाद उसने सभी लिफाफे कॉलेज में रख दिए लेकिन 20 अगस्त को होने वाली AGCH-221 विषय की परीक्षा के प्रश्न पत्र वाला लिफाफा अपने घर ले गया।
एंडोस्कोपी करने वाले कैमरे को लिफाफे में डाला
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने सुई और नुकीले उपकरण की मदद से लिफाफे में छोटा छेद किया और मेडिकल जांच में काम आने वाले एंडोस्कोपी कैमरे से प्रश्न पत्र को स्कैन करते हुए उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। इसके बाद उसने हाथों से प्रश्न पत्र में दिए गए 15 सवालों को लिखकर अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को 11 हजार रुपए में बेच दिए। उन्होंने कहा कि अजय नायक ने आगे यह प्रश्न पत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पांडेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को बेच दिया।
आरोपियों के पास से पुलिस को मिला इतना कुछ
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से 11 हजार रुपए नकद, मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग उपकरण, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल बरामद किया। साथ ही बताया कि मामले में शामिल दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
अधिकारी ने बताया कि 'जिन स्टूडेंट्स को ये पेपर मिला था, उन्हीं से हुई पूछताछ के दौरान पुलिस को इस मामले से जुड़े सुराग मिले थे। पूछताछ में यह भी पता चला कि 7 तारीख को भी इस प्रोफेसर ने 'प्लांट पैथालॉजी' का पेपर लीक किया था। वह पेपर भी आरोपी प्रोफेसर ने इसी तरीके से लीक किया था। इस मामले में अन्य लोगों की मिलीभगत के बारे में पता करने के लिए पुलिस की टीम लगी हुई है, तो इस मामले में आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।'
इस तरह हुआ पूरे मामले का खुलासा
परीक्षा लीक को लेकर मिली शिकायत से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने बताया कि 'परीक्षा वाले दिन यानी 20 अगस्त की सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी 28 कृषि महाविद्यालयों में बीएससी (कृषि) द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर के AGCH-221 (कीटशास्त्र) विषय की परीक्षा निर्धारित थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से पहले ही 20 अगस्त की सुबह करीब 8:41 बजे कवर्धा स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के ई-मेल पर और करीब 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों के ई-मेल पर प्रश्न पत्र लीक होने की सूचना मिली।'
अधिकारी ने बताया कि 'इसके अलावा छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी वॉट्सऐप के माध्यम से प्रश्न पत्र के कुछ प्रश्नों के वायरल होने की जानकारी विश्वविद्यालय को दी। फिर जांच के दौरान उपलब्ध सामग्री और सूचना के आधार पर प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल होने की पुष्टि हुई तथा इसके बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।'
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि मामले की जांच के दौरान साइबर टीम ने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल प्रश्न पत्र, स्क्रीनशॉट, फोटो, संदेश और पोस्ट का तकनीकी विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने दुर्ग निवासी अनुज मिंज को पकड़ा और इसके बाद कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग टीमें भेजकर सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। (भाषा इनपुट के )


