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नक्सली हिडमा ने मां की भी नहीं सुनी और पत्नी संग मारा गया, 26 हमलों से मचा दिया था आतंक

नक्सली हिडमा ने मां की भी नहीं सुनी और पत्नी संग मारा गया, 26 हमलों से मचा दिया था आतंक

संक्षेप:

देश में नक्सलवाद की अंतिम सांसों के बीच एक और बड़ी सफलता सुरक्षाबलों के हाथ लगी है। कुख्यात माओवादी कमांडर मादवी हिडमा मारा गया है। हिडमा दो दर्जन से अधिक बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रह चुका था।

Nov 18, 2025 12:45 pm ISTSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, रायपुर
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देश में नक्सलवाद की अंतिम सांसों के बीच एक और बड़ी सफलता सुरक्षाबलों के हाथ लगी है। कुख्यात माओवादी कमांडर मादवी हिडमा मारा गया है। उसके साथ ही उसकी पत्नी राजे भी मारी गई। हिडमा दो दर्जन से अधिक बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रह चुका था। 43 साल के हिडमा को ही 2013 के दरभा घाटी नरसंहार और 2017 के सुकमा हमले के लिए जिम्मेदार बताया गया था। पिछले दिनों ही हिडमा की मां ने बेटे से सरेंडर करने की अपील की थी, लेकिन उसने सुनी नहीं।

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आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ सीमा के घने वन क्षेत्र में मंगलवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई बड़ी मुठभेड़ में छह नक्सलियों के मारे गये। इनमें हिडमा और उसकी पत्नी भी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित बरदार ने बताया कि मुठभेड़ सुबह 6.30 से सात बजे के बीच मरेदुमिल्ली मंडल के वन क्षेत्र में हुई।

बरदार ने बताया, 'हां, आज (मंगलवार को) अल्लूरी जिले में हुई मुठभेड़ में छह माओवादी मारे गए।'मारे गए इन नक्सलियों में हिडमा भी शामिल था। उसके सिर पर अलग-अलग राज्यों की ओर से करीब एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

कौन था हिडमा?

1981 में सुकमा (तत्कालीन मध्य प्रदेश) में जन्मे हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की एक बटालियन का कमांडर था और सीपीआई (माओवादी) की सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था। बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल एकमात्र आदिवासी सदस्य हिडमा के सिर पर केंद्र और विभिन्न राज्यों की ओर से कुल लगभग एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें अकेले केंद्र सरकार ने 50 लाख रुपये का इनाम रखा था।

पिछले दिनों ही हिडमा की मां ने सार्वजनिक रूप से बेटे से आत्मसमर्पण करने की भावुक अपील की थी, लेकिन उसने मां की बात नहीं सुनी। हिडमा की मौत को नक्सलवाद के लिए करारा झटका माना जा रहा है, क्योंकि जिस समय सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, ऐसे में उसका खात्मा संगठन की रीढ़ तोड़ने वाला साबित होगा।

गौरतलब है कि पिछले महीने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया था कि 24 घंटे के भीतर 300 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। हाल ही में माओवादी आंदोलन के बड़े चेहरे मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने भी 14 अक्टूबर को आत्मसमर्पण कर अपने साथियों से हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी।

Sudhir Jha

लेखक के बारे में

Sudhir Jha
डिजिटल और प्रिंट मीडिया में डेढ़ दशक का अनुभव। भारतीय राजनीति के साथ एशियाई और वैश्विक मामलों की समझ। अर्थशास्त्र और खेल में भी रुचि। जम्मू-कश्मीर, लखनऊ और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले आज समाज, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, न्यूज ट्रैक, नवभारत टाइम्स में सेवा दे चुके हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन डिप्लोमा से पहले कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएशन किया है। जन्म बिहार में हुआ और पले-बढ़े मेरठ में। और पढ़ें

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