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नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कितनी आई कमी? आंकड़े कर देंगे हैरान

नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कितनी आई कमी? आंकड़े कर देंगे हैरान

संक्षेप:

देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट पाई गई है। नक्सल हिंसा के लिहाज से चिंताजनक जिलों की श्रेणी में केवल चार जबकि सबसे अधिक प्रभावित जिलों की श्रेणी में महज 3 जिले अब बच गए हैं।

Sun, 2 Nov 2025 06:22 PMKrishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली
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देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में गिरावट आई है। ताजा समीक्षा में पाया गया कि अप्रैल महीने में 9 राज्यों में 46 नक्सल प्रभावित जिले थे जो घटकर 38 रह गए हैं। चिंताजनक जिलों की श्रेणी में केवल चार जबकि सबसे अधिक प्रभावित जिलों की श्रेणी में महज 3 जिले रह गए हैं। यह समीक्षा वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना 2015 के एक हिस्से के रूप में की गई है। इस ऐक्शन प्लान के तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करती हैं।

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38 हुई नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को ताजा वर्गीकरण जारी किया था। सूत्रों ने बताया कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में कमी दर्ज की गई है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, अब सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) के तहत आने वाले जिलों की संख्या एक अप्रैल को 46 से घटकर 38 रह गई है। एसआरई के तहत केंद्र सरकार वामपंथी उग्रवाद से लड़ने के लिए राज्यों को आर्थिक मदद देती है।

सुरक्षा बलों के ऐक्शन का असर

एसआरई जिलों को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों, विरासत जिलों और प्रबल जिलों में बांटा जाता है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार की मार्च 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा करने की घोषणा के बाद सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाई के चलते वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की श्रेणियों में गिरावट आई है।

सबसे अधिक प्रभावित जिलों में अब केवल तीन

सूत्रों ने बताया कि देश में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल में 18 से घटकर अब 11 रह गई है। इनको सबसे अधिक प्रभावित जिलों, चिंताजनक जिलों और अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में बांटा गया है। अब सबसे अधिक प्रभावित जिलों में केवल तीन बचे हैं। इनकी संख्या एक अप्रैल को छह थी। इनमें छत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले शामिल हैं।

चिंताजनक जिलों में अब केवल चार

2015 में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या 35 थी। वहीं चिंताजनक जिलों में 4 जिले बच गए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ का कांकेर, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम, मध्य प्रदेश का बालाघाट और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली शामिल है। इन जिलों में उनको रखा जाता है जहां नक्सल प्रभाव कम तो हो रहा है लेकिन विकास की अब भी जरूरत है।

अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में भी कमी

अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा, गरियाबंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और ओडिशा का कंधमाल शामिल है। इन जिलों में सुरक्षा के साथ विकास की भी जरूरत है। अप्रैल में इस श्रेणी में छह जिले थे।

विरासती जिले भी घटे

27 जिलों को विरासत एवं महत्वपूर्ण जिलों की श्रेणी में रखा गया है। इनमें ओडिशा के 8, छत्तीसगढ़ के 6, बिहार के चार, झारखंड के 3, तेलंगाना के 2 और आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तथा पश्चिम बंगाल के एक-एक जिले शामिल हैं। इस श्रेणी में उन जिलों को रखा गया है जहां नक्सलवाद का अंत हो चुका है लेकिन ये अब भी वामपंथी उग्रवाद के विस्तार के जोखिम वाले क्षेत्र बने हुए हैं। इन जिलों में लगातार सरकारी मदद उपलब्ध कराने की जरूरत है। अप्रैल में इस श्रेणी में 28 जिले थे।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें

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