नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए 'बस्तर 2.0', अब क्या-क्या करेगी सरकार; CM साय ने बताया
छत्तीसगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने के दो हफ्ते बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि माओवादियों के पुनर्वास पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया है कि अब बड़े पैमाने पर ग्रामीण विकास पर फोकस किया जाएगा। मुख्यमंत्री की योजनाओं में बस्तर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने के दो हफ्ते बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि माओवादियों के पुनर्वास पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया है कि अब बड़े पैमाने पर ग्रामीण विकास पर फोकस किया जाएगा। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में बस्तर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना भी शामिल है। इस क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बस्तर को कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माना जाता था।
तरक्की में रुकावट बन रहे थे नक्सली
हाल ही में नई दिल्ली में पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने दशकों पुरानी नक्सली उग्रवाद की समस्या को सफलतापूर्वक खत्म करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल-इंजन सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई रणनीतिक समय-सीमा को दिया। 62 साल के साई ने अपने बचपन के शुरुआती साल बगिया गांव के खेतों में अपने परिवार का पेट पालने में बिताए। जब वे सिर्फ 10 साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। अब वे राहत महसूस कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ आखिरकार नक्सलवाद के उस खतरे से आजाद हो गया है, जो राज्य की तरक्की में रुकावट बन रहा था।
विकास की बदौलत बेहतर होगी जिंदगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब यह तय नहीं लगता था कि यह समस्या कभी हल भी होगी या नहीं। लेकिन आज डबल-इंजन सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और पक्के इरादे के साथ-साथ हमारी सुरक्षा बलों की हिम्मत की बदौलत हम एक नक्सल-मुक्त राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। अपना बचपन खो देने वाले साई को इस बात का अफसोस है कि इस इलाके के लोग दशकों तक विकास से वंचित रहे। उन्होंने कहा कि अब विकास उन तक पहुंच रहा है और उनकी जिंदगी बेहतर होगी।
नक्सलियों के फिर से सिर उठाने की आशंकाओं के बावजूद मुख्यमंत्री राज्य के कायाकल्प को लेकर आश्वस्त हैं और पूरी तरह सतर्क भी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा शिविरों की स्थायी मौजूदगी और अस्पतालों व स्कूलों के खुलने से एक विकास कवच तैयार हो गया है।
'बस्तर 2.0' ब्लूप्रिंट पेश किया
साई का मुख्य ध्यान बुनियादी जरूरतों पर है- जिनमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और खेती-बाड़ी शामिल हैं। वह बस्तर से युद्ध-क्षेत्र का ठप्पा हटाने की कोशिश कर रहे हैं। वह कहते हैं कि राज्य सरकार ने एक व्यापक 'बस्तर 2.0' ब्लूप्रिंट पेश किया है, जो खनिज-समृद्ध इस क्षेत्र को पर्यटन, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि विकास की ओर ले जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र में आए बदलावों पर भी प्रकाश डाला। कहा कि यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा है, जहां राज्य सरकार ने 500 से ज्यादा ऐसें गांवों तक सरकारी योजनाएं सफलतापूर्वक पहुंचाई हैं, जहां पहले पहुंचना मुश्किल था। 'नियाद नेलनार' पहल के तहत सरकार मोबाइल टावर लगा रही है, सड़कें बना रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि हर परिवार को बिजली और साफ पानी मिल सके।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा बस्तर
बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे बढ़कर राज्य सरकार ने कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इंद्रावती नदी पर देवगांव और मथना सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सीएम ने कहा कि अभी हमारा मुख्य ध्यान कृषि और पर्यटन पर है। जैसे-जैसे विकास आगे बढ़ेगा, हम बाद के चरण में खनन गतिविधियों पर विचार करेंगे। वह कृषि को बढ़ावा देने, पर्यटन को बढ़ाने और वन उत्पादों के आधार पर वैल्यू एडिशन करने पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य होमस्टे और मछली पालन को बढ़ावा देना है। कभी संघर्ष का पर्याय माने जाने वाले इस क्षेत्र को अब एक स्थायी पर्यटन स्थल के रूप में फिर से स्थापित करना है।
सरेंडर करने वाले 3000 नक्सलियों का पुनर्वास
उन्होंने कहा कि बंदूकों के शांत होने के साथ ही राज्य अब एक व्यापक 'नियाद नेलनार' (आपका अच्छा गांव) नीति की ओर बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य पहले दूरदराज के रहे आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा में शामिल करना है। उन्होंने बताया कि राज्य के इस बदलाव का एक अहम हिस्सा लगभग सरेंडर करने वाले 3000 नक्सलियों का पुनर्वास है।
तीन साल तक हर महीने 10000 रुपये मिलेंगे
मुख्यमंत्री ने हिंसा की ओर दोबारा लौटने से रोकने के लिए तैयार की गई प्रणाली की रूपरेखा भी पेश की। इसमें वित्तीय सहायता, जमीन का आवंटन और कौशल विकास शामिल है। उन्होंने कहा कि सरेंडर करने वाले हर नक्सली को तीन साल तक हर महीने 10000 रुपये मिलेंगे, साथ ही 50000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि भी दी जाएगी। इसके अलावा राज्य उन लोगों को एक हेक्टेयर कृषि भूमि उपलब्ध कराएगा जो गांवों में लौटना चाहते हैं। उन लोगों को रहने के लिए एक प्लॉट देगा जो शहरी जीवन चुनते हैं।
…तो उस तरह की जिंदगी में वापस नहीं जाना चाहते
उन्होंने कहा कि पूर्व नक्सलियों को रोजगार के स्थायी अवसरों से जोड़ने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। साई ने कहा कि कई लोग मजबूरी और हालात की वजह से इस नक्सली आंदोलन में शामिल हुए थे। एक बार जब विकास और बुनियादी सुविधाएं मिल जाती हैं तो लोग खुद ही उस तरह की जिंदगी में वापस नहीं जाना चाहते।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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