छत्तीसगढ़ सरकार की खर्चों में कटौती करने की कवायद, लागू हुआ 8 सूत्रीय प्लान; शासकीय खर्चे पर विदेश जाना हुआ मुश्किल
इन दिशा निर्देशों में सरकार ने शासकीय खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं को भी नियंत्रित करने की कोशिश की है। जिसके अनुसार अब केवल बहुत जरूरी स्थितियों में ही विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी और इसके लिए भी मुख्यमंत्री की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।

वित्तीय संसाधनों के संतुलित उपयोग और सरकारी खर्चों में नियंत्रण के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार को सरकार के सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों एवं विभागाध्यक्षों के लिए मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए। इस बारे में वित्त विभाग ने एक आदेश जारी किया, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। सरकार ने बताया कि कम खर्चों से जुड़े सभी दिशा निर्देश 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे।
प्रदेश के वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप राज्य सरकार ने खर्चों में कमी लाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए यह पहल की है।
निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्रियों तथा निगम-मंडल एवं आयोगों के कारकेड में केवल आवश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। साथ ही सभी विभागों को वाहनों के सीमित उपयोग और ईंधन व्यय में कटौती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू करने तथा चरणबद्ध तरीके से शासकीय वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा है।
राज्य शासन ने सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं को भी नियंत्रित करने की कोशिश की है। इसके अनुसार अब केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी और इसके लिए मुख्यमंत्री की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।
प्रशासनिक बैठकों एवं समीक्षा कार्यों में डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। विभागों से कहा गया है कि भौतिक बैठकों को यथासंभव सीमित रखा जाए तथा नियमित समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाए। ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। कार्यालय समय के बाद सभी विद्युत उपकरणों को बंद करना अनिवार्य किया गया है। शासकीय भवनों में बिजली की अनावश्यक खपत रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है।
इसके अलावा ई-ऑफिस प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने, प्रिंटेड दस्तावेजों के स्थान पर डिजिटल फाइलों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि प्रशासनिक खर्चों में कमी लाई जा सके।
राज्य सरकार की तरफ से जारी 8 सूत्रीय दिशा निर्देश
1. कारकेड में वाहनों का सीमित उपयोग- इसके अनुसार मुख्यमंत्/मंत्रीगण/समस्त निगम/मण्डल/आयोग के पदाधिकारियों के कारकेड वाहनों में केवल अत्यावश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाए एवं अन्य शासकीय संसाधनों का संयमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
2. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन- राज्य के समस्त शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।
3. वाहनों के उपयोग एवं ईंधन में मितव्ययिता- इसके अनुसार शासकीय वाहनों के उपयोग में पेट्रोल/डीजल के व्यय को न्यूनतम स्तर पर रखने को कहा गया है। साथ ही एक ही स्थान पर जाने वाले विभागों के अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग की व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
4. विदेश यात्रा पर प्रतिबंध- अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर, राज्य शासन के व्यय पर शासकीय सेवकों के विदेश यात्राओं पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। अनिवार्य होने पर मुख्यमंत्री से पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
5. वर्चुअल बैठकों एवं ऑनलाइन समीक्षा को प्रोत्साहन- इस निर्देश के अनुसार विभागों को निर्देशित किया गया कि यथासंभव भौतिक बैठक महीने में एक बार ही आयोजित की जाए। भौतिक रूप से बैठकों के आयोजन के स्थान पर वर्चुअल/ऑनलाइन मोड में होने वाली बैठकों को प्रोत्साहित किया जाए। विभागों की नियमित समीक्षा बैठकें अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएं।
6. कार्यालय में ऊर्जा की बचत- इस निर्देश के अनुसार कार्यालयीन समय के बाद बिजली के सभी उपकरणों (जैसे लाइट, पंखे, ए.सी., कंप्यूटर) को अनिवार्य रूप से बंद करने के निर्देश दिए गए। साथ ही शासकीय भवनों में ऊर्जा की बर्बादी को रोकने हेतु आवश्यक उपाय करने को कहा गया।
7. ई-ऑफिस एवं डिजिटल कार्यप्रणाली बैठकों में प्रिंटेड पेपर/बुकलेट्स के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों (.pdf/.ppt आदि) का उपयोग करने को कहा गया। कार्यालयीन पत्राचार और नस्तियों का संचालन अनिवार्य रूप से e-Office के माध्यम से किया जाए ताकि कागज और स्टेशनरी व्यय में कटौती हो सके।
8. IGOT कर्मयोगी पोर्टल एवं प्रशिक्षण भौतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के स्थान पर इस हेतु IGOT कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा समस्त विभागों को अपने विशिष्ट प्रशिक्षण कोर्सेस को इस पोर्टल पर अपडेट करने को कहा गया, ताकि भौतिक प्रशिक्षण की न्यूनतम जरूरत हो सके।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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