प्रश्नपत्र में कुत्ते के नाम के उत्तर के विकल्प के रूप में 'राम' लिखा होने पर विवाद, 5 जिलों में बांटे गए पेपर

Jan 12, 2026 04:02 pm ISTSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, रायपुर
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छत्तीसगढ़ में चौथी कक्षा की अंग्रेजी के पेपर को लेकर विवाद मच गया। हाफ इयरली इग्जाम में एक बहुविकल्पीय प्रश्न में कुत्ते के नाम के उत्तर के विकल्प के रूप में 'राम' लिखा था। प्रश्न पत्र में पूछा गया था कि मोना के कुत्ते का नाम क्या है? उत्तर में 4 विकल्प थे- बाला, शेरू, राम और इनमें से कोई नहीं।

प्रश्नपत्र में कुत्ते के नाम के उत्तर के विकल्प के रूप में 'राम' लिखा होने पर विवाद, 5 जिलों में बांटे गए पेपर

छत्तीसगढ़ में चौथी कक्षा की अंग्रेजी के पेपर को लेकर विवाद मच गया। हाफ इयरली इग्जाम में एक बहुविकल्पीय प्रश्न में कुत्ते के नाम के उत्तर के विकल्प के रूप में 'राम' लिखा था। प्रश्न पत्र में पूछा गया था कि मोना के कुत्ते का नाम क्या है? उत्तर में 4 विकल्प थे- बाला, शेरू, राम और इनमें से कोई नहीं।

रायपुर मंडल के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में पिछले साल 6 जनवरी को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र की तस्वीरें ऑनलाइन सामने आईं और वायरल हो गईं। इस पर हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पालतू जानवर के नाम के संदर्भ में 'राम' शब्द का प्रयोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। पेपर का वितरण बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में हुआ था।

प्रश्न पत्र तैयार करने का कार्य सहायक परियोजना समन्वयक (एपीसी) संपदा बोस को सौंपा गया था। उन्होंने 5 शिक्षकों की एक विशेषज्ञ समिति के माध्यम से प्रश्न पत्र तैयार करवाया था। विवाद सामने आने के बाद बोस ने एक बयान जारी कर दावा किया कि उनके द्वारा साझा की गई पीडीएफ में से कोई भी प्रश्न पत्र अभी छपना नहीं था। इससे यह सवाल उठता है कि अंतिम प्रश्न पत्र का मुद्रण और वितरण कैसे हुआ।

मामला बढ़ने पर रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने प्रश्न पत्र की तैयारी, मूल्यांकन और अंतिम मुद्रण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि विवादित विकल्प छात्रों को बांटे गए प्रश्न पत्र में शामिल था।

जांच में टिल्डा के नक्ती (खपरी) स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शिखा सोनी को प्रश्नपत्र तैयार करने वाली और रायपुर के फाफडीह स्थित एसईजीईएस उच्च माध्यमिक विद्यालय की संविदा सहायक शिक्षिका नम्रता वर्मा को परीक्षा नियंत्रक के रूप में पहचाना गया। दोनों शिक्षिकाओं ने लिखित स्पष्टीकरण और माफीनामा पेश किया।

प्रारंभिक जांच के बाद शिक्षा विभाग ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाली प्रधानाध्यापिका को सस्पेंड कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक शिक्षिका के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और उन्हें बर्खास्तगी का सामना करना पड़ सकता है।

अपने बयान में शिखा सोनी ने कहा कि उनका इरादा 'रामू' टाइप करने का था, लेकिन टाइप करते समय 'यू' अक्षर छूट गया, जिससे 'राम' प्रिंट हो गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई गलती बताया और माफी मांगी।

यह विवाद प्रशासनिक खींचतान में भी बदल गया। महासमुंद के डीईओ विजय लहरे ने बताया कि उनके जिले में अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान यह मुद्दा सामने आया और जैसे ही अधिकारियों ने "राम" के उल्लेख पर ध्यान दिया, उस विकल्प को हटा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके जिले द्वारा तैयार किया गया प्रश्नपत्र मुद्रित नहीं हुआ था।

लहरे ने प्रिंटिंग प्रेस में हुई गलती का दावा करते हुए आरोप लगाया कि प्रिंटिंग प्रेस ने किसी दूसरे सेट का प्रश्न पत्र इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि वे हिंदू और भगवान राम के भक्त हैं। उनका किसी को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। रायपुर स्थित लोक शिक्षा निदेशालय (डीपीआई) ने डीईओ विजय लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस चूक के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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