भाजपा नेता के फार्महाउस में अफीम की खेती, गिरफ्तार; पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया
छत्तीसगढ़ में एक भाजपा नेता के फार्महाउस में अफीम की खेती करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा नेता समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, भाजपा ने अपने नेता को पार्टी से निकाल दिया है। इस मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।

छत्तीसगढ़ में एक भाजपा नेता के फार्महाउस में अफीम की खेती करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा नेता समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, भाजपा ने अपने नेता को पार्टी से निकाल दिया है। इस मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक भाजपा नेता को अपने फार्महाउस में डेढ़ एकड़ से अधिक भूमि पर कथित तौर पर अफीम की खेती करते हुए पकड़ा गया। स्थानीय भाजपा नेता और भाजपा किसान मोर्चा की चावल मिल प्रसंस्करण परियोजना के राज्य संयोजक विनय ताम्रकार को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने समोदा गांव में उनके फार्महाउस में अवैध अफीम की खेती का पता लगाया है।
भाजपा नेता समेत 3 गिरफ्तार
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देश पर 7 मार्च को प्रदेश कार्यालय द्वारा निलंबन आदेश जारी किया गया था, जिसमें पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान का हवाला दिया गया। पुलिस ने अफीम की अवैध खेती के सिलसिले में ताम्रकार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, अफीम की फसल कथित तौर पर पट्टे पर ली गई जमीन पर लगाई गई थी और खेत में गुपचुप तरीके से इसकी खेती की जा रही थी।
राजनीतिक विवाद बढ़ा
छापेमारी के एक दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समोदा स्थित घटनास्थल पर पहुंचने से राजनीतिक विवाद और भी बढ़ गया। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता से जुड़ा फार्महाउस चरागाहों सहित लगभग 150 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। उन्होंने दावा किया कि आरोपी के शक्तिशाली राजनीतिक संबंध हैं।
बघेल ने कहा कि सरकार को यह खुलासा करना चाहिए कि इस अवैध खेती में कौन से मंत्री और विधायक शामिल हैं। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण ही यह काम जारी रह सका होगा।
स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प
निरीक्षण के दौरान जब बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए तो स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने खेत में प्रवेश प्रतिबंधित करने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई। इसके बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
भाजपा नेता का इनकार
हालांकि, ताम्रकार ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया है कि जिस जमीन पर फसल पाई गई है वह उनकी नहीं है। उनका कहना है कि संपत्ति उन्हें बटाई के आधार पर दी गई थी और उन्हें कथित अफीम की खेती के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
उनके इनकार के बावजूद भाजपा ने विवाद से खुद को तुरंत अलग कर लिया। पार्टी ने ताम्रकार को उनके संगठनात्मक पद से हटा दिया और आगे की जांच लंबित रहने तक उनकी प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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