बीजापुर में 100 से अधिक घर गिराए, नक्सलियों से लड़ रहे जवानों के भी प्रभावित होने का दावा
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुलडोजर से 100 से मकानों को ध्वस्त किए जाने पर विवाद तूल पकड़ता नजर आ रहा है। दावा है कि इनमें डीआरजी जवानों के घर भी शामिल थे। घटनाक्रम पर रिपोर्ट तलब की गई है।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर के शांति नगर और चट्टानपारा इलाके में शुक्रवार-शनिवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुलडोजर से 100 से मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। दावा है कि इनमें डीआरजी जवानों के घर भी शामिल थे जो नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। पूरे घटनाक्रम पर बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने कहा कि डीआरजी जवानों के घर तोड़े जाने की सूचना मिली है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
ऐक्शन पर गराया विवाद
बीजापुर जिला मुख्यालय में प्रशासन की ओर से चलाए गए इस अतिक्रमण विरोधी अभियान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार और शनिवार को हुई इस कार्रवाई में प्रशासन ने शांति नगर और चट्टानपारा इलाके के 100 से ज्यादा मकानों को गिरा दिया। आरोप लग रहे हैं कि इन मकानों में उन डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) जवानों के परिवार भी रह रहे थे जो नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
डीआरजी जवान शंकर का परिवार प्रभावित
बताया जाता है कि शनिवार को बीजापुर के जंगलों में नक्सलियों से मुकाबला करने के बाद जब शंकर गटपल्ली जैसे डीआरजी जवान रात को घर लौटे तो उन्होंने परिवार को खुले आसमान के नीचे तिरपाल के सहारे बैठा पाया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें सामान निकालने तक का समय तक नहीं दिया और न ही कार्रवाई से पहले कोई नोटिस दिया गया।
नक्सलियों के डर से छोड़ा था गांव
तोड़े गए 100 मकानों में से अधिकांश लोग वे हैं जिन्होंने नक्सलियों के डर से अपना गांव छोड़कर यहां शरण ली थी। सलवा जुडूम के समय जब नक्सलियों ने ग्रामीणों को प्रताड़ित किया तब लाखों लोगों ने अपने घर छोड़ दिए थे। ऐसा ही एक परिवार डीआरजी जवान शंकर गटपल्ली का है जो चार साल से यहां रह रहा था। डीआरजी जवान शंकर गटपल्ली के परिवार ने पिछले साल बैंक से कर्ज लेकर पक्का घर बनाया था जिसे अब प्रशासन ने ढहा दिया है।
क्या बोली जवान शंकर की पत्नी?
उसूर ब्लॉक के नेला गांव के निवासी शंकर सलवा जुडूम के दौरान नक्सलियों के डर से गांव छोड़ने के बाद बीजापुर आए थे। वे पहले एसपीओ बने और फिर बहादुरी के कारण डीआरजी में शामिल हुए। उनकी पत्नी मुन्नी ने बताया कि मकान तोड़ने से पहले प्रशासन ने ना तो कोई नोटिस दिया और ना ही घर का सामान बाहर निकालने का समय दिया।
क्या बोला प्रशासन?
मुख्य नगर पालिका अधिकारी बंशी लाल नूरेटी ने इस कार्रवाई को नियमों के अनुसार बताते हुए कहा कि शांति नगर और चट्टानपारा इलाके में तोड़फोड़ इसलिए की गई क्योंकि कई लोगों के पास पहले से दो-तीन घर थे, फिर भी उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा करके घर बना लिए थे। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान अवैध कब्जों को हटाने और सरकारी जमीन खाली कराने के लिए चलाया गया।
विधायक ने खारिज की प्रशासन की दलीलें
वहीं स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी ने प्रशासन की दलीलों को गलत बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने विस्थापित लोगों और जवानों के घरों को तोड़ दिया। विधायक के नेतृत्व में प्रभावित लोगों ने मुआवजे और दोबारा बसाने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे जाम किया। यही नहीं प्रभावितों ने कलेक्टर संबित मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर रसूखदार लोगों के अवैध कब्जों की सूची भी दी जिनके मकान नहीं गिराए गए हैं।
क्या बोले- आईजी पी. सुंदरराज
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने कहा कि उनको डीआरजी जवानों के घर तोड़े जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है। पूछा गया है कि यह कार्रवाई किन हालात में हुई और जवानों के परिवारों का कितना नुकसान हुआ है। आईजी ने भरोसा दिया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। इस ऐक्शन के बाद सियासी माहौल गर्म है। प्रशासन के ऐक्शन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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