बीजापुर में 100 से अधिक घर गिराए, नक्सलियों से लड़ रहे जवानों के भी प्रभावित होने का दावा

Jan 18, 2026 11:14 pm ISTKrishna Bihari Singh वार्ता, बीजापुर
share

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुलडोजर से 100 से मकानों को ध्वस्त किए जाने पर विवाद तूल पकड़ता नजर आ रहा है। दावा है कि इनमें डीआरजी जवानों के घर भी शामिल थे। घटनाक्रम पर रिपोर्ट तलब की गई है। 

बीजापुर में 100 से अधिक घर गिराए, नक्सलियों से लड़ रहे जवानों के भी प्रभावित होने का दावा

छत्तीसगढ़ के बीजापुर के शांति नगर और चट्टानपारा इलाके में शुक्रवार-शनिवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुलडोजर से 100 से मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। दावा है कि इनमें डीआरजी जवानों के घर भी शामिल थे जो नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। पूरे घटनाक्रम पर बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने कहा कि डीआरजी जवानों के घर तोड़े जाने की सूचना मिली है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

ऐक्शन पर गराया विवाद

बीजापुर जिला मुख्यालय में प्रशासन की ओर से चलाए गए इस अतिक्रमण विरोधी अभियान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार और शनिवार को हुई इस कार्रवाई में प्रशासन ने शांति नगर और चट्टानपारा इलाके के 100 से ज्यादा मकानों को गिरा दिया। आरोप लग रहे हैं कि इन मकानों में उन डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) जवानों के परिवार भी रह रहे थे जो नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।

डीआरजी जवान शंकर का परिवार प्रभावित

बताया जाता है कि शनिवार को बीजापुर के जंगलों में नक्सलियों से मुकाबला करने के बाद जब शंकर गटपल्ली जैसे डीआरजी जवान रात को घर लौटे तो उन्होंने परिवार को खुले आसमान के नीचे तिरपाल के सहारे बैठा पाया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें सामान निकालने तक का समय तक नहीं दिया और न ही कार्रवाई से पहले कोई नोटिस दिया गया।

नक्सलियों के डर से छोड़ा था गांव

तोड़े गए 100 मकानों में से अधिकांश लोग वे हैं जिन्होंने नक्सलियों के डर से अपना गांव छोड़कर यहां शरण ली थी। सलवा जुडूम के समय जब नक्सलियों ने ग्रामीणों को प्रताड़ित किया तब लाखों लोगों ने अपने घर छोड़ दिए थे। ऐसा ही एक परिवार डीआरजी जवान शंकर गटपल्ली का है जो चार साल से यहां रह रहा था। डीआरजी जवान शंकर गटपल्ली के परिवार ने पिछले साल बैंक से कर्ज लेकर पक्का घर बनाया था जिसे अब प्रशासन ने ढहा दिया है।

क्या बोली जवान शंकर की पत्नी?

उसूर ब्लॉक के नेला गांव के निवासी शंकर सलवा जुडूम के दौरान नक्सलियों के डर से गांव छोड़ने के बाद बीजापुर आए थे। वे पहले एसपीओ बने और फिर बहादुरी के कारण डीआरजी में शामिल हुए। उनकी पत्नी मुन्नी ने बताया कि मकान तोड़ने से पहले प्रशासन ने ना तो कोई नोटिस दिया और ना ही घर का सामान बाहर निकालने का समय दिया।

क्या बोला प्रशासन?

मुख्य नगर पालिका अधिकारी बंशी लाल नूरेटी ने इस कार्रवाई को नियमों के अनुसार बताते हुए कहा कि शांति नगर और चट्टानपारा इलाके में तोड़फोड़ इसलिए की गई क्योंकि कई लोगों के पास पहले से दो-तीन घर थे, फिर भी उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा करके घर बना लिए थे। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान अवैध कब्जों को हटाने और सरकारी जमीन खाली कराने के लिए चलाया गया।

विधायक ने खारिज की प्रशासन की दलीलें

वहीं स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी ने प्रशासन की दलीलों को गलत बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने विस्थापित लोगों और जवानों के घरों को तोड़ दिया। विधायक के नेतृत्व में प्रभावित लोगों ने मुआवजे और दोबारा बसाने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे जाम किया। यही नहीं प्रभावितों ने कलेक्टर संबित मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर रसूखदार लोगों के अवैध कब्जों की सूची भी दी जिनके मकान नहीं गिराए गए हैं।

क्या बोले- आईजी पी. सुंदरराज

बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने कहा कि उनको डीआरजी जवानों के घर तोड़े जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है। पूछा गया है कि यह कार्रवाई किन हालात में हुई और जवानों के परिवारों का कितना नुकसान हुआ है। आईजी ने भरोसा दिया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। इस ऐक्शन के बाद सियासी माहौल गर्म है। प्रशासन के ऐक्शन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।

पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।