नक्सलियों ने केवल हथियार डालें हैं, असदुद्दीन ओवैसी ने किया आगाह; तीखा सवाल- VIDEO

Krishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली
share

असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को लोकसभा में सरकार से सवाल किया किया कि क्या देश में दक्षिणपंथी उग्रवाद धुर वामपंथी उग्रवाद की जगह लेगा।

नक्सलियों ने केवल हथियार डालें हैं, असदुद्दीन ओवैसी ने किया आगाह; तीखा सवाल- VIDEO

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में सरकार से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि क्या देश में वामपंथी उग्रवाद का स्थान अब दक्षिणपंथी उग्रवाद ले रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ऐसे कट्टरपंथी संगठनों का समर्थन कर रही है जो फर्जी मुठभेड़ और घरों को गिराने जैसी कार्रवाइयों में शामिल हैं। ओवैसी ने बांग्लादेश और नेपाल के उदाहरण देते हुए शासन में सुधार की जरूरत बताई और कहा कि केवल हथियार डालने से विचारधारा खत्म नहीं होती। उन्होंने असम सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इसे भी एक प्रकार का उग्रवाद बताया।

नक्सली केवल हथियार डाल रहे हैं विचारधारा नहीं छोड़ रहे

असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को लोकसभा में देश में नक्सलवाद के खात्मे के संबंध में सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर से किये गए दावों पर एक बड़ी चेतावनी दी। ओवैसी ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद में शामिल जितने भी लोग हथियार डाल रहे हैं वे विचारधारा नहीं छोड़ रहे हैं। ये अब भी विचारधारा पर कायम हैं। इसके साथ ही ओवैसी ने तीखा सवाल पूछा कि यदि नक्सली अपनी विचारधारा को नहीं छोड़ेंगे तो आपने कौन सी कामयाबी हासिल कर ली?

ऐसे इलाकों का क्या होगा भविष्य?

ओवैसी ने आगे कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयास पर चर्चा में भाग लेते हुए ओवैसी ने कहा कि जिन इलाकों से नक्सली हटे हैं अब वहां ना उग्रवादी हैं ना ही वहां सरकार या प्रशासन ही है। ऐसे में बताएं उन इलाकों का क्या भविष्य होगा? मैं बताना चाहता हूं कि यह 70 फीसदी मिलिट्री विक्ट्री है। नक्सलियों को जो ताकतें चलाती थीं वो अब भी मौजूद हैं। इसे यह सरकार समझ ही नहीं रही है।

खतरे की ओर भी इशारा

ओवैसी ने पड़ोसी देशों में हुई जेन-जी आंदोलनों के खतरे की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में देश में सबसे बड़ी आबादी नौजवानों की है। बांग्लादेश और नेपाल में हुए हालिया घटनाक्रमों से सबक लेने की जरूरत है। बांग्लादेश और नेपाल पुकार-पुकार कर कह रहा है कि इंकलाब सरकार को बदलने के लिए नहीं लाया गया था वरन शासन में सुधार करने के लिए लाया गया था।

क्या वामपंथी उग्रवाद की जगह दक्षिणपंथी उग्रवाद लेगा?

ओवैसी ने किसी संगठन का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि फर्जी एनकाउंटर, घर गिराने और आदिवासियों व मुसलमानों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के पीछे उन संगठनों का हाथ है जो कट्टरपंथ में भरोसा रखते हैं। मौजूदा सरकार ऐसे लोगों का साथ दे रही है। ऐसे में क्या अब देश में वामपंथी उग्रवाद की जगह दक्षिणपंथी उग्रवाद ले लेगा? उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या वह इस बढ़ते कट्टरपंथ पर लगाम लगाएगी?

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।

पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।