
60 फुट लंबा, 30 टन वजनी पुल रातों-रात हो गया गायब, चोरों के कांड से हर कोई हैरान
यह पुल शनिवार रात करीब 11 बजे तक लोगों के इस्तेमाल में था, लेकिन रविवार सुबह जब स्थानीय लोग वहां पहुंचे तो पुल पूरी तरह गायब मिला। इस घटना ने न सिर्फ लोकल जनता को हैरान कर दिया है, बल्कि आला अधिकारी भी हैरान-परेशान हैं कि आखिर हुआ तो हुआ कैसे।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में चोरी की एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां चोरों ने रातों-रात 60 फीट लंबा और करीब 25 से 30 टन वजनी लोहे का पुल ही उड़ा लिया। यह पुल शनिवार रात करीब 11 बजे तक लोगों के इस्तेमाल में था, लेकिन रविवार सुबह जब स्थानीय लोग वहां पहुंचे तो पुल पूरी तरह गायब मिला। इस घटना ने न सिर्फ लोकल जनता को हैरान कर दिया है, बल्कि आला अधिकारी भी हैरान-परेशान हैं कि आखिर हुआ तो हुआ कैसे।
रेलवे ट्रैक जैसे मजबूत इंगल लगे थे
करीब 40 साल पहले बनाए गए इस पुल का इस्तेमाल रोजाना आम लोग नहर के एक छोर से दूसरे छोर तक आने-जाने के लिए करते थे। यह पुल भारी लोहे के गर्डरों से बना था। लोहे के ये गर्डर रेलवे ट्रैक जैसे मजबूत थे, जबकि ऊपर मोटी लोहे की प्लेटें बिछाई गई थीं। अधिकारियों के मुताबिक, पुल की अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये है।
गैस कटर से काटने के निशान मिले
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक की जांच में यही पता चल पाया है कि चोरों ने पूरे प्लान के तहत इस वारदात को अंजाम दिया है। नहर के दोनों किनारों पर गैस कटर से काटने के निशान साफ-साफ देखे जा सकते हैं। इससे शंका जाहिर की जा रही है कि चोरों ने रात के अंधेरे में पुल को टुकड़ों में काटकर ट्रक या अन्य भारी वाहन से ले गए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में लोहे को हटाने में कई घंटे और कई लोगों की जरूरत पड़ती है, जिससे यह मामला पहले से सुनियोजित ढंग से प्लान की गई चोरी की तरफ इशारा करता है।
पानी सप्लाई चेन को भी बनाया निशाना
पुल चोरी की इस वारदात के साथ ही चोरों ने शहर की वाटर सप्लाई से जुड़े कुछ सामान को भी निशाना बनाया। नगर निगम की जल संवर्धन योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन को सुरक्षित रखने के लिए लगाए गए करीब 40 फीट लंबे एंगल आयरन सपोर्ट को भी काटकर चुरा लिया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि पाइपलाइन को नुकसान नहीं पहुंचा, वरना कोरबा शहर के करीब ढाई लाख लोगों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता था।
कबाड़ियों के ठिकानों पर दबिश दे रही पुलिस
वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने कहा कि यह पुल इलाके के लिए बेहद अहम था और इसके गायब होने से लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए जल्द से जल्द पुल की बहाली की मांग की है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दो स्थानीय कबाड़ व्यापारियों के यहां छापेमारी भी की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस को शक है कि चोरी किया गया लोहा स्क्रैप के रूप में बेच दिया गया होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है।
खबर में इस्तेमाल तस्वीर एआई से बनाई गई है।

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