
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर करारी चोट, सुकमा में एक इनामी समेत 29 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति -2025’ के तहत 50-50 हजार रूपए प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।
छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को बुधवार को उस वक्त बड़ी सफलता मिली, जब सुकमा जिले में दो लाख रुपए के एक इनामी माओवादी समेत 29 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले के गोगुंडा क्षेत्र के अंतर्गत केरलापाल एरिया कमेटी में सक्रिय 29 माओवादियों ने आज सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने बताया कि इस आत्मसमर्पण के बाद दरभा डिवीजन के हथियारबंद माओवादियों के साथ साथ अब उनका सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो गया है। 29 माओवादियों के सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद केरलापाल एरिया कमेटी अब नक्सली प्रभाव से मुक्त होने के अंतिम चरण में है।
इस बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में गोगुंडा पंचायत के दंडकारण्य आदिवासी-किसान मजदूर संगठन का अध्यक्ष पोड़ियाम बुधरा भी शामिल है, जिस पर दो लाख रूपए इनाम घोषित था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी सुकमा जिले की कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे हैं।
हथियार डालने वालों को मिलेगी 50-50 हजार रुपए की मदद
अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति -2025’ के तहत 50-50 हजार रूपए प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।
हथियार डालने वाले नक्सलियों के नाम
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में पोड़ियाम बुधरा (गोगुण्डा पंचायत DAKMS अध्यक्ष), हेमला मंगड़ू (उपाध्यक्ष), मड़कम हिड़मा (मिलिशिया डिप्टी कमांडर), हेमला हड़मा (मिलिशिया डिप्टी कमांडर), माड़वी देवा (सदस्य), हेमला नंदा (सदस्य), मड़कम बुधरा (पंच कमेटी सदस्य), मुचाकी सोमा (जनताना सरकार सदस्य), मुचाकी गुट्टा (सदस्य), पोड़ियाम देवा (सदस्य), मुचाकी बुधरा (सदस्य), पोड़ियाम सोमड़ा (सदस्य), मुचाकी मूड़ा (सदस्य), सोड़ी देवा (सदस्य), मुचाकी हड़मा (सदस्य), वेट्टी देवा (सदस्य), मुचाकी नंदा (सदस्य), माड़वी राजा (सदस्य), पोड़ियाम बण्डी (सदस्य), सोड़ी नंदा (सदस्य), मड़कम कोसा (सदस्य), सोड़ी बुधरा (सदस्य), मुचाकी आयता (सदस्य), मुचाकी नंदा (सदस्य), मुचाकी मुका (सदस्य), माड़वी सुक्का (सदस्य), माड़वी देवा (सदस्य), मुचाकी हड़मा (सदस्य) और मुचाकी लक्खा (सदस्य) है।
अधिकारियों ने बताया कि इस आत्मसमर्पण को करवाने में गोगुंडा क्षेत्र में सुरक्षा शिविर की स्थापना की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुरक्षा शिविर की स्थापना के बाद क्षेत्र में प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान, निरंतर दबाव और सघन अभियानों के परिणामस्वरूप माओवादी संगठन की गतिविधियां सीमित हुईं, जिससे कैडरों में संगठन के प्रति मोहभंग हुआ और उन्होंने आत्मसमर्पण का मार्ग अपनाया।
उन्होंने बताया कि गोगुंडा क्षेत्र अपनी विषम एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पूर्व में माओवादियों की दरभा डिवीजन के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल ठिकाना माना जाता था। सुरक्षा शिविर की स्थापना के बाद इन माओवादी ठिकाने को पूर्णतः ध्वस्त कर दिया गया तथा क्षेत्र में लगातार प्रभावी नक्सल ऑपरेशन संचालित कर माओवादी संगठन पर निर्णायक दबाव बनाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ-साथ क्षेत्र में शासन की समस्त कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं का लाभ अब ग्रामीणों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है, जिससे स्थानीय जनता का विश्वास शासन-प्रशासन के प्रति और अधिक मजबूत हुआ है।
यह सुरक्षाबलों को इस साल मिली दूसरी बड़ी सफलता है, इससे पहले नौ जनवरी को दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। 2025 में राज्य में 1500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था।

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Sourabh Jainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




