न IIT, न IIM, न बड़ी डिग्री; बीच में छोड़ दिया कॉलेज, आज हैं अरबों की दौलत के मालिक

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डीमार्ट कंपनी के मालिक राधाकिशन दमानी ने कॉमर्स की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी लेकिन सीखने की ललक और अनुशासन के दम पर डीमार्ट खड़ा कर भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में जगह बनाई।

न IIT, न IIM, न बड़ी डिग्री; बीच में छोड़ दिया कॉलेज, आज हैं अरबों की दौलत के मालिक

कई छात्र और युवा यह मान लेते हैं कि अच्छी नौकरी या बड़ी सफलता के लिए केवल बड़ी डिग्री ही रास्ता है। लेकिन भारत के सबसे सफल कारोबारियों में गिने जाने वाले राधाकिशन दमानी की कहानी इस सोच को चुनौती देती है। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की, फिर भी आज उनका नाम देश के सबसे प्रभावशाली निवेशकों और उद्यमियों में लिया जाता है। राधाकिशन दमानी का बचपन मुंबई के एक साधारण परिवार में बीता। उन्होंने कॉमर्स विषय में कॉलेज में दाखिला लिया था लेकिन पहले साल के बाद पढ़ाई छोड़ दी। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही युवा आगे चलकर भारतीय रिटेल सेक्टर की सबसे सफल कंपनियों में से एक की नींव रखेगा। कैसा रहा है राधाकिशन दमानी का करियर? आइए जानते हैं।

कॉलेज छोड़ने के बाद दमानी ने पारंपरिक नौकरी का रास्ता नहीं चुना। शुरुआती दिनों में उन्होंने बॉल बेयरिंग के कारोबार में हाथ आजमाया। बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें शेयर बाजार की दुनिया में प्रवेश करना पड़ा। यहीं से उनकी वास्तविक सीख शुरू हुई। उन्होंने बाजार को समझा, निवेश के सिद्धांत सीखे और वर्षों तक धैर्य के साथ अनुभव जुटाया। शेयर बाजार में शुरुआती दौर आसान नहीं था। कई बार जोखिम उठाने पड़े और गलतियां भी हुईं। लेकिन दमानी ने हर अनुभव को सीख में बदला। उन्होंने यह समझा कि लंबी अवधि की सोच और अनुशासन ही स्थायी सफलता की कुंजी है। यही सोच बाद में उनके कारोबारी मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनी।

45 साल की उम्र में शुरू किया नया सपना

जहां कई लोग 40 की उम्र के बाद नया करियर शुरू करने से डरते हैं, वहीं दमानी ने करीब 45 वर्ष की आयु में रिटेल कारोबार में उतरने का फैसला किया। पहले उन्होंने बाजार को समझा, ग्राहकों की जरूरतों का अध्ययन किया और फिर 2002 में डीमार्ट की शुरुआत की। धीरे धीरे यह ब्रांड देशभर में फैल गया और आज सैकड़ों स्टोर्स के साथ भारतीय रिटेल सेक्टर की बड़ी ताकत बन चुका है।

हालांकि, ये ध्यान में रखना जरूरी है कि राधाकिशन दमानी की कहानी यह नहीं कहती कि पढ़ाई जरूरी नहीं है। बल्कि यह सिखाती है कि सीखना कभी बंद नहीं होना चाहिए। कॉलेज की डिग्री महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन जिज्ञासा, अनुशासन, धैर्य और लगातार खुद को बेहतर बनाने की इच्छा उससे भी अधिक मायने रखती है। दमानी ने औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं की लेकिन जीवनभर सीखने की आदत ने उन्हें भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में शामिल कर दिया।

सीखने की क्षमता बड़ी होनी चाहिए

आज जब लाखों छात्र परीक्षा परिणाम, कॉलेज प्रवेश और करियर विकल्पों को लेकर चिंतित रहते हैं, तब राधाकिशन दमानी का सफर याद दिलाता है कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होती। सीखने की क्षमता, सही निर्णय लेने का साहस और लंबे समय तक मेहनत करने का धैर्य किसी भी व्यक्ति को असाधारण सफलता तक पहुंचा सकता है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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