मां की बेइज्जती ने बनाया IPS , पहले प्रयास में बिना कोचिंग UPSC क्रैक, पति भी हैं आईपीएस अफसर

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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UPSC Civil Services Exam : ग्रेजुएशन के दौरान शालिनी अग्निहोत्री ने परिवार वालों को बिना बताए यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पहली बार में ही उन्होंने 2011 में बिना किसी कोचिंग के ऑल इंडिया रैंक 285 हासिल कर आईपीएस बनने का सपना पूरा कर लिया।

शालिनी अग्निहोत्री

एक बच्ची अपनी मां के साथ उसी बस में सफर कर रही थीं जिसमें उनके पिता कंडक्टर थे। बस में खड़े एक अनजान शख्स ने उनकी मां की सीट के पीछे अपना हाथ सपोर्ट के लिए पकड़ा हुआ था। मां ने उस व्यक्ति से बेहद विनम्रता के साथ अनुरोध किया कि वो अपना हाथ वहां से हटाकर बाहर को पकड़ ले। इस पर उस व्यक्ति ने बदतमीजी से कहा, "आप क्या डीसी लगी हुई है कि मैं आपकी बात सुन के आपकी बात मान जाऊं?"। मां के अपमान पर बच्ची बेबस थी। उसके मन में यह सवाल बैठ गया कि यह डीसी कौन होता है जिसकी बात सब मानते हैं। डीसी आमतौर पर भारतीय प्रशासनिक सिस्टम में डिप्टी कमिश्नर या डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को कहा जाता है। यही वो पल था जब शालिनी अग्निहोत्री नाम की उस बच्ची ने आईपीएस अफसर बनने की ठान ली। 10वीं कक्षा तक आते-आते उन्हें समझ आ गया कि डीसी और एसपी के पद प्रशासन की मुख्य कड़ी होते हैं।

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली शालिनी अग्निहोत्री की कहानी भारतीय मध्यवर्गीय समाज की लड़कियों के लिए बड़ी सीख है। उनके पिता हिमाचल रोडवेज में बस कंडक्टर थे और सीमित साधनों में परिवार चलाते थे। धर्मशाला से स्कूली पढ़ाई करने वाली शालिनी शुरू से पढ़ाई में तेज थीं। 10वीं में 92 फीसदी और 12वीं में 77 प्रतिशत अंक लाने के बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन और फिर पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।

ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने परिवार वालों को बिना बताए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। पहली बार में ही उन्होंने 2011 में बिना किसी कोचिंग के ऑल इंडिया रैंक 285 हासिल कर आईपीएस बनने का सपना पूरा कर लिया। उन्हें हिमाचल कैडर अलॉट हुआ।

शालिनी अग्निहोत्री

बचपन में टॉमबॉय जैसी छवि

बचपन में शालिनी की छवि टॉमबॉय जैसी थी। वह लड़कों के साथ कंचे खेलती थीं। जिंदगी लाइव शो में अपनी कहानी शेयर करते हुए शालिनी ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें कभी भी वे खेल खेलने से नहीं रोका जो पारंपरिक रूप से लड़कियों के लिए मना होते हैं, जैसे गुल्ली-डंडा, कंचे, पिट्ठू और क्रिकेट। शालिनी ने अपने व्यक्तित्व के विकास का पूरा श्रेय अपनी मां को दिया, जिन्होंने उनमें आत्मविश्वास जगाने के लिए 7वीं-8वीं कक्षा में ही उन्हें अकेले बैंक में पैसे जमा करने भेजना शुरू कर दिया था।

पिता पूरी करते थे हर जरूरत

शालिनी ने अपने पिता की तुलना शरीर की 'रीढ़ की हड्डी' से की। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने अपनी इच्छाओं को किनारे रखकर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दिया और अगर शालिनी 10 रुपये मांगती थीं, तो पिता उन्हें 15 रुपये देते थे ताकि उन्हें कभी किसी चीज की कमी न महसूस हो।

देश की लोकप्रिय आईपीएस अफसर

शालिनी का नाम देश के सबसे लोकप्रिय आईपीएस अफसरों में गिना जाता है। कुछेक साल पहले फेम इंडिया मैगजीन के सर्वे में देश के 50 टॉप आईपीएस में शालिनी भी शामिल हो चुकी हैं। इस वर्ष जनवरी माह में उन्हें DIG के पद पर प्रमोट किया गया था।

पति भी हैं आईपीएस अफसर

संकल्प शर्मा 2012 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अफसर हैं। वह कानपुर में ज्वाइंट पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) हैं। संकल्प शर्मा ने बीटेक और एमटेक की पढ़ाई के बाद सिविल सर्विस की ओर रुख किया था। वह मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले है। संकल्प शर्मा देवरिया, खीरी आदि जिले में भी तैनात रह चुके है। शालिनी की बड़ी बहन डॉक्टर हैं और भाई आर्मी में हैं।

Pankaj Vijay

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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