40 प्लस की उम्र में छंटनी : नौकरी से निकाले जाने पर प्रोफेशनल्स ने सुनाई अपनी कहानियां और आपबीती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटेमेशन के चलते तमाम कंपनियों में छंटनियां हो रही हैं। रिस्ट्रक्चरिंग पॉलिसी के नाम पर कर्मचारियों को निकालने के इस ट्रेंड के लपेटे में 40 की उम्र पार चुके प्रोफेशनल्स भी आ रहे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटेमेशन के चलते तमाम कंपनियों में छंटनियां हो रही हैं। रिस्ट्रक्चरिंग पॉलिसी के नाम पर कर्मचारियों को निकालने के इस ट्रेंड के लपेटे में 40 की उम्र पार चुके प्रोफेशनल्स भी आ रहे हैं। कॉरपोरेट सेक्टर में 40 की उम्र में अब जॉब सिक्योर नहीं रही है। जबकि कुछेक सालों पहले तक माना जाता था कि इस उम्र के इस पड़ाव पर आकर करियर स्थिर हो जाता है। लेकिन अब कंपनियां लागत कम करने के लिए अनुभवी पेशेवरों को ही सबसे पहले बाहर का रास्ता दिखा रही हैं। अनुभव को कभी कंपनियां अपनी संपत्ति मानती थीं, वे अब उसे बैलेंस शीट पर बोझ मान रही हैं। उनकी सैलरी थोड़ी ज्यादा है और एआई जैसी तकनीक उनके कई कामों को आसानी से कर रही है। छंटनी को सामान्य कॉस्ट-कटिंग के रूप में शुरू किया गया था, वह अब एक ऐसी व्यवस्था में बदल गया है जहां 40 की उम्र के पेशेवर इस उथल-पुथल के केंद्र में हैं
बीते वर्ष कंपनियों में फ्रेश ग्रेजुएट से लेकर रिटायरमेंट के पड़ाव तक पहुंच चुके हर तरह के कर्मियों की छंटनी की गई। वे लोग भी निकाले गए जिनके पास 15–25 साल का अनुभव था। ऑफिस में शानदार काम को लेकर जिनके पास कई पुरस्कार थे। जिन्होंने लिंक्डिन प्रोफाइल पर स्ट्रेजिक लीडर व ट्रांसफोर्मेशन एक्सपर्ट जैसे नाम लिखे थे। अक्टूबर 2025 तक 200 से ज्यादा कंपनियों में लगभग 1 लाख टेक नौकरियां खत्म हो चुकी थीं। इससे पहले वाला साल ही 1.5 लाख का आंकड़ा पार कर चुका था। कटौतियां धीमी नहीं हो रही थीं, वे परिपक्व हो रही थीं।
छंटनी करने वाली कंपनियाँ कोई स्टार्टअप्स नहीं थीं। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेज़न, ओरेकल, सेल्सफोर्स, आईबीएम, एक्सेंचर, ब्लूमबर्ग और एडिडास जैसे बड़ी कंपनियां , जो कभी स्थिरता और लंबी करियर सुरक्षा के प्रतीक माने जाते थे, सब इस मौजूदा छंटनी लहर का हिस्सा बने।
'कंपनी रीशेप हो रही, मुझे यह कहकर हटा दिया'
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में एक 42 वर्षीय आईटी इंजीनियर, जिन्हें डायरेक्टर-लेवल भूमिका से निकाला गया, ने उस पल का जिक्र किया जब उन्हें जाने को कहा गया। उस समय उनके सारे भ्रम टूट गए। नाम न छापने की शर्त पर बोलते हुए अभिषेक (बदला हुआ नाम) ने कहा कि उन्हें लगता था उनका लंबा अनुभव उन्हें बचा लेगा। उन्होंने कहा, '42 की उम्र में मुझे सच में लगा था कि इंडस्ट्री में बिताए मेरे साल एक सुरक्षा कवच बनेंगे। मुझे कभी नहीं बताया गया कि मेरा प्रदर्शन खराब था। बस यह कहा गया कि कंपनी रीशेप हो रही है। बाद में समझ आया कि यह भाषा अकसर निकालने का विनम्र तरीका होता है। छंटनी क्षमता की वजह से नहीं, इकोनॉमिक्स की वजह से थी।'
पे-रोल कोलेस्ट्रॉल
कॉर्पोरेट शब्दावली में एक नया मुहावरा आया: 'पे-रोल कोलेस्ट्रॉल।' इसे काट दो तो संगठन फिट हो जाता है। जैसा कि एक वायरल पोस्ट में कहा गया: 'जब आप एक मैनेजर को 1 लाख रुपये महीना देते हैं, तो चार 25-साल के युवाओं को 25-25 हजार में क्यों न रख लें?'
40 में नौकरी जाना अलग क्यों लगता है
40 की उम्र में नौकरी सिर्फ आमदनी नहीं होती- वह पूरी व्यवस्था होती है। स्कूल की फीस, होम लोन, मेडिकल खर्च और बुज़ुर्ग माता-पिता—ये ऐसे खर्चें नहीं हैं जिन्हें टाला जा सके। करियर में प्रयोग करने, दिशा बदलने या खुद को खोजने की आजादी उसी वक्त खत्म हो जाती है, जब पेशेवर जोखिम सबसे ज्यादा होता है।
दशकों तक टीम संभालने के बाद निकाला
पीआर और कम्युनिकेशन फर्म के एक मैनेजर, जिन्हें 40 प्लास की उम्र में निकाला गया, विडंबना को यूं बयान करते हैं- पीआर में हम रोज नैरेटिव की ताकत की बात करते हैं। लेकिन उम्र को लेकर नैरेटिव बेहद क्रूर है। 47 की उम्र में दशकों तक संकट, ब्रांड और टीम संभालने के बाद भी आपको अचानक बदलाव विरोधी कह दिया जाता है। कंपनियां स्ट्रेटेजी में परिपक्वता चाहती हैं, कर्मचारियों में नहीं।'
जब वफादारी की वेल्यू रातों रात खत्म हो जाती है
श्रुति (बदला हुआ नाम) दिल्ली-एनसीआर के एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस में सीनियर असिस्टेंट एडिटर थीं। दिवाली के कुछ ही दिनों बाद उनसे इस्तीफा देने को कहा गया। उन्होंने कहा 'मुझसे कहा गया कि कंपनी युवा, नए ग्रेजुएट्स में निवेश करना चाहती है। सीनियर कर्मचारी उस तरह का आइडिया आउटपुट नहीं दे पा रहे थे, जिससे उनकी सैलरी जायज ठहराई जा सके।' उन्हें सेवरेंस ऑफर किया गया लेकिन शर्त यह थी कि उसी दिन इस्तीफा दें। उन्होंने कहा, '15 साल तक उस नौकरी के इर्द-गिर्द ज़िंदगी बनाने के बाद, मैं बिना किसी योजना के बाहर निकल आई। न चेतावनी, न बैक-अप।' उन्होंने कहा कि कंटेंट राइटरों को चुपचाप तेजी से बिना किसी वजह बताए बदला जा रहा है। कई दिन तो लगता है कि 40+ अब नई रिटायरमेंट उम्र बन गई है चाहे आप चाहें या नहीं।



