टीईटी पास करने की डेडलाइन तय, बंगाल 90 हजार शिक्षकों की बढ़ी टेंशन
बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया है। इस फैसले के मद्देनजर करीब 90000 शिक्षक होंगे प्रभावित उनके टीईटी परीक्षा पास करने की डेडलाइन 2028 तक निर्धारित है।

पश्चिम बंगाल के स्कूली शिक्षा जगत में इन दिनों हलचल तेज है। लंबे समय से अटकी पड़ी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी टीईटी को लेकर आखिरकार राज्य सरकार ने कमर कस ली है, और इसकी वजह बनी है सुप्रीम कोर्ट की वो सख्त हिदायत, जिसने देश भर के हजारों सेवारत शिक्षकों की नींद उड़ा रखी है। पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए राज्य के उन प्राइमरी टीचरों के लिए योग्यता परीक्षा कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिनकी नियुक्ति शिक्षा के अधिकार यानी आरटीई कानून, 2009 के लागू होने से पहले हुई थी। इस काम की जिम्मेदारी वेस्ट बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन को सौंपी गई है।
दरअसल, यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से जुड़ा है, जो 1 सितंबर 2025 को स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट एंड अदर्स मामले में सुनाया गया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त हुए सेवारत शिक्षकों को भी टीईटी की योग्यता हासिल करनी होगी, हालांकि कुछ शर्तों के साथ यह छूट भी दी गई थी। इसके बाद 29 मई 2026 को एक रिव्यू ऑर्डर के जरिए कोर्ट ने इस समयसीमा में नरमी दिखाते हुए इसे दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया। इसी आधार पर अब बंगाल सरकार ने अपनी अधिसूचना में 31 अगस्त 2028 की तारीख तय की है, जिससे पहले संबंधित शिक्षकों को अपनी टीईटी योग्यता हासिल करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड यह भी बताते हैं कि अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट केस और उससे जुड़ी रिव्यू पिटीशनों पर सुनवाई अभी भी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया निर्देश
सिर्फ इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को यह निर्देश भी दिया है कि टीईटी को साल में कम से कम दो बार, यानी हर छह महीने के करीब-करीब अंतराल पर आयोजित किया जाए, ताकि शिक्षकों को बार-बार मौका मिलता रहे और परीक्षा किसी एक बार की औपचारिकता तक सीमित न रह जाए। राज्य सरकार की अधिसूचना में यह चेतावनी भी साफ तौर पर दर्ज की गई है कि यह डेडलाइन हमेशा के लिए आगे नहीं बढ़ाई जा सकती, यानी शिक्षकों को अब समय रहते तैयारी में जुट जाना बेहतर होगा।
बंगाल में 90 हजार शिक्षकों की बढ़ी टेंशन
अब बात करें इस फैसले से कितने लोग प्रभावित होंगे, तो स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले करीब 90,000 शिक्षकों को इस परीक्षा में बैठना पड़ सकता है। हालांकि यह नियम सभी सेवारत शिक्षकों पर एक जैसा लागू नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के मुताबिक, जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल या उससे कम का वक्त बचा है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। मतलब साफ है कि यह नियम मुख्य रूप से उन्हीं शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बाकी है। ऐसे शिक्षकों को तय समयसीमा के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, जबकि रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके शिक्षकों को इस झंझट से राहत मिल गई है।
गौरतलब है कि बंगाल के कई शिक्षक संगठनों ने पहले ही इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिख चुके हैं, जिसमें उन्होंने वर्षों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा देने की अनिवार्यता को "अपमानजनक" तक करार दिया था। बहरहाल, अब जबकि सरकार ने औपचारिक तौर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं, तो शिक्षकों के सामने कोर्ट के आदेश का पालन करने के अलावा शायद ही कोई और रास्ता बचा है।
WBSSC और प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड को तैयारी के निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग ने वेस्ट बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन, दोनों से ही परीक्षा के आयोजन को लेकर जरूरी जानकारी मांगी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि दोनों संस्थाएं इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था कितनी जल्दी और किस तरह से पूरी करती हैं, क्योंकि लाखों शिक्षकों का भविष्य अब इसी प्रक्रिया की रफ्तार पर टिका हुआ है।


