सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन से पहले ही बंगाल में बर्खास्त शिक्षकों हल्ला बोल, क्यों काटा बवाल

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2016 एसएससी घोटाले में नौकरी गंवाने वाले हजार से ज्यादा शिक्षकों ने बिकाश भवन के बाहर धरना दिया है। वे जल्द भर्ती की मांग कर रहे हैं।

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बर्खास्त शिक्षकों का प्रदर्शन

कोलकाता से सटे साल्ट लेक इलाके में सोमवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। भारी बारिश के बीच भी हजार से ज्यादा शिक्षक हाथों में तख्तियां लिए, नारे लगाते हुए राज्य शिक्षा विभाग के मुख्यालय बिकाश भवन के बाहर जमा हो गए। ये सभी वो शिक्षक हैं जिनकी नौकरी अदालती फैसलों की वजह से चली गई थी और अब वे सरकार से एक ही मांग कर रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। दरअसल यह पूरा मामला 2016 के स्कूल सर्विस कमीशन यानी एसएससी परीक्षा से जुड़ा है, जिसके जरिए हजारों उम्मीदवारों को शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया था। लेकिन 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाईं और 25,753 नियुक्तियों को रद्द कर दिया। पीड़ित पक्ष इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, मगर 2025 में शीर्ष अदालत ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी के बाद से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी अधर में लटक गई।

शिक्षकों की मांग है कि जल्द हो भर्ती प्रक्रिया

सोमवार का धरना 'डिजर्विंग टीचर्स फोरम' के बैनर तले आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने साल्ट लेक स्थित करुणामयी क्रॉसिंग से एक जुलूस निकाला, जो होते-होते बिकाश भवन के सामने जमावड़े में तब्दील हो गया। तेज बारिश भी इन शिक्षकों के हौसले को कम नहीं कर सकी और वे घंटों सड़क पर डटे रहे। इनकी सीधी मांग है कि जिन योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द हुई है, उनके लिए भर्ती प्रक्रिया को बिना देरी किए पूरा किया जाए। फोरम के सदस्य सुब्रत विश्वास ने पीटीआई से बातचीत में कहा, "हम शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन से मुलाकात चाहते हैं, साथ ही मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी भी इस मामले में हस्तक्षेप करें, यही हमारी मांग है।" उनकी बात से साफ झलकता है कि आंदोलनकारी अब सीधे सरकार के शीर्ष स्तर से बातचीत चाहते हैं, ताकि लंबे समय से लटका यह विवाद आखिरकार सुलझ सके।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 30 मई 2027 तक 2016 की एसएससी नियुक्तियों से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए भर्ती परीक्षा कराने की समय-सीमा तय कर दी है। यानी सरकार के पास अब भी कुछ वक्त बचा है, मगर आंदोलनकारी इस समयसीमा का इंतजार करने के बजाय जल्द कार्रवाई चाहते हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया, ताकि हालात काबू में रहें।

बीजेपी से भी उम्मीद

दिलचस्प बात यह है कि सुब्रत विश्वास ने यह भी कहा कि पहले जब तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी, तब बीजेपी ने इन बर्खास्त शिक्षकों का साथ दिया था। अब जब राज्य में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि बीजेपी अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए इस मुद्दे पर पारदर्शी और तेज भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने में मदद करेगी। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब प्रभावित शिक्षक लगातार अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। इनमें से कई तो सालों तक स्कूलों में पढ़ाते रहे, मगर एक अदालती आदेश ने रातों-रात उनकी नौकरी छीन ली। अब वे बस इतना चाहते हैं कि एक नई और साफ-सुथरी भर्ती प्रक्रिया के जरिए उन्हें दोबारा स्कूल शिक्षा व्यवस्था में लौटने का मौका मिले। फिलहाल गेंद राज्य सरकार के पाले में है। देखना यह होगा कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर कितनी जल्दी कोई ठोस फैसला लेती है, या फिर यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा तक यूं ही खिंचता रहेगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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